भारत के ऑटोमोबाइल रिटेल बाजार ने सितंबर में अब तक का अपना सबसे बेहतर प्रदर्शन दर्ज किया, लेकिन ट्रैक्टर बिक्री का रुझान इससे अलग रहा। फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशंस (FADA) के नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, सितंबर 2026 में ट्रैक्टरों का रिटेल पंजीकरण 76,906 इकाई रहा। यह सितंबर 2025 में दर्ज 67,612 इकाई की तुलना में सालाना आधार पर 13.75 प्रतिशत की वृद्धि है। हालांकि, अगस्त 2026 में दर्ज 87,977 इकाइयों की तुलना में सितंबर में बिक्री में मासिक आधार पर 12.58 प्रतिशत की गिरावट आई।
ट्रैक्टर बिक्री में मासिक आधार पर आई इस गिरावट के पीछे मुख्य रूप से दो कारण रहे - त्योहारों का कैलेंडर आगे खिसकना और मानसून का असमान वितरण। इस वर्ष प्रमुख त्योहार अक्टूबर में देर से पड़ने के कारण कृषि क्षेत्र के खरीदारों ने महंगे कृषि उपकरणों की खरीद टाल दी। कुछ क्षेत्रों में असमान बारिश ने भी मांग को प्रभावित किया।
मासिक गिरावट के बावजूद कुल आंकड़े कृषि मशीनरी क्षेत्र में मांग की मजबूत स्थिति का संकेत देते हैं। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली छमाही, यानी अप्रैल से सितंबर 2026 के दौरान कुल ट्रैक्टर बिक्री 5,56,862 इकाई रही। यह पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में दर्ज 4,64,778 इकाइयों की तुलना में 19.81 प्रतिशत अधिक है।
भौगोलिक स्थिति और ईंधन का रुझान
क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (RTO) के पंजीकरण आंकड़ों के विश्लेषण से ट्रैक्टर बाजार की ग्रामीण निर्भरता स्पष्ट होती है। सितंबर 2026 में कुल ट्रैक्टर पंजीकरण में ग्रामीण क्षेत्रों की हिस्सेदारी 81.4 प्रतिशत, जबकि शहरी क्षेत्रों की हिस्सेदारी 18.6 प्रतिशत रही।
ग्रामीण RTO में ट्रैक्टर बिक्री सालाना आधार पर 15.56 प्रतिशत बढ़ी, जबकि शहरी क्षेत्रों में 6.44 प्रतिशत की वृद्धि हुई। हालांकि, मासिक आधार पर दोनों क्षेत्रों में गिरावट दर्ज की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में पंजीकरण 13.27 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 9.44 प्रतिशत घटे।
ईंधन के लिहाज से पारंपरिक डीजल इंजन का कृषि उपकरणों में लगभग पूर्ण दबदबा कायम है। सितंबर में कुल ट्रैक्टर बिक्री में डीजल मॉडल की हिस्सेदारी 99.95 प्रतिशत रही। अगस्त में यह 99.99 प्रतिशत और सितंबर 2025 में 99.93 प्रतिशत थी। ट्रैक्टरों में इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की स्वीकार्यता अभी शुरुआती चरण में है और सितंबर में इनकी बाजार हिस्सेदारी केवल 0.05 प्रतिशत रही।
त्योहारी तिमाही में मांग बढ़ने की उम्मीद
आगे अक्टूबर और नवंबर में ग्रामीण ट्रैक्टर मांग में मजबूत सुधार की उम्मीद की जा रही है। नवरात्रि, दशहरा और दिवाली जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान टली हुई कृषि उपकरणों की खरीद बाजार में लौट सकती है। मानसून के बाद बेहतर नकदी प्रवाह और त्योहारी अवधि में उपलब्ध अनुकूल वित्तपोषण विकल्प भी बिक्री को समर्थन दे सकते हैं।