उत्तर भारत में अक्टूबर के अंतिम दिनों में हुई अचानक और लगातार बारिश किसानों के लिए नई मुसीबत बनकर आई है। पिछले दो दिनों में हुई बारिश के कारण खेतों में पानी भर गया है और गन्ने की कटाई कम से कम एक सप्ताह पिछड़ गई है। इसका असर चीनी मिलों के नए पेराई सत्र की शुरुआत पर पड़ेगा। अब पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अधिकांश चीनी मिलों में दिवाली के बाद ही पेराई शुरू होने की संभावना है।
देश में चीनी के बकाया स्टॉक में कमी को देखते हुए 15 अक्टूबर से चीनी मिलों में पेराई शुरू करने की योजना थी, लेकिन बारिश के चलते ऐसा संभव नहीं हो पाया। गन्ने की कटाई के साथ-साथ रबी फसलों की बुवाई और खरीफ की तैयार फसलों पर भी बेमौसम बारिश की मार पड़ी है। अक्टूबर में दो बार हुई भारी बारिश ने गन्ने की फसल को न केवल नुकसान पहुंचाया है, बल्कि चीनी रिकवरी पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ने की आशंका है।
गन्ना कटाई में देरी से कोल्हू पर भी घटे दाम
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले के किसान संजय चौधरी ने रूरल वॉयस को बताया कि चीनी मिलों में पेराई शुरू नहीं हो पाने के कारण अब कोल्हू पर भी किसानों को गन्ने का दाम 380-400 रुपये प्रति क्विंटल के आसपास मिल रहा है, जबकि सीजन की शुरुआत में कोल्हू संचालकों ने 430-450 रुपये प्रति क्विंटल का भाव दिया था। अब बारिश के चलते कोल्हू संचालक भी गन्ना खरीदने की स्थिति में नहीं हैं।
आमतौर पर चीनी मिलों में पेराई दिवाली के बाद शुरू होती है। इससे पहले किसान त्योहारों के खर्चों के लिए कोल्हू या क्रशर पर गन्ना बेचते हैं। लेकिन इस बार अक्टूबर के दौरान हुई बारिश ने गन्ना किसानों का गणित बिगाड़ दिया है।
नवंबर के दूसरे सप्ताह में शुरू होगी पेराई
बिजनौर जिले की एक चीनी मिल के वरिष्ठ अधिकारी ने रूरल वॉयस को बताया कि इस बार मानसून सीजन समाप्त होने के बाद भी बारिश का सिलसिला जारी रहा है, जिसके चलते अक्टूबर में पेराई शुरू नहीं हो पाई। गन्ने की परिपक्वता और चीनी रिकवरी को ध्यान में रखते हुए भी समय से पहले पेराई शुरू करना व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने बताया कि हाल की बारिश के बाद पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अधिकांश चीनी मिलें दिवाली के बाद यानी नवंबर के दूसरे सप्ताह में ही पेराई शुरू कर पाएंगी।
चीनी उद्योग से जुड़ी रिपोर्टों के अनुसार, अक्टूबर के अंत तक देशभर में 107 चीनी मिलों ने पेराई शुरू कर दी थी। इनमें महाराष्ट्र की 87 मिलें शामिल थीं, जबकि उत्तर प्रदेश की केवल दो मिलें चालू हो पाई थीं। इन मिलों ने नए सीजन में केवल 4 लाख टन चीनी का उत्पादन किया था।
उद्योग के अनुमानों के अनुसार, अक्टूबर के अंत में उपलब्ध कैरीओवर स्टॉक लगभग 15 लाख टन रहने का अनुमान है। जबकि नवंबर में देश की चीनी खपत करीब 23 लाख टन रह सकती है। ऐसे में उत्तर प्रदेश में पेराई शुरू होने में अधिक देरी होती है तो नवंबर में चीनी उत्पादन और घरेलू आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है।
किसानों के सामने दोहरी चुनौती, रबी बुवाई भी पिछड़ी
बारिश के चलते गन्ने और खरीफ फसलों की कटाई में देरी से खेत खाली होने में विलंब हो रहा है। इसका असर गेहूं और दूसरी रबी फसलों की बुवाई पर भी पड़ रहा है। खासतौर पर जिन किसानों ने सरसों की अगेती बुवाई की थी, उनकी फसल को लगातार बारिश से नुकसान पहुंचने की आशंका है। पिछली बारिश के कारण भी कई किसानों को सरसों की दोबारा बुवाई करनी पड़ी थी।
कृषि मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार, 23 अक्टूबर तक देश में कुल 18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में रबी फसलों की बुवाई हुई थी, जबकि पिछले साल इसी अवधि तक 28 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हो चुकी थी। सरसों की बुवाई का क्षेत्र भी पिछले साल के मुकाबले कम रहा है। पिछले साल 23 अक्टूबर तक करीब 21 लाख हेक्टेयर में सरसों की बुवाई हो चुकी थी, जबकि इस साल यह आंकड़ा लगभग 13 लाख हेक्टेयर है।