डिजिटल एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने के लिए एग्री स्टैक पहल के तहत देश भर में किसानों के फार्मर आईडी बनाए जा रहे हैं। फार्मर आईडी बनाने में प्राइवेट कंपनियों की भूमिका और डेटा सुरक्षा को लेकर महाराष्ट्र विधानसभा में कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने सवाल उठाया।
वडेट्टीवार ने बुधवार को विधानसभा में प्रश्नकाल के दौरान दावा किया कि राज्य में एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है कि प्राइवेट कंपनियां इन दिनों किसानों को बिना इजाजत के ‘फार्मर ID’ बांट रही हैं। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ पहचान-पत्र बांटने का मामला नहीं है, बल्कि यह बहुत गंभीर मुद्दा है। किसानों की बेहद संवेदनशील जानकारी किसी अनजान कंपनी के हाथ लग रही है। भविष्य में इस जानकारी के गलत इस्तेमाल की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।
कांग्रेस नेता ने इस मुद्दे को सोशल मीडिया पर भी उठाते हुए ट्वीट किया कि किसानों का डेटा डिजिटल प्लेटफॉर्म पर इकट्ठा किया जा रहा है, लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि सरकार ने साइबर हैकिंग या डेटा चोरी को रोकने के लिए कोई ठोस व्यवस्था नहीं बनाई है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक प्राइवेट कंपनी किस अधिकार से किसानों की ID बना रही है और यह जानकारी उनके पास कैसे पहुंची। यह किसानों के डेटा की लूट का साफ मामला है। उन्होंने सरकार से इस पूरे मामले की जांच कराने की मांग की।
वडेट्टीवार ने यह भी जानना चाहा कि क्या प्राइवेट कंपनियों को सरकार की ओर से फार्मर आईडी बनाने का काम सौंपा गया है। किसान ID सिस्टम के तहत किसानों की व्यक्तिगत, खेत और बैंक से जुड़ी जानकारियां एकत्र की जा रही हैं। ऐसे में इस अहम डेटा की सुरक्षा और उसके दुरुपयोग को रोकने के लिए सरकार ने क्या उपाय किए हैं।
महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्ता भराणे ने स्पष्ट किया कि फार्मर ID कार्ड आधिकारिक रूप से प्रिंट कर बेचने के लिए नहीं हैं। उन्होंने कहा कि अगर कोई CSC या सर्विस सेंटर ऐसी गतिविधि में शामिल पाया जाता है तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार को अब तक फार्मर ID कार्ड की बिक्री के बारे में कोई शिकायत नहीं मिली है। हालांकि, यदि किसी भी तरह की गड़बड़ी की शिकायत मिलती है तो उसकी जांच कर कार्रवाई की जाएगी।
गौरतलब है कि देश के कृषि क्षेत्र में डिजिटलीकरण की बड़ी पहल करते हुए केंद्र सरकार ने एग्री स्टैक नाम की पहल शुरू की है, जिसके तहत देश भर के किसानों को फार्मर ID दी जा रही है। सरकार का कहना है कि यह कदम सरकारी योजनाओं का लाभ किसानों तक अधिक प्रभावी ढंग से पहुंचाने के लिए उठाया गया है और इससे किसानों को सरकारी योजनाओं तथा वित्तीय सेवाओं का लाभ लेने में आसानी होगी।