बेमौसम बारिश और मौसम की मार से प्रभावित गेहूं की गुणवत्ता को देखते हुए केंद्र सरकार ने हरियाणा में खरीद मानकों में अहम छूट देने का निर्णय लिया है। इससे पहले राजस्थान में भी गेहूं खरीद मानकों में ढील दी जा चुकी है, जबकि पंजाब सहित अन्य राज्यों के किसान अभी भी राहत का इंतजार कर रहे हैं।
केंद्र सरकार ने हरियाणा के किसानों को राहत देते हुए गेहूं खरीद मानकों में अस्थायी छूट दी है। उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्रालय ने रबी मार्केटिंग सीजन 2026-27 के लिए यह फैसला हरियाणा सरकार के अनुरोध पर लिया है, ताकि बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से प्रभावित किसानों को अपनी फसल एमएसपी पर बेचने में परेशानी न हो।
केंद्र के निर्णय के अनुसार, पूरे हरियाणा में गेहूं की खरीद अब शिथिल मानकों के साथ की जाएगी। प्रमुख छूटें इस प्रकार हैं:
चमक में कमी (Lustre Loss): चमक में कमी की सीमा को बढ़ाकर 70% तक स्वीकार किया गया है।
सिकुड़े और टूटे दाने (Shrivelled & Broken Grains): सीमा 6% से बढ़ाकर 15% कर दी गई है।
क्षतिग्रस्त अनाज (Damaged Grain): खराब और मामूली क्षतिग्रस्त अनाज की कुल मात्रा 6% तक सीमित रहेगी।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि इन छूटों के तहत खरीदे गए गेहूं को अलग से रखा जाएगा और उसका अलग हिसाब रखा जाएगा, ताकि गुणवत्ता प्रबंधन बना रहे।
इस फैसले से हरियाणा के लाखों किसानों को एमएसपी (2585 रुपये प्रति क्विंटल) पर अपनी उपज बेचने में आसानी होगी और वे मजबूरी में औने-पौने दाम पर फसल बेचने से बच सकेंगे।
मार्च और अप्रैल में हुई असमय बारिश के कारण गेहूं के दानों में नमी बढ़ने, सिकुड़न और चमक में कमी जैसी समस्याएं सामने आई हैं। इसके चलते बड़ी मात्रा में फसल निर्धारित गुणवत्ता मानकों से बाहर हो रही थी, जिससे खरीद प्रक्रिया प्रभावित हुई। हरियाणा में किसान संगठनों और विपक्षी दलों द्वारा भी गेहूं खरीद मानकों में ढील दिए जाने की मांग की जा रही थी।
खरीद की रफ्तार धीमी
गेहूं कटाई के समय बारिश और खरीद मानकों में छूट के इंतजार के चलते इस साल सरकारी खरीद अभी तक रफ्तार नहीं पकड़ पाई है। इसी वजह से देशभर में गेहूं की सरकारी खरीद में गिरावट दर्ज की गई है।
चालू खरीद सीजन 2026-27 में अब तक गेहूं की सरकारी खरीद 15.30 लाख टन रही है, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 50.08 लाख टन खरीद हो चुकी थी। 13 अप्रैल तक हरियाणा से 11.23 लाख टन, पंजाब से 29,925 टन, मध्य प्रदेश से 1.02 लाख टन और उत्तर प्रदेश से 96,670 टन गेहूं की खरीद हुई है।
राजस्थान और हरियाणा में खरीद मानकों में छूट से आने वाले दिनों में खरीद में तेजी आने की उम्मीद है।
आवक के मुकाबले एक चौथाई खरीद
हरियाणा में गेहूं खरीद 1 अप्रैल से शुरू हो चुकी है और राज्य का लक्ष्य 72 लाख टन गेहूं खरीदने का है। 12 अप्रैल तक राज्य की मंडियों में लगभग 39.65 लाख टन गेहूं की आवक हो चुकी है। जिसमें से बायोमैट्रिक सत्यापन 30.90 लाख टन गेहूं के लिए हुआ और 10.92 लाख टन गेहूं की खरीद की गई। आवक के मुकाबले एक चौथाई खरीद के पीछे जटिल प्रक्रिया और खरीद मानकों में छूट के इंतजार को वजह माना जा रहा है।
राज्य में सरसों की खरीद हैफेड एवं गेहूं की खरीद खाद्य, नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग, हैफेड, हरियाणा वेयर हाउसिंग कारपोरेशन तथा भारतीय खाद्य निगम द्वारा की जा रही है।
किसानों को राहत, लेकिन दिक्कतें काफी
हरियाणा में खरीद मानकों में छूट ऐसे समय दी गई है जब मंडियों में बड़ी मात्रा में गेहूं पहुंच चुका है, लेकिन खरीद में देरी और गुणवत्ता संबंधी अड़चनों के कारण किसानों को इंतजार करना पड़ रहा था।
हालांकि, जमीनी स्तर पर अभी भी कई चुनौतियां बनी हुई हैं। कई मंडियों में खरीद प्रक्रिया धीमी है, ई-खरीद पोर्टल में तकनीकी दिक्कतें हैं, और भंडारण व परिवहन की कमी जैसी समस्याएं भी सामने आ रही हैं। खरीद की जटिल प्रक्रिया और धीमी खरीद को लेकर विपक्ष भी सरकार पर हमलावर है।