तमिलनाडु में सीमांत किसानों के 50,000 रुपये तक के सहकारी फसल ऋण माफ, विपक्ष ने उठाए सवाल

तमिलनाडु सरकार ने सीमांत किसानों के लिए 50,000 रुपये तक के सहकारी फसल ऋण माफ करने की घोषणा की है। इससे 14.22 लाख किसानों को लाभ मिलेगा, लेकिन विपक्ष और किसान संगठनों ने इसे चुनावी वादे से कम बताया है।

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय ने राज्य के किसानों के लिए कर्जमाफी का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत किसानों द्वारा लिए गए 50,000 रुपये तक के फसल ऋण पूरी तरह माफ किए जाएंगे, जबकि बड़े किसानों को 5,000 रुपये तक की राहत दी जाएगी। सरकार ने छोटे किसानों के लिए भी 50 प्रतिशत तक की माफी का ऐलान किया है।

मुख्यमंत्री विजय ने राज्य भर के सीमांत किसानों के लिए 1 मई, 2025 से 28 फरवरी, 2026 के बीच लिए गए 50,000 रुपये तक के कोऑपरेटिव बैंक फसल ऋण और बड़े किसानों के लिए 5,000 रुपये तक की माफी की घोषणा की है। उन्होंने कहा कि इस कदम से राज्य के 14.22 लाख किसानों को फायदा होगा और सरकार पर 2,044 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आएगा। सरकार ने छोटे किसानों के लिए भी 50 प्रतिशत माफी का ऐलान किया है।

आगामी बुवाई सीजन से पहले किसानों को नए ऋण लेने में यह योजना मददगार साबित होगी। यह वादा तमिलगा वेत्री कड़गम (TVK) की चुनावी घोषणाओं में भी शामिल था। विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान विजय ने किसानों के कृषि ऋण माफ करने का वादा किया था।

सरकार ने विभिन्न श्रेणियों के किसानों के लिए अलग-अलग राहत पैकेज भी तय किए हैं। सीमांत किसानों के लिए 50,000 रुपये तक का ऋण पूरी तरह माफ होगा, जबकि अधिक राशि वाले ऋणों पर आंशिक राहत दी जाएगी। छोटे किसानों को भी कुछ श्रेणियों में 50 प्रतिशत तक की राहत देने का प्रावधान बताया गया है।

TVK नेता और तमिलनाडु के मंत्री सीटीआर निर्मलकुमार ने कहा, “लगभग 16.92 लाख किसानों को खेती का लोन मिला है, जिनमें से 14.22 लाख किसानों का लोन माफ कर दिया गया है। यह हमारे चुनावी वादों में से एक था।”

इस घोषणा को लेकर किसान संगठनों और विपक्ष की ओर से सवाल भी उठाए गए हैं। किसान संगठनों का कहना है कि सरकार ने चुनाव के दौरान सभी किसानों के लिए व्यापक ऋण माफी का वादा किया था, लेकिन मौजूदा योजना सीमित दायरे में है। किसान संगठनों ने मांग की है कि भूमि के आकार के आधार पर भेदभाव किए बिना सभी किसानों के ऋण समान रूप से माफ किए जाएं।

विपक्षी नेताओं ने भी सरकार पर चुनावी वादों को अधूरा छोड़ने का आरोप लगाया है। पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि सरकार ने किसानों के साथ “विश्वासघात” किया है क्योंकि चुनाव में पूर्ण ऋण माफी का वादा किया गया था।

गौरतलब है कि तमिलनाडु में इससे पहले वर्ष 2021 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ई. पलानीस्वामी की सरकार ने सहकारी बैंकों से लिए गए लगभग 12,110 करोड़ रुपये के फसल ऋण माफ किए थे, जिससे 16 लाख से अधिक किसानों को लाभ मिला था।

AIADMK नेताओं ने TVK सरकार पर फसल लोन माफी की घोषणा को लेकर जमकर निशाना साधा। उन्होंने इसे कथित तौर पर हो रही “हॉर्स-ट्रेडिंग” की राजनीति से लोगों का ध्यान भटकाने के लिए एक “साइंटिफिक धोखा” करार दिया। मुख्यमंत्री की घोषणा पर प्रतिक्रिया देते हुए AIADMK महासचिव ई. पलानीस्वामी ने कहा कि तमिलगा वेत्री कझगम ने 5 एकड़ तक जमीन वाले सभी किसानों के फसल लोन पूरी तरह माफ करने का वादा किया था। उन्होंने कहा कि जमीन के आकार के मानदंड को बदलकर 50,000 रुपये की सीमा तय करना “भरोसे के साथ बड़ा धोखा” है।

पलानीस्वामी ने एक बयान में कहा, “वर्ष 2021 में हमने 12,110 करोड़ रुपये के लोन माफ किए थे, जिससे 16.43 लाख किसानों को राहत मिली थी। लेकिन अब 2026 में सिर्फ 2,044 करोड़ रुपये के लोन माफ किए जाएंगे। यह किसानों के साथ बहुत बड़ा धोखा है।”