मध्यप्रदेश में अब तक 13 लाख टन गेहूं की खरीद, लक्ष्य 78 से बढ़ाकर 100 लाख टन किया; कांग्रेस का विरोध-प्रदर्शन

मध्यप्रदेश में गेहूं खरीद की धीमी रफ्तार के बीच सरकार ने लक्ष्य 78 से बढ़ाकर 100 लाख टन कर दिया है। जबकि अब तक केवल 12.94 लाख टन खरीद हुई है। अव्यवस्थाओं और पोर्टल समस्याओं को लेकर कांग्रेस और किसान संगठनों ने सरकार को घेरना शुरू कर दिया है।

मध्यप्रदेश में गेहूं के बंपर उत्पादन के बावजूद खरीद की धीमी रफ्तार किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गई है। प्रदेश में 23 अप्रैल तक कुल 12.94 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है। जबकि राज्य सरकार ने गेहूं खरीद का लक्ष्य 78 लाख टन से बढ़ाकर 100 लाख टन कर दिया है।

केंद्रीय उपभोक्ता मामले, खाद्य और सार्वजनिक वितरण मंत्री प्रह्लाद जोशी ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर मध्यप्रदेश में गेहूं खरीद का कोटा बढ़ाए जाने की जानकारी दी है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि इस वर्ष गेहूं उत्पादन अधिक होने के कारण राज्य सरकार ने केंद्र से समर्थन मूल्य पर खरीद का कोटा बढ़ाने का अनुरोध किया था। 

केंद्र सरकार ने रबी खरीद सीजन 2026-27 के लिए मध्यप्रदेश को 100 लाख टन गेहूं खरीद की मंजूरी दे दी है। उल्लेखनीय है कि चालू खरीद सीजन में पहले 78 लाख टन का लक्ष्य तय किया गया था, जबकि पिछले वर्ष प्रदेश में 77 लाख टन गेहूं की खरीद हुई थी।

मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि सभी किसानों का गेहूं खरीदा जाएगा और किसी को घबराने की जरूरत नहीं है। आवश्यकता पड़ने पर खरीद की अवधि भी बढ़ाई जा सकती है। उन्होंने कहा कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। गेहूं खरीदी चरणबद्ध तरीके से पहले छोटे, फिर मध्यम और अंत में बड़े किसानों से की जाएगी।

प्रदेश में इस वर्ष गेहूं खरीद के लिए 19.04 लाख किसानों ने पंजीकरण कराया है, जो पिछले वर्ष से लगभग 3.60 लाख अधिक है। राज्य में गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2585 रुपये प्रति क्विंटल है, जिस पर राज्य सरकार द्वारा 40 रुपये प्रति क्विंटल बोनस जोड़कर कुल 2625 रुपये प्रति क्विंटल की दर से खरीद की जा रही है।

फिलहाल सरकार केवल 5 एकड़ तक की जोत वाले किसानों से गेहूं खरीद रही है। भोपाल, इंदौर, उज्जैन और नर्मदापुरम संभाग में 9 अप्रैल से तथा अन्य संभागों में 15 अप्रैल से खरीदी शुरू हुई है। सरकार का कहना है कि छोटे किसानों के बाद मध्यम और फिर बड़े किसानों से खरीद की जाएगी। राज्य सरकार ने स्लॉट बुकिंग की अंतिम तिथि 24 अप्रैल से बढ़ाकर 30 अप्रैल कर दी है, ताकि अधिक से अधिक किसानों को फसल बेचने का अवसर मिल सके।

कांग्रेस सेवादल का सत्याग्रह

मध्यप्रदेश में गेहूं खरीद में खामियों को लेकर भोपाल में कांग्रेस सेवादल ने सत्याग्रह शुरू किया है। कांग्रेस का आरोप है कि पोर्टल की खामियों और जटिल प्रक्रियाओं के कारण किसानों की समस्याएं बढ़ गई हैं। स्लॉट बुकिंग से लेकर सत्यापन तक कई स्तरों पर बाधाएं सामने आ रही हैं।

इन्हीं मुद्दों को लेकर गुरुवार को भोपाल में कांग्रेस सेवादल के मुख्य संगठक अवनीश भार्गव उपवास पर बैठ गए। इस दौरान कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी, नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार सहित कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता भी शामिल हुए। अवनीश भार्गव ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने गेहूं खरीदी का लक्ष्य केवल 78 लाख टन निर्धारित किया, जबकि पिछले वर्षों में प्रदेश में 1 करोड़ टन से अधिक खरीद हो चुकी है। कम खरीद कम किसानों को एमएसपी से वंचित किया जा रहा है। 

किसान नेता केदार सिरोही ने कहा कि सरकार की घोषणाओं और जमीनी हकीकत में बड़ा अंतर है। पंजीकरण के बावजूद किसानों को खरीदी केंद्रों पर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। कई किसान सैटेलाइट वेरिफिकेशन न होने या आधार लिंक न होने के कारण अपनी फसल बेचने से वंचित हो रहे हैं। खरीद प्रणाली में कई गड़बड़ियां और घपले सामने आ रहे हैं। खरीद से जुड़े मुद्दों और मांगों को लेकर किसान संगठन 28 अप्रैल को हरदा जिला मुख्यालय के घेराव की तैयारी कर रहे हैं।