केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने लांच किया AI बेस्ड "भारत‑VISTAAR"

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने “भारत‑VISTAAR" को पूछो और सीधे जवाब पाओ” वाला प्लेटफॉर्म बताते हुए कहा कि अब किसान को न दफ्तरों के चक्कर लगाने होंगे, न जटिल ऐप्लिकेशन से जूझना पड़ेगा, सिर्फ मोबाइल उठाकर 155261 नंबर डायल करना होगा

जयपुर में मंगलवार को आयोजित एक कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने "भारत‑VISTAAR" के पहले चरण को लांच किया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में किसानों के साथ ही राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी, राजस्थान सरकार के कृषि मंत्री श्री किशोरी लाल मीणा, जयपुर सांसद और अन्य जनप्रतिनिधियों के साथ ही भारत सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट व राज्य सरकार के अधिकारी उपस्थित थे। केंद्रीय एवं राज्य कृषि विश्वविद्यालयों के कुलपति और देशभर के ICAR संस्थानों तथा KVKs के प्रतिनिधि वर्चुअल रूप से कार्यक्रम से जुड़े। 

केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने “भारत‑VISTAAR" को पूछो और सीधे जवाब पाओ” वाला प्लेटफॉर्म बताते हुए कहा कि अब किसान को न दफ्तरों के चक्कर लगाने होंगे, न जटिल ऐप्लिकेशन से जूझना पड़ेगा, सिर्फ मोबाइल उठाकर 155261 नंबर डायल करना होगा। उन्होंने समझाया कि फसल में रोग लगे, बोनी का सही समय जानना हो, अगले दिन बारिश होगी या नहीं, या अलग‑अलग मंडियों के भाव चाहिए हों – किसान सिर्फ फोन पर सवाल पूछेगा और तुरंत जवाब मिलेगा कि कौन‑सी दवा डालें, कब बोनी करें व जयपुर, जोधपुर, उदयपुर, दिल्ली या मुंबई की मंडियों में क्या भाव चल रहे हैं।

11 भारतीय भाषाओं, योजनाओं और शिकायत निवारण तक पूरे एग्री सिस्टम को जोड़ने की घोषणा

उन्होंने बताया कि भारत‑VISTAAR अभी हिंदी और अंग्रेज़ी में शुरू हो रहा है, लेकिन इसे चरणबद्ध तरीके से 11 भारतीय भाषाओं – जैसे गुजराती, तमिल, बंगला, असमिया, कन्नड़ आदि – में विस्तारित किया जाएगा, ताकि देश के हर प्रांत का किसान अपनी भाषा में सही सलाह ले सके। उन्होंने कहा कि इस प्लेटफॉर्म पर पीएम‑किसान, फसल बीमा, सॉइल हेल्थ कार्ड, संशोधित ब्याज अनुदान, कृषि यंत्रीकरण, पर ड्रॉप‑मोर क्रॉप, पीएम कृषि सिंचाई योजना, पीएम अन्नदाता आय संरक्षण अभियान, कृषि अवसंरचना कोष और किसान क्रेडिट कार्ड जैसी योजनाओं की जानकारी, पात्रता, आवेदन की स्थिति और शिकायत निवारण तक की सुविधा उपलब्ध रहेगी और आगे “फार्मर आईडी” के जरिए खेत, मिट्टी और फसल से जुड़ा पूरा प्रोफाइल भी एक ही जगह पर जुड़ जाएगा

अपने संबोधन में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि एक नेता हैं, जो “पार्ट‑टाइम पॉलिटिशियन और फुल‑टाइम ड्रामेबाज़” हैं, जिन्हें न ट्रेड की समझ है, न ट्रेडिशन की और न ही गांव‑खेत की असली जिंदगी का अनुभव है। कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने किसानों के बीच खड़े होकर पूछा कि राहुल गांधी यह बताएं कि जब स्वामीनाथन कमेटी ने लागत पर 50% मुनाफा जोड़कर MSP तय करने की सिफारिश की थी, तब कांग्रेस‑नीत यूपीए सरकार ने कोर्ट में हलफनामा देकर इसे मानने से इनकार क्यों किया। उन्होंने कहा कि जिस बात को कांग्रेस “बाज़ार विकृति” का नाम देकर ठुकराती रही, उसी को 2019 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने किसानों के हित में धरातल पर उतारते हुए लागत पर 50% लाभ जोड़कर MSP तय करने का फैसला लागू किया।

सेब, दाल, सोयाबीन, मक्का और डेयरी पर स्पष्ट लाइन

सेब के मुद्दे पर उठाए जा रहे सवालों का उत्तर देते हुए कृषि मंत्री ने बताया कि भारत को हर साल लगभग 5.5 लाख टन सेब की जरूरत होती है, जो अभी तुर्किये और ईरान जैसे देशों से भी आता है। उन्होंने कहा कि यदि इसमें से मात्र 1 लाख मीट्रिक टन सेब अमेरिका से लिया जाए और उस पर आयात मूल्य ₹80 प्रति किलो के ऊपर ₹25 शुल्क जोड़कर कोटा तय किया जाए, तो यह भारत के सेब उत्पादकों को कोई नुकसान नहीं पहुंचाएगा, बल्कि “तुर्किये से लेने के बजाय कहीं और से लेने” का मामूली बदलाव मात्र है। सोयाबीन और मक्का पर उन्होंने स्पष्ट किया कि इन पर कोई रियायत नहीं दी गई और यह भी याद दिलाया कि कांग्रेस शासन में भी 20 अरब डॉलर के कृषि उत्पादों का आयात होता था, जिसमें डेयरी उत्पाद भी शामिल थे। चौहान ने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने साफ निर्देश दिया है कि दूध, घी, दही, पनीर सहित कोई भी डेयरी उत्पाद भारत की धरती पर किसी भी कीमत पर आयात नहीं होने दिया जाएगा, ताकि देश के दूध उत्पादक किसानों को नुकसान न हो।

कपास के मामले में मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि घरेलू उत्पादन के मुकाबले उद्योगों की जरूरत अधिक होने से उद्योगों को कुछ कपास आयात करना पड़ता है, जिससे कपड़ा उद्योग चल सके, रोजगार बने और तैयार वस्त्रों का निर्यात बढ़े। उन्होंने बताया कि भारत का टेक्सटाइल निर्यात विभिन्न उत्पादों को मिलाकर लगभग 4 लाख करोड़ रुपये है, जिसे 45 लाख करोड़ रुपये तक पहुंचाने की क्षमता है और इसके फलस्वरूप अंततः लाभ किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को ही मिलेगा। 

शिवराज सिंह चौहान ने अपने राजनीतिक संदेश को आगे बढ़ाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने राष्ट्र के सामने दो वादे किए थे – “भारत को कभी झुकने नहीं दूंगा” और “किसानों के हितों को सर्वोपरि रखूंगा, उन पर आंच नहीं आने दूंगा” – और दोनों पर सरकार मजबूती से खड़ी है। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर, एयरस्ट्राइक और सर्जिकल स्ट्राइक का जिक्र करते हुए कहा कि जैसे राष्ट्रीय सुरक्षा पर कोई समझौता नहीं किया गया, वैसे ही कृषि और किसानों के हितों पर भी कोई समझौता नहीं होगा और हर वैश्विक समझौता “किसान‑प्रथम दृष्टिकोण” से ही देखा जाएगा।