केरल चुनाव 2026: वाम मोर्चा का अतिरिक्त फंडिंग के साथ मनरेगा जारी रखने, तो यूडीएफ का कृषि बजट लाने का वादा

Kerala Assembly Election 2026: केरल विधानसभा चुनाव के प्रमुख मुद्दों में कृषि और ग्रामीण आजीविका भी शामिल हैं। एलडीएफ का घोषणापत्र उत्पादकता बढ़ाने और कल्याण पर, यूडीएफ मूल्य समर्थन और सुधारों पर तथा एनडीए संरचनात्मक बदलाव और खाद्य सुरक्षा पर जोर देता है। तीनों रोजगार, पेंशन और बुनियादी ढांचे का वादा करते हैं, लेकिन किसानों की आय बढ़ाने के तरीके अलग हैं।

केरल में गुरुवार, 9 अप्रैल को विधानसभा चुनाव होने हैं। कुल 140 सीटों वाली विधानसभा के लिए मंगलवार शाम चुनाव प्रचार थम गया। इस चुनाव के लिए वाम लोकतांत्रिक मोर्चा (एलडीएफ), संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) और भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के घोषणापत्र कृषि, ग्रामीण आजीविका और कल्याण पर केंद्रित अलग-अलग लेकिन आंशिक रूप से समान दृष्टिकोण पेश करते हैं। किसानों, बागान श्रमिकों और ग्रामीण परिवारों के निर्णायक मतदाता होने के कारण, तीनों ने कृषि आय, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक संरक्षण को प्राथमिकता दी है। सत्तारूढ़ एलडीएफ सरकारी समर्थन और निरंतरता पर जोर देता है, वहीं यूडीएफ आय सुरक्षा और संस्थागत सुधारों पर, जबकि बीजेपी संरचनात्मक बदलाव और आत्मनिर्भरता पर ध्यान केंद्रित करती है।

कृषि

एलडीएफः सत्तारूढ़ एलडीएफ ने कृषि के आधुनिकीकरण और उत्पादकता बढ़ाने पर जोर दिया है। इसके घोषणापत्र में सटीक खेती (प्रिसीजन फार्मिंग), मशीनीकरण, जलवायु-लचीली बागान प्रणाली और किसान उत्पादक संगठनों के विस्तार का वादा किया गया है। किसानों को उपज की बेहतर कीमत दिलाने के लिए हर पंचायत में स्थानीय बाजार स्थापित करने और सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही रबर जैसी फसलों के समर्थन मूल्य बढ़ाने और मनरेगा को अतिरिक्त राज्य फंडिंग के साथ जारी रखने की प्रतिबद्धता जताई गई है, जो ग्रामीण रोजगार और आय स्थिरता पर ध्यान को दर्शाती है।

यूडीएफः कांग्रेस के नेतृत्व वाले इस मोर्चे ने अपनी कृषि रणनीति को मूल्य समर्थन और संस्थागत सुधारों पर केंद्रित किया है। इसमें अलग कृषि बजट और एम.एस. स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने का वादा शामिल है। प्रमुख प्रस्तावों में रबर के लिए 300 रुपये प्रति किलोग्राम समर्थन मूल्य और चावल के लिए 35 रुपये प्रति किलोग्राम खरीद मूल्य शामिल हैं, साथ ही नारियल और अन्य फसलों के लिए खरीद केंद्रों का विस्तार भी किया जाएगा। यूडीएफ ने किसानों से जुड़े भूमि विवादों के समाधान और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने पर भी जोर दिया है।

बीजेपीः पार्टी ने कृषि में संरचनात्मक बदलाव का प्रस्ताव रखा है और केरल को खाद्यान्न अधिशेष राज्य बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत सभी आवश्यक फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य, डिजिटल खरीद प्रणाली और राज्यव्यापी कोल्ड स्टोरेज नेटवर्क विकसित करने की योजना है, जिससे फसल के बाद होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। बागान क्षेत्रों में बहुफसली खेती की अनुमति और ग्रामीण आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने का भी प्रस्ताव है। कृषि को खाद्य प्रसंस्करण उद्योगों और ग्रामीण उद्यमों से जोड़कर किसानों की आय बढ़ाने और आयात पर निर्भरता कम करने की रणनीति अपनाई गई है।

ग्रामीण विकास 

कृषि के अलावा, ग्रामीण विकास भी तीनों के एजेंडे में प्रमुख है। एलडीएफ ने “मिशन 100,000” के तहत सूक्ष्म उद्यमों को बढ़ाने और एमएसएमई को विस्तार देने का प्रस्ताव रखा है, जबकि यूडीएफ ने आवास, मत्स्य और तटीय विकास पर “मिशन समुद्र” के जरिए ध्यान केंद्रित किया है। दूसरी ओर, बीजेपी ने आत्मनिर्भर गांव, ग्रामीण बुनियादी ढांचा और बाजार से बेहतर जुड़ाव पर जोर दिया है।

रोजगार 

रोजगारः एलडीएफ ने पांच वर्षों में 20 लाख नौकरियां देने का लक्ष्य रखा है, जिसमें कौशल विकास, कैंपस प्लेसमेंट और उद्यमिता को बढ़ावा शामिल है। यूडीएफ युवाओं को ब्याज मुक्त ऋण और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सशक्त बनाने की बात करता है, जबकि बीजेपी ने विजिनजम पोर्ट के आसपास औद्योगिक कॉरिडोर और कृषि आधारित उद्योगों के जरिए रोजगार सृजन की योजना दी है।

समाज कल्याण

समाज कल्याण के क्षेत्र में तीनों दलों ने 3,000 रुपये मासिक पेंशन का वादा किया है, हालांकि बीजेपी ने इसे विशेष रूप से बीपीएल परिवारों की महिला मुखिया, विधवाओं और वरिष्ठ नागरिकों के लिए लक्षित किया है। महिलाओं के लिए योजनाओं में भी अंतर है - एलडीएफ रोजगार सृजन पर, यूडीएफ मुफ्त बस यात्रा और छात्र भत्ता पर, जबकि बीजेपी ने 2,500 रुपये मासिक खाद्य और स्वास्थ्य सहायता कार्ड पर जोर दिया है।

स्वास्थ्य 

एलडीएफ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को फैमिली हेल्थ सेंटर में बदलने और डिजिटल स्वास्थ्य प्रणाली पर जोर देता है। यूडीएफ ने 25 लाख रुपये तक के स्वास्थ्य बीमा का वादा किया है, जबकि बीजेपी ने आयुष्मान भारत के तहत सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज और राज्य में एम्स स्थापित करने की बात कही है।

इन्फ्रास्ट्रक्चर

बुनियादी ढांचे के विकास में भी प्रतिस्पर्धा दिखती है। बीजेपी और एलडीएफ दोनों हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं पर जोर देते हैं, जबकि यूडीएफ जलमार्ग और तटीय बुनियादी ढांचे को प्राथमिकता देता है। मेट्रो विस्तार तीनों घोषणापत्रों में शामिल है।