छत्तीसगढ़ सरकार ने खरीफ सीजन 2026 से कृषक उन्नति योजना के नए स्वरूप को मंजूरी दी है। इसके तहत धान की जगह दूसरी फसलों की खेती करने वाले किसानों को 15,000 रुपये प्रति एकड़ के हिसाब से सहायता दी जाएगी। मंगलवार को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में आयोजित कैबिनेट की बैठक में यह निर्णय लिया गया।
कैबिनेट बैठक के बाद सरकार ने बताया कि राज्य में फसल विविधीकरण को बढ़ावा देने, किसानों की आय बढ़ाने तथा धान पर अत्यधिक निर्भरता कम करने के उद्देश्य से यह निर्णय लिया गया है। धान के स्थान पर अन्य खरीफ फसलें- दलहन, तिलहन, मक्का, कोदो, कुटकी, रागी तथा कपास की खेती करने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15,000 रुपये की सहायता प्रदान की जाएगी। खरीफ 2025 में यह राशि 10,000 रुपये प्रति एकड़ थी।
किसानों को इस योजना का लाभ एकीकृत किसान पोर्टल, एग्रीस्टेक पंजीयन और डिजिटल क्रॉप सर्वे के आधार पर दिया जाएगा। सरकार का कहना है कि इस निर्णय से प्रदेश में दलहन-तिलहन एवं अन्य वैकल्पिक फसलों का रकबा बढ़ेगा, किसानों को बेहतर आय प्राप्त होगी, साथ ही कृषि क्षेत्र में दीर्घकालिक स्थिरता और जल संरक्षण को भी बढ़ावा मिलेगा। राज्य में खरीफ 2023-24 से कृषक उन्नति योजना चालू की गई थी।
मंत्रिपरिषद् ने सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के अंतर्गत पात्र हितग्राहियों को वित्त वर्ष 2026-27 में चना वितरण की निरंतरता बनाए रखने के लिए आवश्यक चना उपलब्ध कराने के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। निर्णय के अनुसार छत्तीसगढ़ राज्य नागरिक आपूर्ति निगम को नेकडेक्स-ई-मार्केट (NeML) के ई-ऑक्शन प्लेटफॉर्म के माध्यम से अधिकतम 0.25 प्रतिशत सर्विस चार्ज पर चना खरीदने की अनुमति दी गई है। साथ ही, वर्तमान व्यवस्था के तहत अप्रैल से जून 2026 तक तीन माह की अवधि बढ़ाने का अनुमोदन भी किया गया है। इस निर्णय से खाद्य एवं पोषण सुरक्षा योजनाओं के तहत पात्र परिवारों को चना वितरण निर्बाध रूप से जारी रहेगा।
एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में छत्तीसगढ़ स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड की आईपीओ (IPO) के माध्यम से स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टिंग किए जाने की सैद्धांतिक सहमति प्रदान की गई। सरकार का दावा है कि इस निर्णय से कंपनी की वित्तीय क्षमता और पारदर्शिता को नई मजबूती मिलेगी।