केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर में मत्स्य पालन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए अहम कदम उठाया है। केंद्रीय मत्स्य, पशुपालन एवं डेयरी तथा पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह ने अनंतनाग जिले में 100 करोड़ रुपये की लागत से एक इंटीग्रेटेड एक्वा पार्क परियोजना को मंजूरी देने की घोषणा की है।
यह घोषणा श्रीनगर स्थित शेरे कश्मीर इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस सेंटर में आयोजित राष्ट्रीय कोल्ड-वॉटर फिशरीज सम्मेलन के दौरान की गई। कार्यक्रम का आयोजन केंद्र सरकार के मत्स्य पालन विभाग ने किया था। इस अवसर पर मंत्री ने कोल्ड-वॉटर फिशरीज के विकास के लिए मॉडल गाइडलाइन भी जारी की। इस कार्यक्रम में जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, केंद्रीय राज्य मंत्री एस.पी. सिंह बघेल सहित तथा कई वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ मौजूद रहे।
राजीव रंजन सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि अनंतनाग में स्थापित होने वाला यह एक्वा पार्क इस क्षेत्र में मत्स्य पालन ढांचे को मजबूत करेगा, कोल्ड-वॉटर फिशरीज के विकास को बढ़ावा देगा, मछली उत्पादन में वृद्धि करेगा और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। उन्होंने विशेष रूप से ट्राउट मछली के उत्पादन को बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य कोल्ड वॉटर क्षेत्रों में पूरी वैल्यू चेन का विकास करना है, ताकि किसान उत्पादन से लेकर प्रसंस्करण और मार्केटिंग तक आधुनिक सुविधाओं का लाभ उठा सकें। मंत्री ने यह भी कहा कि ट्राउट और अन्य ठंडे पानी की प्रजातियों की अंतरराष्ट्रीय बाजार में अच्छी मांग है और निर्यात की संभावनाओं को बढ़ाया जा सकता है।
केंद्रीय मंत्री ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से अपील की कि वे मछुआरों को सहकारी समितियों और फिश फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (FFPO) के माध्यम से संगठित करें। उन्होंने कहा कि अनंतनाग में स्वीकृत एक्वा पार्क और फिशरीज एंड एक्वाकल्चर इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट फंड (FIDF) के माध्यम से स्थानीय उद्यमों को विस्तार का अवसर मिलेगा।
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री, उपराज्यपाल और मुख्यमंत्री ने संयुक्त रूप से रिजर्वायर फिशरीज और एक्वाकल्चर प्रबंधन के लिए मॉडल गाइडलाइन भी जारी की। उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने अपने संबोधन में कहा कि अनंतनाग में प्रस्तावित एक्वा पार्क जम्मू कश्मीर के मत्स्य क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने यह भी कहा कि हिमालयी क्षेत्र भारत में कोल्ड-वॉटर फिशरीज का प्राकृतिक केंद्र है और यहां ब्रूडस्टॉक विकास, हैचरी, फीड मिल और रीसर्कुलेटिंग एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) जैसी सुविधाओं के जरिए महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। उन्होंने जोर दिया कि बेहतर बाजार संपर्क और किसानों की आय में वृद्धि भविष्य की रणनीति का प्रमुख लक्ष्य होना चाहिए।

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के समृद्ध कोल्ड वॉटर संसाधनों का सतत उपयोग करना बेहद महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक पद्धतियों को अपनाकर कोल्ड वॉटर एक्वाकल्चर का विस्तार किया जा सकता है, जिससे पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना उत्पादन बढ़ाया जा सकेगा। उन्होंने यह भी कहा कि नई तकनीकों और शोध संस्थानों के साथ सहयोग के जरिए इस क्षेत्र में उत्पादकता और स्थिरता को मजबूत किया जा सकता है।