कैबिनेट ने सामाजिक सहायता योजना के लिए 2031 तक 53,428 करोड़ रुपये मंजूर किए, जानें पात्रता के नए नियम

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम को 2030-31 तक जारी रखने के लिए 53,428 करोड़ रुपये मंजूर किए हैं। इसके तहत दिव्यांगजन पेंशन की पात्रता में बदलाव, सहायता राशि में वृद्धि और योजनाओं के नाम बदलने का निर्णय लिया गया है। इसका देश के 3.20 करोड़ लोगों को लाभ मिलेगा।

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केंद्रीय मंत्रिमंडल ने राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (NSAP) को पांच वर्षों यानी 2026-27 से 2030-31 तक जारी रखने की मंजूरी दी है। इसके लिए कुल 53,428 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस निर्णय के तहत योजना का नाम बदलने, पात्रता के मानदंडों में संशोधन और दिव्यांगजनों के लिए पेंशन सहायता बढ़ाने का फैसला किया गया है। वहीं, बुजुर्गों और विधवाओं के लिए पेंशन योजनाएं तथा पारिवारिक लाभ योजना मौजूदा स्वरूप में जारी रहेंगी।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, इस मंजूरी से सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 3.20 करोड़ लोगों को लाभ मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने इस प्रस्ताव को मंजूरी दी।

योजनाओं के नाम बदले जाएंगे

स्वीकृत बदलावों के तहत राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम का नाम बदलकर प्रधानमंत्री सामाजिक सहायता योजना किया जाएगा। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था पेंशन योजना, अब प्रधानमंत्री वृद्धावस्था पेंशन योजना कहलाएगी। इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विधवा पेंशन योजना का नाम बदलकर प्रधानमंत्री विधवा पेंशन योजना किया जाएगा। इसी तरह, दिव्यांगजन पेंशन योजना को प्रधानमंत्री दिव्यांगजन पेंशन योजना नाम दिया जाएगा। राष्ट्रीय पारिवारिक लाभ योजना का नया नाम प्रधानमंत्री पारिवार लाभ योजना होगा।

मासिक सहायता राशि और पात्रता में बदलाव

सबसे महत्वपूर्ण बदलाव दिव्यांगजन पेंशन योजना में किए गए हैं। इसके तहत 0 से 79 वर्ष तक के लाभार्थियों को अब 375 रुपये प्रतिमाह और 80 वर्ष या उससे अधिक आयु के लाभार्थियों को 625 रुपये प्रतिमाह की सहायता दी जाएगी।
सरकार ने पेंशन के लिए निर्धारित बेंचमार्क दिव्यांगता की न्यूनतम सीमा मौजूदा 80 प्रतिशत से घटाकर 40 प्रतिशत कर दी है। इसके अलावा, न्यूनतम आयु की शर्त समाप्त कर दी गई है।
इन बदलावों का उद्देश्य दिव्यांगजन पेंशन योजना को दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के अनुरूप बनाना है। इस कानून में बेंचमार्क दिव्यांगता की सीमा 40 प्रतिशत निर्धारित की गई है। इसमें यह भी प्रावधान है कि दिव्यांगजनों को दी जाने वाली सहायता अन्य समान श्रेणियों की योजनाओं के मुकाबले कम से कम 25 प्रतिशत अधिक होनी चाहिए।
वृद्धावस्था और विधवा पेंशन योजनाओं तथा पारिवारिक लाभ योजना में कोई बदलाव घोषित नहीं किया गया है। ये योजनाएं पहले की तरह जारी रहेंगी। ग्रामीण विकास मंत्रालय दिव्यांगजन पेंशन योजना के तहत पात्रता की शर्तों, लाभार्थियों की संख्या और सहायता राशि से संबंधित संशोधित दिशानिर्देश तीन महीने के भीतर जारी कर उन्हें लागू करेगा।
15 अगस्त 1995 को शुरू किया गया NSAP गरीब परिवारों को सामाजिक सहायता प्रदान करता है। यह भारतीय संविधान के राज्य के नीति-निर्देशक तत्वों के अनुच्छेद 41 के तहत केंद्र सरकार की जिम्मेदारी को पूरा करने की दिशा में एक प्रमुख कार्यक्रम है। इसके अंतर्गत केंद्र सरकार 100 प्रतिशत वित्तीय सहायता देती है, ताकि देशभर में पात्र लाभार्थियों को समान रूप से सहायता उपलब्ध कराई जा सके।
योजना को 2030-31 तक जारी रखने से कमजोर वर्गों के लिए केंद्र की सामाजिक सहायता व्यवस्था बनी रहेगी, जबकि दिव्यांगता संबंधी पात्रता में बदलाव से अधिक लोगों को पेंशन के दायरे में आने का अवसर मिलेगा।