हिमाचल ने भांग की रेगुलेटेड खेती को दी मंजूरी, औद्योगिक इस्तेमाल को मिलेगा बढ़ावा

हिमाचल प्रदेश कैबिनेट ने भांग की रेगुलेटेड खेती को मंजूरी देने के लिए एनडीपीएस नियमों में संशोधन किया है। नई नीति के तहत चिकित्सा, वैज्ञानिक और औद्योगिक उपयोग के लिए कम THC वाली कैनबिस की नियंत्रित खेती की अनुमति होगी, जिससे किसानों की आमदनी बढ़ने और हेम्प आधारित उद्योगों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

हिमाचल प्रदेश सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए राज्य में भांग की रेगुलेटेड खेती को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में हिमाचल प्रदेश एनडीपीएस नियम, 1989 में संशोधन को मंजूरी दी गई है। इससे चिकित्सा, वैज्ञानिक और औद्योगिक उपयोग के लिए भांग की नियंत्रित खेती का रास्ता साफ हो गया है।

राज्य सरकार का कहना है कि इस नीति का उद्देश्य किसानों को अधिक आय देने वाली वैकल्पिक फसल उपलब्ध कराना और औद्योगिक हेम्प (Industrial Hemp) आधारित उद्योगों को बढ़ावा देना है। सरकार के अनुसार, औद्योगिक हेम्प का उपयोग वस्त्र, कॉस्मेटिक्स, दवा, कागज और अन्य कई उत्पादों के निर्माण में किया जा सकता है।

भांग की खेती हिमाचल के किसानों के लिए आमदनी का एक बड़ा स्रोत बन सकती है। साथ ही यह टेक्सटाइल, कॉस्मेटिक और फार्मास्यूटिकल क्षेत्रों में नए अवसर भी पैदा कर सकती है। इससे हिमाचल प्रदेश को सालाना 2,000 करोड़ रुपये तक का राजस्व प्राप्त होने की संभावना है, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था को बल मिलेगा। यही वजह है कि भांग की खेती को वैधता देने की हिमाचल सरकार की पहल को "ग्रीन टू गोल्ड" के रूप में देखा जा रहा है। सरकार की योजना भांग से जुड़े उद्योगों में स्टार्टअप और रोजगार को भी बढ़ावा देने की है।

इस फैसले से पहले राज्य सरकार ने हिमाचल सहित अन्य राज्यों के अनुभवों का अध्ययन किया और व्यापक विचार-विमर्श के बाद यह निर्णय लिया। इस मुद्दे पर गठित विधायकों की समिति ने पाया कि औद्योगिक कैनबिस की खेती से नशीले पदार्थों के दुरुपयोग को बढ़ावा नहीं मिलता, क्योंकि इसमें टेट्राहाइड्रोकैनाबिनोल (THC) यानी नशीला तत्व बहुत कम मात्रा में होता है।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह फैसला कैनबिस के रेक्रीएशनल उपयोग (नशे) को वैधता नहीं देता। केवल लाइसेंस प्राप्त संस्थाओं और किसानों को चिकित्सा, वैज्ञानिक अनुसंधान तथा औद्योगिक उद्देश्यों के लिए इसकी खेती की अनुमति दी जाएगी। खेती, प्रसंस्करण, भंडारण, परिवहन और निर्माण की पूरी प्रक्रिया सख्त निगरानी और लाइसेंसिंग व्यवस्था के तहत होगी।

नीति के तहत औद्योगिक हेम्प की उन किस्मों को बढ़ावा दिया जाएगा जिनमें THC की मात्रा 0.3 प्रतिशत से कम हो। इसके लिए प्रमाणित बीज, परीक्षण प्रयोगशालाएं और निगरानी तंत्र विकसित किए जाएंगे, ताकि फसल का उपयोग केवल वैध उद्देश्यों के लिए ही हो सके।

सरकार नशे की बजाय भांग को एक महत्वपूर्ण आर्थिक संसाधन के रूप में बढ़ावा देना चाहती है। इसके लिए राज्य के कृषि विश्वविद्यालयों में भांग की उच्च गुणवत्ता वाली और कम THC वाली किस्में विकसित करने पर जोर दिया जा रहा है।

भांग आधारित उद्योग हिमाचल की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती दे सकते हैं। राज्य के कई क्षेत्रों में कृषि भूमि खाली पड़ी है और यह फसल कम पानी तथा अपेक्षाकृत कम रासायनिक इनपुट के साथ उगाई जा सकती है। इससे किसानों की आय बढ़ने के साथ-साथ फार्मास्यूटिकल, पेपर, वस्त्र और कॉस्मेटिक उद्योगों में निवेश की संभावनाएं भी बढ़ेंगी।