पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में विधानसभा चुनावों में ऐतिहासिक मतदान, आज़ादी के बाद सबसे अधिक वोटिंग

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु ने 2026 के विधानसभा चुनावों में अभूतपूर्व मतदान दर्ज कर लोकतांत्रिक इतिहास रच दिया। पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 92.47% मतदान हुआ, जबकि तमिलनाडु की 234 सीटों पर 85.05% मतदान दर्ज किया गया। दोनों राज्यों में यह आजादी के बाद का सबसे अधिक मतदान है।

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु ने 2026 विधानसभा चुनावों में आज़ादी के बाद सबसे अधिक मतदान दर्ज किया। पश्चिम बंगाल में पहले चरण में 152 सीटों पर 92.47% और तमिलनाडु में सभी 234 सीटों के लिए 85.05% मतदान हुआ। वर्ष 2021 के विधानसभा चुनावों में पश्चिम बंगाल में 85.2 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया था, जबकि तमिलनाडु में 76.6 प्रतिशत मतदान हुआ था।
 
पश्चिम बंगाल में पहले चरण का मतदान 92.47% के रिकॉर्ड आंकड़े के साथ संपन्न हुआ। निर्वाचन आयोग के अनुसार कई जिलों में 90 प्रतिशत से अधिक मतदान दर्ज किया गया। दक्षिण दिनाजपुर 94.85% मतदान के साथ सबसे आगे रहा, इसके बाद कूचबिहार (94.54%), बीरभूम (93.70%), जलपाईगुड़ी (93.23%) और मुर्शिदाबाद (92.93%) का स्थान रहा।
 
मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा कि भारी मतदान तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के पक्ष में जनसमर्थन का संकेत है। कोलकाता में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि मतदान के रुझान से स्पष्ट है कि उनकी पार्टी जीत की ओर बढ़ रही है।
 
उन्होंने कहा, “अगर मेरा आकलन सही है, तो आज हुए मतदान के आधार पर मैं कह सकती हूं कि हम जीत की मजबूत स्थिति में पहुंच चुके हैं।” ममता बनर्जी ने इस भारी मतदान को जनता के अधिकारों की रक्षा की लड़ाई बताया।
 
उन्होंने कहा, “यह चुनाव लोगों के अधिकारों की रक्षा की लड़ाई है, इसलिए लोगों ने इतनी बड़ी संख्या में मतदान किया।” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यदि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सत्ता में आती है, तो वह नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) लागू करेगी, जिससे लोग अधिक संख्या में मतदान के लिए प्रेरित हुए।
 
वहीं भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष नितिन नवीन ने टीएमसी के दावों का जवाब देते हुए कहा, “आज का सूर्यास्त तृणमूल कांग्रेस के अंत का संकेत है।”
 
पश्चिम बंगाल के मुख्य निर्वाचन अधिकारी मनोज अग्रवाल ने कहा कि मतदान शांतिपूर्ण ढंग से और बिना किसी डर के संपन्न हुआ। मतदान केंद्रों की सुरक्षा पूरी तरह केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPF) के नियंत्रण में थी।
 
उन्होंने कहा, “लोग बिना किसी भय के मतदान करने बाहर आए। मतदान केंद्रों की सुरक्षा पूरी तरह CAPF के हाथ में थी और इस बार वेबकास्टिंग 100 प्रतिशत त्रुटि रहित रही।”
 
विशेष चुनाव पर्यवेक्षक एन.के. मिश्रा ने कहा कि चुनाव आयोग की प्राथमिकता पश्चिम बंगाल जैसे राज्य में, जो चुनावी हिंसा के लिए जाना जाता है, शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और भयमुक्त चुनाव सुनिश्चित करना था।
 
उन्होंने बताया कि कूचबिहार, मालदा, मुर्शिदाबाद और बीरभूम जैसे संवेदनशील जिलों में केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की विशेष तैनाती की गई ताकि मतदान प्रक्रिया बाधारहित रहे।

 
तमिलनाडु में भी रिकॉर्ड मतदान
 
उधर तमिलनाडु में 234 विधानसभा सीटों पर हुए मतदान में भी ऐतिहासिक 85.05% मतदान दर्ज किया गया। मतदान शांतिपूर्ण रहा और किसी बड़ी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली।
 
यह चुनाव सत्तारूढ़ द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK), विपक्षी अखिल भारतीय अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (AIADMK) और अभिनेता-राजनेता जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) के बीच त्रिकोणीय मुकाबले के रूप में देखा गया।
 
डीएमके ने परिसीमन (Delimitation) के मुद्दे को प्रमुखता से उठाते हुए एआईएडीएमके-भाजपा गठबंधन को निशाने पर लिया, जबकि एआईएडीएमके ने बढ़ते कर्ज और कानून-व्यवस्था में गिरावट जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरा।
 
नई पार्टी होने के बावजूद विजय की TVK ने चुनावी मैदान में मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई, वहीं तमिल राष्ट्रवादी नेता सीमन की नाम तमिल कच्ची (NTK) भी प्रभावशाली भूमिका में रही। डीएमके और एआईएडीएमके दोनों ने सरकार बनाने का दावा किया है, जिससे तमिलनाडु 2026 के सबसे चर्चित चुनावी राज्यों में शामिल हो गया है।