उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा है कि पिछले वर्ष के 480 लाख मीट्रिक टन के मुकाबले इस वर्ष राज्य में 30 लाख मीट्रिक टन की बढ़ोतरी के साथ कुल 510 लाख मीट्रिक टन रबी खाद्यान्न उत्पादन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। वे लखनऊ के इन्दिरा गांधी प्रतिष्ठान के जुपिटर ऑडिटोरियम में 'राज्य स्तरीय रबी उत्पादकता गोष्ठी-2026' को संबोधित कर रहे थे।
कृषि मंत्री ने 'जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान और जय अनुसंधान' के उद्घोष के साथ किसानों को संबोधित करते हुए खाद्यान्न, दूध, गन्ना, चीनी और सब्जी उत्पादन में उत्तर प्रदेश को देश में शीर्ष स्थान पर लाने के लिए अन्नदाताओं के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में प्रदेश की कृषि विकास दर 8 प्रतिशत से बढ़कर 18 प्रतिशत तक पहुंच चुकी है तथा पिछली सरकारों के 10 वर्षों के संयुक्त बजट (लगभग 22,483 करोड़ रुपये) की तुलना में वर्तमान सरकार ने किसानों के हित में 69,163 करोड़ रुपये का ऐतिहासिक बजट व्यय किया है।
उन्होंने बताया कि प्रदेश में दलहन-तिलहन में आत्मनिर्भरता हेतु 50 लाख निशुल्क मिनीकिट वितरित किए जा रहे हैं तथा बीजों पर 600 करोड़ और कृषि यंत्रों पर लगभग 350 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जा रहा है। कृषि मंत्री ने अनुदानित बीज व उर्वरकों की अंतरराज्यीय तस्करी पर पूर्ण अंकुश लगाने और विभागीय पोर्टल के सर्वर को अधिक सुगम बनाने के कड़े निर्देश दिए।
सहकारिता राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) जे.पी.एस. राठौर ने कहा कि सहकारिता आंदोलन के जरिए किसानों को आर्थिक सुरक्षा और संबल प्रदान किया जा रहा है। बंद होने की कगार पर पहुंचीं 50 जिला सहकारी बैंकों को पुनर्जीवित कर 54 लाख नए किसान जोड़े गए हैं, जिन्हें 3 लाख तक रुपये का केसीसी ऋण मात्र 3 प्रतिशत ब्याज दर पर तथा महिला किसानों को पशुपालन के लिए 2 लाख रुपये तक का ऋण न्यूनतम ब्याज पर उपलब्ध कराया जा रहा है। उत्तर प्रदेश सहकारी ग्राम विकास बैंक द्वारा ट्रैक्टर, कृषि यंत्रों व कृषि आधारित लघु उद्योगों के लिए 6 लाख रुपये तक का ऋण मात्र 6 प्रतिशत ब्याज दर पर दिया जा रहा है। इसके साथ ही पैक्स की कैश क्रेडिट लिमिट को 10 लाख से बढ़ाकर 15 लाख रुपये (ब्याज मुक्त) किया गया है। उर्वरक परिवहन में पारदर्शिता के लिए ट्रकों में जीपीएस प्रणाली और उच्च गुणवत्ता के कृषि निवेश उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम गुप्ता ने 'एक गाय देसी, पांच एकड़ खेती' का आह्वान करते हुए मल्टी-लेयर कृषि मॉडल तथा प्रदेश की 59 हजार ग्राम पंचायतों में एकीकृत मॉडल फार्म विकसित करने पर बल दिया। अपर मुख्य सचिव उद्यान एवं खाद्य प्रसंस्करण बी.एल. मीणा ने बताया कि प्रदेश उद्यानिकी फसलों की उत्पादकता में विश्व स्तर पर दूसरे स्थान पर है, योजनाएं पूरी तरह 'टारगेट-फ्री' कर दी गई हैं तथा राज्य 31 हजार मीट्रिक टन शहद उत्पादन के साथ देश में प्रथम है। अपर मुख्य सचिव पशुपालन मुकेश मेश्राम ने निराश्रित गोवंश आश्रय स्थलों से 4 गोवंश गोद लेने पर मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत ₹72 हजार की वार्षिक डीबीटी सहायता तथा 'पशुपालन आपके द्वार' के तहत क्रियाशील मोबाइल वेटनरी यूनिट्स की जानकारी दी।
प्रमुख सचिव कृषि डॉ. एम.के.एस. सुन्दरम ने प्रदेश के 9 एग्रो-क्लाइमेटिक जोन के अनुरूप फसलों के चयन, संतुलित उर्वरक प्रबंधन और बीमा सर्वे में तेजी के निर्देश दिए। कृषि निदेशक त्रयंबक मणि त्रिपाठी ने बताया कि प्रदेश में पहली बार चना व मटर के बीजों के क्रय पर 75 प्रतिशत का भारी अनुदान दिया जा रहा है, 4.68 लाख निशुल्क सरसों मिनीकिट उपलब्ध कराए जा रहे हैं तथा रबी सत्र के लिए 15.50 लाख मीट्रिक टन यूरिया और 6.25 लाख मीट्रिक टन डीएपी का पर्याप्त भंडार सुनिश्चित किया गया है।
फार्मर परियोजना के प्रधान सलाहकार अमित मोहन प्रसाद ने ग्लोबल वार्मिंग के अनुकूल खेती की तकनीकों पर चर्चा की। तकनीकी सत्र में अंतरराष्ट्रीय चावल अनुसंधान संस्थान वाराणसी के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. आर.के. मलिक ने फसल अवशेष प्रबंधन व जीरो टिलेज विधि तथा चंद्रशेखर आजाद कृषि विश्वविद्यालय कानपुर के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. महक सिंह ने सरसों व अलसी की नवीनतम उन्नत प्रजातियों पर मार्गदर्शन दिया।
नाबार्ड के सीजीएम पंकज कुमार ने वर्तमान फसली वित्तमान के अनुसार केसीसी नवीनीकरण व एफपीओ प्रबंधन की व्यावहारिक जानकारी साझा की। अंत में अपर कृषि निदेशक (प्रसार) द्वारा सभी अतिथियों, वैज्ञानिकों एवं किसानों का आभार व्यक्त करते हुए धन्यवाद ज्ञापित किया गया।
कार्यक्रम में विभिन्न जनपदों से आए प्रगतिशील किसानों को प्रोत्साहन स्वरूप उन्नतिशील बीजों के मिनीकिट, कृषि यंत्रों के स्वीकृति पत्र तथा विषमुक्त खेती को बढ़ावा देने के उद्देश्य से फेरोमोन ट्रैप का सांकेतिक वितरण किया गया। गोष्ठी में उपस्थित कृषि, सहकारिता, पशुपालन, उद्यान, मत्स्य व सिंचाई विभाग के उच्चाधिकारियों, वैज्ञानिकों तथा किसानों ने आगामी रबी अभियान के उत्पादन लक्ष्यों, तकनीकी नवाचारों, जलवायु अनुकूल खेती और किसान कल्याणकारी योजनाओं पर गहन विचार-विमर्श किया।

इस अवसर पर आयुक्त एवं निबंधक सहकारिता कुमार प्रशांत, प्रबंध निदेशक पी.सी.एफ. नीरज शुक्ला, उपकार के महानिदेशक डॉ. संजय सिंह, राज्य कृषि प्रबंध संस्थान रहमानखेड़ा के निदेशक आर.के. मौर्य, उत्तर प्रदेश बीज विकास निगम के निदेशक आशुतोष मिश्र, निदेशक सांख्यिकी श्रीमती सुमिता सिंह, उत्तर प्रदेश बीज प्रमाणीकरण की निदेशक श्रीमती कनीज फातिमा तथा उपकार के सचिव राजेश दुबे सहित अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।