ईरान युद्ध के कारण मार्च में बढ़ा FAO खाद्य मूल्य सूचकांक, वनस्पति तेल और चीनी के दाम ज्यादा बढ़े; उर्वरक आपूर्ति पर भी दबाव

मार्च में लगातार दूसरे महीने वैश्विक खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी हुई और FAO खाद्य मूल्य सूचकांक 2.4% बढ़कर 128.5 पर पहुंच गया। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच युद्ध के कारण ऊर्जा कीमतों में तेजी आई। उर्वरक आपूर्ति और कृषि लागत पर भी दबाव बढ़ा है, जिससे आने वाले दिनों में फसल उत्पादन और वैश्विक खाद्य महंगाई पर जोखिम मंडरा रहा है।

अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण मार्च में वैश्विक खाद्य जिंसों की कीमतों में लगातार दूसरे महीने वृद्धि दर्ज की गई। वैश्विक स्तर पर व्यापार होने वाली खाद्य वस्तुओं की कीमतों में मासिक बदलाव को मापने वाला FAO खाद्य मूल्य सूचकांक मार्च में औसतन 128.5 अंक रहा, जो फरवरी की तुलना में 2.4 प्रतिशत अधिक और पिछले वर्ष के स्तर से 1.0 प्रतिशत ऊपर है।

एफएओ अनाज मूल्य सूचकांक में पिछले महीने की तुलना में 1.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इसका मुख्य कारण वैश्विक गेहूं कीमतों में 4.3 प्रतिशत की बढ़ोतरी रही। अमेरिका में शुष्क मौसम के कारण फसल उत्पादन में गिरावट और ऑस्ट्रेलिया में उर्वरक लागत बढ़ने से बुवाई कम होने की आशंका के चलते ऐसा हुआ है।

मक्का की वैश्विक कीमतों में हल्की बढ़त दर्ज की गई। वैश्विक स्तर पर इसकी पर्याप्त उपलब्धता ने उर्वरकों से जुड़ी चिंताओं को तो संतुलित किया, लेकिन बढ़ती ऊर्जा कीमतों के कारण एथेनॉल की मांग बढ़ने से दाम बढ़े। FAO का ऑल-राइस प्राइस इंडेक्स मार्च में 3.0 प्रतिशत घट गया, जिसका कारण फसल कटाई का समय, कमजोर आयात मांग और अमेरिकी डॉलर के मुकाबले मुद्रा अवमूल्यन रहा।

FAO के मुख्य अर्थशास्त्री मैक्सिमो टोरेरो ने कहा, “युद्ध शुरू होने के बाद से कीमतों में वृद्धि सीमित रही है। तेल के दाम तो बढ़े हैं, लेकिन पर्याप्त वैश्विक अनाज आपूर्ति ने इसे संतुलित किया है।” उन्होंने चेतावनी दी कि यदि यह संघर्ष 40 दिनों से अधिक समय तक जारी रहता है और इनपुट लागत ऊंची बनी रहती है, तो किसानों को कम इनपुट के साथ खेती करने, कम बुवाई करने या कम उर्वरक-आधारित फसलों की ओर रुख करने जैसे विकल्प चुनने होंगे। इसका असर भविष्य की पैदावार पर पड़ेगा। यह इस साल व अगले साल खाद्य आपूर्ति और कीमतों को प्रभावित करेगा।

एफएओ वनस्पति तेल मूल्य सूचकांक फरवरी की तुलना में 5.1 प्रतिशत बढ़ा और साल-दर-साल आधार पर 13.2 प्रतिशत ऊंचा रहा। पाम, सोया, सूरजमुखी और रेपसीड तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में वृद्धि हुई, जो कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल के प्रभाव और बायोफ्यूल की बढ़ती मांग को दर्शाती है।

डेयरी मूल्य सूचकांक में 1.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जिसका मुख्य कारण ओशिनिया क्षेत्र में आपूर्ति में मौसमी कमी के चलते दूध पाउडर की कीमतों में बढ़ोतरी रहा। यूरोपीय संघ में अधिक उत्पादन और कमजोर निर्यात मांग के कारण चीज की कीमतों में गिरावट आई, जबकि ओशिनिया में इसके विपरीत रुझान देखा गया।

चीनी मूल्य सूचकांक मार्च में 7.2 प्रतिशत बढ़ा। ब्राजील, जो प्रमुख चीनी निर्यातक है, द्वारा अधिक गन्ने का उपयोग एथेनॉल उत्पादन में करने की संभावना ने इस बढ़ोतरी को बल दिया। हालांकि थाईलैंड समेत कई देशों में अच्छी फसल प्रगति के कारण वैश्विक आपूर्ति का परिदृश्य अनुकूल बना हुआ है।