भारत की पांच प्रमुख फसल सुरक्षा कंपनियों ने सरकार से नए कीटनाशक अणुओं और उनके नए उपयोगों के लिए सीमित अवधि का प्रोटेक्शन ऑफ रेगुलेटरी डेटा (PRD) ढांचा लागू करने की मांग की है। कंपनियों का कहना है कि इससे किसानों को नई, अधिक सुरक्षित और कम मात्रा में इस्तेमाल होने वाली फसल सुरक्षा रसायन जल्दी उपलब्ध हो सकेंगे। साथ ही घरेलू विनिर्माण, अनुसंधान और कृषि रसायन निर्यात को भी मजबूती मिलेगी।
क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन, रैलिस इंडिया, धनुका एग्रीटेक, पीआई इंडस्ट्रीज और गोदरेज एग्रोवेट ने संयुक्त रूप से कहा है कि एक सीमित और समयबद्ध डेटा संरक्षण अवधि भारत में नए फसल सुरक्षा उत्पादों को लाने के लिए आवश्यक प्रोत्साहन दे सकती है। कंपनियों ने सरकार से मसौदा पेस्टिसाइड्स मैनेजमेंट बिल, 2025 में इस तरह का प्रावधान शामिल करने की अपील की है।
कंपनियों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण कीटों, खरपतवारों और फसल रोगों का स्वरूप बदल रहा है। सीमित संख्या में उपलब्ध रसायनों के बार-बार इस्तेमाल से प्रतिरोधक क्षमता भी बढ़ रही है। ऐसे में नई पीढ़ी के कीटनाशक और अन्य फसल सुरक्षा उत्पाद अधिक लक्षित, कम खुराक वाले और अपेक्षाकृत बेहतर सुरक्षा प्रोफाइल वाले हो सकते हैं।
एक अनुमान के मुताबिक, भारत में हर वर्ष कीटों, खरपतवारों और बीमारियों के कारण कृषि उत्पादन का लगभग 10 से 35 प्रतिशत तक नुकसान होता है। क्रॉपलाइफ इंडिया और यस बैंक की नॉलेज रिपोर्ट के अनुसार, यह नुकसान करीब 2 लाख करोड़ रुपये का है। जलवायु में बढ़ते तापमान के साथ फसली नुकसान और बढ़ने की आशंका भी जताई गई है।
क्रॉपलाइफ इंडिया के चेयरमैन और क्रिस्टल क्रॉप प्रोटेक्शन के एग्जीक्यूटिव चेयरमैन व मैनेजिंग डायरेक्टर अंकुर अग्रवाल ने कहा कि समयबद्ध डेटा संरक्षण से किसानों को नए और सुरक्षित उत्पाद जल्दी मिल सकेंगे और संरक्षण अवधि समाप्त होने के बाद ये उत्पाद पूरे उद्योग के लिए उपलब्ध हो जाएंगे।
1,200 में से केवल 380 अणु भारत में पंजीकृत
दुनिया भर में इस्तेमाल हो रहे लगभग 1,200 फसल सुरक्षा अणुओं (Molecules) की तुलना में भारत में केवल करीब 380 अणु पंजीकृत हैं। उनका तर्क है कि भारत के पंजीकृत उत्पादों का दायरा बढ़ने से कृषि उत्पादकता, घरेलू विनिर्माण क्षमता और कृषि निर्यात की प्रतिस्पर्धा मजबूत होगी।
रैलिस इंडिया के मैनेजिंग डायरेक्टर एवं सीईओ डॉ. ज्ञानेंद्र शुक्ला ने कहा कि जिन देशों के साथ भारत कृषि रसायन निर्यात में प्रतिस्पर्धा करता है, उनमें से कई ने पहले ही डेटा संरक्षण की व्यवस्था अपनाई है। उनके अनुसार, आधुनिक फसल सुरक्षा उत्पादों का व्यापक पोर्टफोलियो किसानों की जरूरतों के साथ-साथ निर्यात प्रतिस्पर्धा के लिए भी महत्वपूर्ण है।
कंपनियों का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों में कीटनाशक अवशेषों की स्वीकार्य सीमा लगातार सख्त हो रही है। ऐसे में नए और आधुनिक उत्पादों तक पहुंच भारतीय कृषि निर्यातकों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
नए अणु के लिए 40 से 50 करोड़ रुपये का खर्च
कंपनियों का कहना है कि किसी नए फसल सुरक्षा रसायन (अणु) को भारत में पंजीकृत कराने के लिए स्थानीय स्तर पर सुरक्षा, प्रभावशीलता और अवशेष संबंधी अध्ययन करने पड़ते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में करीब 40 से 50 करोड़ रुपये का खर्च और 6 से 8 वर्ष का समय लग सकता है।
कंपनियों के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में बाद में आवेदन करने वाली कंपनी पहले आवेदक द्वारा तैयार किए गए नियामक डेटा के आधार पर अपेक्षाकृत कम लागत में पंजीकरण प्राप्त कर सकती है। उनका दावा है कि इससे नई तकनीक और नए अणुओं को भारत में लाने के लिए निवेश का प्रोत्साहन कम होता है।
कंपनियों ने नए अणुओं और नए उपयोगों के लिए पहली बार पंजीकरण की तारीख से पांच वर्ष की डेटा संरक्षण अवधि का प्रस्ताव दिया है। इस अवधि के समाप्त होने के बाद संबंधित अणु और उसके उपयोग अन्य कंपनियों, जेनेरिक निर्माताओं तथा छोटे और मध्यम उद्यमों के लिए भी उपलब्ध हो सकेंगे।
छोटी कंपनियां आशंकित
बड़ी कंपनियों द्वारा नए कीटनाशकों पर 5 साल के लिए डेटा संरक्षण की मांग को जेनेरिक कीटनाशक बनाने वाली छोटी कंपनियां अपने हित प्रभावित होने का लेकर आशंकित हैं।
हालांकि, प्रमुख कंपनियों का दावा है कि डेटा संरक्षण व्यवस्था जेनेरिक उद्योग या छोटे एवं मध्यम निर्माताओं के अवसरों को सीमित नहीं करेगी, बल्कि संरक्षण अवधि समाप्त होने के बाद उनके लिए नए और आधुनिक अणुओं का दायरा बढ़ेगा। यह व्यवस्था केवल नए अणुओं और नए उपयोगों पर लागू होगी। पहले से बाजार में मौजूद उत्पादों पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
धनुका एग्रीटेक के मैनेजिंग डायरेक्टर राहुल धनुका ने कहा कि कीटों में बढ़ती प्रतिरोधक क्षमता के बीच भारतीय किसानों को नए, सुरक्षित और कम खुराक वाले फसल सुरक्षा समाधानों तक तेजी से पहुंच की जरूरत है। उनके अनुसार, समयबद्ध डेटा संरक्षण का ढांचा नवाचार तक पहुंच को तेज कर सकता है।
चीन, अमेरिका और ईयू में पहले से व्यवस्था
कंपनियों ने अपने पक्ष में अन्य देशों की व्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया है। उनके अनुसार, चीन में छह वर्ष तक डेटा संरक्षण दिया जाता है, जबकि थाईलैंड, ब्राजील और अमेरिका में यह अवधि 10 वर्ष तक हो सकती है। यूरोपीय संघ में सामान्य तौर पर 10 वर्ष का संरक्षण उपलब्ध है, जिसे कम जोखिम वाले और जैविक उत्पादों के लिए 13 वर्ष तक बढ़ाया जा सकता है।
पीआई इंडस्ट्रीज के वाइस चेयरपर्सन एवं मैनेजिंग डायरेक्टर मयंक सिंघल ने कहा कि एक अनुमानित और स्पष्ट डेटा संरक्षण ढांचा वास्तविक अनुसंधान को प्रोत्साहित करेगा और भारतीय किसानों तक नई तकनीकों को पहुंचाने में मदद कर सकता है।