UPI पेमेंट पर चार्ज का विरोध: पेट्रोल पंप को MDR से छूट की मांग, एसोसिएशन ने वित्त मंत्री को लिखा पत्र
पेट्रोलियम डीलरों ने 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर एमडीआर और अन्य ट्रांजेक्शन शुल्क से पूरी छूट की मांग की है। AIPDA ने वित्त मंत्री को पत्र लिखकर पेट्रोल पंपों पर डिजिटल पेमेंट की लागत बढ़ने और कारोबार पर असर को लेकर चिंता जताई।
दो हजार रुपये से ऊपर के यूपीआई लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाए जाने का कारोबारियों ने विरोध शुरू कर दिया है। ऑल इंडिया पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन (AIPDA) ने पेट्रोल पंपों पर 2,000 रुपये से अधिक के UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) और अन्य ट्रांजेक्शन शुल्क से पूरी तरह छूट देने की मांग की है। एसोसिएशन के अध्यक्ष अजय बंसल ने 16 सितंबर 2026 को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को पत्र भेजकर यह मांग उठाई है।
एसोसिएशन का कहना है कि पेट्रोल और डीजल आवश्यक वस्तुएं हैं और ईंधन की खरीद सामान्य तौर पर अधिक मूल्य के लेनदेन में होती है। इसलिए पेट्रोल पंपों पर 2,000 रुपये से अधिक के भुगतान आम हैं और ग्राहक बड़ी संख्या में UPI का इस्तेमाल करते हैं। ऐसे में UPI भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क पेट्रोलियम डीलरों के लिए आर्थिक बोझ बढ़ा सकता है।
प्रति लीटर होता है मार्जिन
AIPDA ने अपने पत्र में कहा है कि पेट्रोलियम डीलरों का मार्जिन तेल विपणन कंपनियों (OMCs) द्वारा पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के मार्गदर्शन में तय किया जाता है। यह मार्जिन मुख्य रूप से प्रति लीटर के आधार पर निर्धारित होता है, न कि लेनदेन के कुल मूल्य के प्रतिशत के रूप में। इसलिए लेनदेन की राशि बढ़ने के साथ डीलरों की कमाई उसी अनुपात में नहीं बढ़ती।
एसोसिएशन के मुताबिक, अक्टूबर 2017 से डीलर मार्जिन में कोई महत्वपूर्ण बदलाव नहीं हुआ है, जबकि इस दौरान परिचालन लागत, कर्मचारियों के वेतन, बिजली और वैधानिक अनुपालन सहित अन्य खर्च बढ़े हैं। डीलर समुदाय ने OMCs के साथ मार्जिन में संशोधन का मुद्दा लगातार उठाया है, लेकिन अब तक संतोषजनक समाधान नहीं हुआ है।
5 रुपये का शुल्क भी पड़ेगा भारी
एसोसिएशन ने कहा कि 2,000 रुपये से अधिक के प्रत्येक UPI लेनदेन पर यदि 5 रुपये का निश्चित शुल्क लगाया जाता है, तो पेट्रोल पंपों पर होने वाले बड़ी संख्या में दैनिक लेनदेन के कारण इसका संचयी वित्तीय प्रभाव काफी अधिक होगा। वहीं, 0.4 प्रतिशत तक का प्रतिशत आधारित MDR पेट्रोलियम खुदरा कारोबार के मौजूदा मार्जिन ढांचे पर और अधिक असर डाल सकता है।
AIPDA ने यह भी कहा कि पेट्रोलियम डीलर पहले कार्ड से किए जाने वाले ईंधन भुगतान पर MDR को लेकर इसी तरह की चिंताएं उठा चुके हैं और ईंधन लेनदेन की विशिष्ट प्रकृति को देखते हुए उचित राहत या छूट दी गई है। एसोसिएशन का तर्क है कि भुगतान का माध्यम बदलने से ईंधन लेनदेन की मूल प्रकृति नहीं बदलती। ग्राहक डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या UPI से भुगतान करे, डीलर को ईंधन की बिक्री की मात्रा से जुड़ा निश्चित मार्जिन ही मिलता है।
UPI भुगतान में कमी आने की आशंका
एसोसिएशन ने पत्र में आशंका जताई है कि अतिरिक्त शुल्क लागू होने पर कुछ डीलर अपने सीमित मार्जिन को बचाने के लिए एक निश्चित सीमा से अधिक UPI भुगतान को हतोत्साहित या प्रतिबंधित कर सकते हैं। उसके अनुसार, इससे डिजिटल भुगतान, पारदर्शिता और लेनदेन की सुविधा को बढ़ावा देने के सरकार के व्यापक उद्देश्य पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
AIPDA ने कहा कि पेट्रोल पंप आवश्यक सार्वजनिक सेवा उपलब्ध कराते हैं और वाहनों की आवाजाही तथा परिवहन जरूरतों को पूरा करने के लिए लगातार संचालित होते हैं। डिजिटल भुगतान से ग्राहकों की सुविधा, लेनदेन में पारदर्शिता और परिचालन दक्षता बढ़ी है। इसलिए डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने वाले पेट्रोलियम डीलरों पर इसके लिए वित्तीय बोझ नहीं डाला जाना चाहिए।
सरकार से दो प्रमुख मांगें
एसोसिएशन ने सरकार से पेट्रोलियम रिटेल आउटलेट्स पर UPI भुगतान के लिए लेनदेन की राशि की परवाह किए बिना MDR और किसी भी अन्य ट्रांजेक्शन शुल्क से पूरी छूट देने की मांग की है।
इसके अलावा, यदि UPI लेनदेन के लिए सामान्य तौर पर कोई सीमा बरकरार रखी जाती है, तो पेट्रोल पंपों को 2,000 रुपये से अधिक के UPI भुगतान पर प्रतिशत आधारित MDR और निश्चित प्रति-लेनदेन शुल्क, दोनों से विशेष रूप से छूट देने का अनुरोध किया गया है।
एसोसिएशन का कहना है कि ऐसी छूट पेट्रोलियम खुदरा कारोबार की विशिष्ट आर्थिक संरचना, ईंधन लेनदेन की बड़ी संख्या और उच्च मूल्य तथा डीलरों के निश्चित और बेहद सीमित मार्जिन को ध्यान में रखते हुए उचित होगी।



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