सेबी ने चुनिंदा कृषि जिंस डेरिवेटिव्स में चरणबद्ध फिजिकल सेटलमेंट का प्रस्ताव रखा, 2 जून तक मांगे सुझाव

सेबी ने चुनिंदा कृषि जिंस डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट में चरणबद्ध तरीके से फिजिकल सेटलमेंट लागू करने का प्रस्ताव रखा है। मंगलवार को जारी प्रस्ताव के अनुसार, कॉन्ट्रैक्ट शुरुआत में वित्तीय सेटलमेंट के साथ ट्रेड होंगे और तय ट्रेडिंग वॉल्यूम या ओपन इंटरेस्ट सीमा पूरी होने पर अनिवार्य फिजिकल सेटलमेंट में बदल जाएंगे।

शेयर और कमोडिटी बाजार के रेगुलेटर सेबी ने कृषि जिंस डेरिवेटिव्स में तरलता (लिक्विडिटी) और भागीदारी बढ़ाने के उद्देश्य से चुनिंदा कृषि जिंस डेरिवेटिव्स कॉन्ट्रैक्ट में चरणबद्ध तरीके से फिजिकल सेटलमेंट लागू करने का प्रस्ताव रखा है। मंगलवार को जारी कंसल्टेशन पेपर के अनुसार, एक्सचेंजों को पायलट आधार पर ऐसे डिलीवरी-आधारित कृषि जिंस कॉन्ट्रैक्ट शुरू करने की अनुमति दी जा सकती है, जो शुरुआत में वित्तीय सेटलमेंट वाले कॉन्ट्रैक्ट्स के रूप में ट्रेड होंगे। बाद में औसत दैनिक कारोबार मूल्य (ADTV), ओपन इंटरेस्ट या दो वर्ष की अवधि पूरी होने जैसे पूर्व-निर्धारित मानकों को पूरा करने पर इन्हें अनिवार्य फिजिकल सेटलमेंट में बदला जाएगा। नियामक ने सुझाव दिया है कि मक्का, मूंगफली और मिर्च जैसी कृषि जिंसों को इस पायलट में शामिल किया जा सकता है।

सेबी ने कहा कि फिजिकल सेटलमेंट लंबे समय से भारत के कृषि जिंस डेरिवेटिव्स ढांचे का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है, क्योंकि इससे फ्यूचर्स कीमतों और भौतिक बाजार के बीच तालमेल बना रहता है तथा अत्यधिक सट्टेबाजी पर रोक लगती है। हालांकि नियामक ने माना कि किसी कॉन्ट्रैक्ट की शुरुआत से ही अनिवार्य फिजिकल सेटलमेंट लागू करने से नए या कम कारोबार वाले कॉन्ट्रैक्ट्स में लिक्विडिटी और व्यापक भागीदारी प्रभावित हो सकती है।

कंसल्टेशन पेपर में कहा गया है कि हाल के वर्षों में कई कृषि जिंस कॉन्ट्रैक्ट्स में कम ट्रेडिंग वॉल्यूम और सीमित भागीदारी के कारण कुछ कॉन्ट्रैक्ट्स बंद भी करने पड़े। सेबी का मानना है कि चरणबद्ध व्यवस्था से बाजार सहभागियों को कॉन्ट्रैक्ट की शर्तों, डिलीवरी मानकों और वेयरहाउसिंग ढांचे को समझने का समय मिलेगा, जिससे बाद में फिजिकल सेटलमेंट सुचारू रूप से लागू किया जा सकेगा।

सेबी ने स्पष्ट किया कि यह प्रस्ताव फिजिकल सेटलमेंट के सिद्धांत को कमजोर नहीं करता। कॉन्ट्रैक्ट्स शुरुआत से ही डिलीवरी-आधारित रहेंगे, जिनमें गुणवत्ता मानक, डिलीवरी सेंटर और सेटलमेंट प्रक्रिया जैसी सभी व्यवस्थाएं शामिल होंगी। वित्तीय सेटलमेंट वाला चरण केवल अस्थायी संक्रमणकालीन व्यवस्था होगी।

सेबी ने इस प्रस्ताव पर सभी पक्षों से टिप्पणियां आमंत्रित की हैं, जिनमें वित्तीय सेटलमेंट चरण के दौरान सुरक्षा उपायों और उपयुक्त कृषि जिंसों के चयन पर सुझाव शामिल हैं। हितधारक 2 जून 2026 तक अपनी टिप्पणियां भेज सकते हैं।