हरियाणा में 1 अक्टूबर से धान की खरीद शुरू होने वाली है, लेकिन उससे पहले राज्य सरकार के लिए एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। प्रदेश के करीब 1,400 मिलर्स में से अब तक केवल लगभग 350 ने रजिस्ट्रेशन कराया है। उनका कहना है कि पिछला बकाया चावल, भुगतान और धान खरीद के नियमों को लेकर अभी तक स्थिति स्पष्ट नहीं है। इसलिए वे 2026-27 के खरीद सीजन के लिए कस्टम मिल्ड राइस (सीएमआर) के रजिस्ट्रेशन नहीं करवा रहे हैं।
इसी हफ्ते चंडीगढ़ में मिलर्स ने मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव अरुण गुप्ता तथा अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ मुलाकात की और अपनी समस्या से अवगत कराया और उनका समाधान करने का आग्रह किया। मिलर्स की सबसे बड़ी चिंता पिछले खरीद चक्र से करीब 2.5 लाख टन कस्टम मिल्ड राइस के बकाया रहने की है। मिलर सरकार से यह आश्वासन चाहते हैं कि पूरी बकाया मात्रा स्वीकार की जाएगी।
हरियाणा राइस मिलर्स एंड डीलर्स एसोसिएशन का कहना है कि भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) ने पहले हरियाणा के लिए 55 लाख मीट्रिक टन धान स्वीकार करने का लक्ष्य तय किया था। हालांकि, पिछले सीजन में सरकारी एजेंसियों ने करीब 62 लाख टन धान की खरीद की। 10 सितंबर को केंद्र ने 2025-26 सीजन के लिए हरियाणा का धान स्वीकृति लक्ष्य बढ़ाकर 59.62 लाख मीट्रिक टन कर दिया था। साथ ही बढ़ी हुई मात्रा के एवज में कस्टम मिल्ड राइस की डिलीवरी की समयसीमा 30 सितंबर तक बढ़ाई गई थी।
एसोसिएशन के मुताबिक मिलर्स अपना बकाया चावल देना शुरू कर चुके हैं, लेकिन भारतीय खाद्य निगम का कहना है कि वह 59.62 लाख मीट्रिक टन से अधिक चावल स्वीकार नहीं करेगा। ऐसे में पिछले सीजन का करीब 2.5 लाख टन चावल बकाया रह जाएगा। एसोसिएशन की मांग है कि बची हुई पूरी मात्रा को स्वीकार किया जाए। मिलर्स ने मिलिंग, होल्डिंग, ब्लेंडिंग और परिवहन शुल्क के लंबित भुगतान भी जारी करने की मांग की है।