उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने लखनऊ में तीन दिवसीय आम महोत्सव का शुभारंभ किया। इस मौके पर राज्य के उद्यान मंत्री दिनेश सिंह भी मौजूद थे। इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित इस नौवें महोत्सव में आम की 800 से अधिक प्रजातियां प्रदर्शन के लिए रखी गई हैं। इस मौके पर मुख्यमंत्री ने 'आम महोत्सव 2026' की स्मारिका का विमोचन किया, साथ ही प्रगतिशील बागवानों को सम्मानित भी किया।
इस महोत्सव में प्रदेश भर के बागवान अपने-अपने आमों का प्रदर्शन कर रहे हैं। शनिवार, 4 जुलाई को आम क्रेता विक्रेता सम्मेलन का आयोजन लखनऊ स्थित जन भवन में किया जाएगा। प्रदेश में 3.27 लाख हेक्टेयर में 61.96 लाख मीट्रिक टन आम उत्पादन होने का अनुमान है।
यह महोत्सव तीन स्थानों पर आयोजित किया गया है- इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, मलिहाबाद के बागानों में किसानों के साथ, और जनभवन में राज्यपाल के साथ। इसका उद्देश्य राज्य के किसानों की समृद्धि और खुशहाली को बढ़ावा देना है। उद्यान विभाग के नवाचारों में आम की गुणवत्ता सुधारने के लिए पेपर बैग तकनीक का उपयोग, निर्यात प्रोत्साहन बोर्ड का गठन, हाई-टेक नर्सरी की स्थापना और कमल की खेती को बढ़ावा देना शामिल है।
उद्यान मंत्री ने बताया कि मुख्यमंत्री योगी के कार्यकाल में हाई-टेक नर्सरी के माध्यम से दिए जाने वाले पौधों की संख्या 74 लाख से बढ़कर 29 करोड़ हो गई है। शहरी क्षेत्रों में छत पर बागवानी (रूफ टॉप गार्डनिंग) को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, जो शहरों में घटती कृषि भूमि के बीच सकारात्मक ऊर्जा और कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण में मदद करेगा।

उद्यान विभाग के प्रयासों से राज्य की 9% भूमि पर उद्यान फसलों का उत्पादन 42% तक पहुंच गया है, जबकि कृषि विभाग की 91% भूमि पर 58% की हिस्सेदारी है। उत्तर प्रदेश के उद्यान उत्पाद अमेरिका, ब्रिटेन, अरब, मलेशिया, सिंगापुर, कुवैत, न्यूजीलैंड, बेल्जियम, जापान, इटली, कतर, रूस, जर्मनी, मॉरीशस, नीदरलैंड, ओमान, नेपाल, थाईलैंड, बहरीन और स्वीडन जैसे देशों तक पहुंच रहे हैं।
भारत में आम के अलावा शहद का सबसे अधिक उत्पादन उत्तर प्रदेश में होता है। यहां के शहद की ब्रांडिंग 'काशी शहद' के नाम से की गई है, जिसका लक्ष्य अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाना है। मखाना, खजूर, कमल, स्ट्रॉबेरी और ड्रैगन फ्रूट जैसी फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए भी नवाचार किए जा रहे हैं।