इस साल अल नीनो के खतरे से जूझ रहे मानसून की रफ्तार पर लगभग ब्रेक लग गया है। 4 जून को केरल में मानसून की दस्तक के बाद दक्षिण भारत के कई राज्यों में भी सामान्य से कम बारिश हुई है। देश के प्रमुख कृषि उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में 1 जून से 16 जून के बीच सामान्य से 75 फीसदी कम, मात्र 21.6 मिमी बारिश दर्ज की गई है। वहीं, देशभर में इस अवधि के दौरान औसतन 35 फीसदी कम वर्षा हुई है।
महाराष्ट्र में मानसून की धीमी प्रगति ने खरीफ सीजन को लेकर चिंता बढ़ा दी है। मंगलवार को राज्य मंत्रिमंडल के समक्ष प्रस्तुत फसल स्थिति समीक्षा रिपोर्ट के अनुसार, राज्य सरकार ने किसानों को फसल बुवाई में "जल्दबाजी न करने" की सलाह दी है। कम बारिश को देखते हुए किसानों से पर्याप्त और लगातार वर्षा होने तक इंतजार करने को कहा गया है। क्योंकि शुरुआती हल्की बारिश के आधार पर की गई बुवाई बाद में लंबे शुष्क अंतराल की स्थिति में फसलों को नुकसान पहुंचा सकती है।
राज्य सरकार पहले भी किसानों को आगाह कर चुके हैं कि प्री-मानसून की छिटपुट बारिश को मानसून की स्थायी और पर्याप्त बारिश नहीं माना जाना चाहिए। विशेष रूप से विदर्भ, मराठवाड़ा और मध्य महाराष्ट्र के कई हिस्सों में मानसून की प्रगति धीमी बनी हुई है। हाल के दिनों में कुछ स्थानों पर बारिश हुई है, लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में मिट्टी में पर्याप्त नमी नहीं बन पाई है।
मध्य भारत में मानसून का इंतजार लंबा होता जा रहा है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार, 1 जून से 16 जून के बीच विदर्भ में सामान्य से 72 फीसदी और मध्य महाराष्ट्र में सामान्य से 78 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। कई जिलों में तापमान 42 डिग्री सेल्सियस से ऊपर पहुंच गया है और लू जैसी परिस्थितियां बनी हुई हैं।
हाल ही में जारी मौसम पूर्वानुमानों में कहा गया है कि जून के दूसरे पखवाड़े में मध्य और उत्तरी भारत के कई हिस्सों में सामान्य से कम वर्षा हो सकती है। इससे धान, सोयाबीन, कपास और दलहन जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई प्रभावित होने की आशंका है।
मध्य भारत में 61 फीसदी कम बारिश
देशभर में 1 जून से 16 जून के बीच सामान्य से औसतन 35 फीसदी कम बारिश हुई है, लेकिन क्षेत्रवार वितरण में भारी असमानता देखने को मिल रही है। कृषि के लिए वर्षा पर अत्यधिक निर्भर मध्य भारत में इस अवधि के दौरान सामान्य से 61 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। सौराष्ट्र और कच्छ में सामान्य से 91 फीसदी कम, कोंकण एवं गोवा में 79 फीसदी कम तथा छत्तीसगढ़ में 60 फीसदी कम बारिश हुई है। वहीं, पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में सामान्य से 43 फीसदी कम वर्षा ने खरीफ सीजन के दौरान खेती की संभावनाओं को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
