दो माह में 5 बार दाम बढ़ाने के बावजूद सरकारी एजेंसियों को किसान नहीं बेच रहे प्याज, खुले बाजार में कीमत ज्यादा

सरकार की तरफ से दो महीने में पांच बार खरीद मूल्य बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल करने के बावजूद किसान सरकारी एजेंसियों को प्याज नहीं बेच रहे हैं। खुले बाजार में अधिक कीमत, ग्रेडिंग के कारण नुकसान और खरीद एजेंसियों की निष्क्रियता से सरकारी खरीद प्रभावित हो रही है।

सरकार ने दो दिन पहले, शनिवार को मूल्य स्थिरीकरण बफर (PSB) के तहत प्याज की खरीद का मूल्य 13 प्रतिशत बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल कर दिया था। दो महीने में इस पांचवी बढ़ोतरी के बावजूद किसान सरकारी एजेंसियों को प्याज नहीं बेचना चाह रहे क्योंकि खुले बाजार में उन्हें अधिक मूल्य मिल रहा है। वैसे तो महाराष्ट्र में इन दिनों बारिश के कारण मंडियों में प्याज की आवक कम हो गई है, फिर भी देश की सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव में तो खरीद के लिए एजेंसियां पहुंची ही नहीं हैं। 

महाराष्ट्र राज्य कांदा (प्याज) उत्पादक शेतकरी संघठन के संस्थापक अध्यक्ष भारत दिघोले ने रूरल वॉयस को बताया कि मंडी में होने वाली नीलामी के लिए किसान जो प्याज ला रहे हैं, उसका खुले मार्केट में उन्हें ज्यादा दाम मिल रहा है। इसलिए किसान सरकारी एजेंसियों को प्याज नहीं बेच रहे हैं। उन्होंने बताया कि खुले बाजार में अभी दाम 2500-2700 रुपये प्रति क्विंटल है, जबकि सरकारी रेट सिर्फ 2,125 रुपये प्रति क्विंटल का है। इसके अलावा नाफेड और एसीसीएफ छंटाई के बाद ही प्याज खरीदते हैं, जिससे किसानों का कम क्वालिटी वाला प्याज बच जाता है। इसलिए भी किसान सरकारी एजेंसियों के पास नहीं जाना चाहते।

सबसे बड़ी प्याज मंडी लासलगांव एपीएमसी के सचिव नरेंद्र वाधवाने ने बताया कि नाफेड और एनसीसीएफ ने पांच एजेंसियों को यहां खरीद के लिए नियुक्त किया था। लेकिन वे एजेंसियां खरीद के लिए आई ही नहीं। पिछले हफ्ते नासिक के कलेक्टर ने भी मंडी का दौरा किया था। उन्होंने नाफेड और एनसीसीएफ के अधिकारियों से कहा है कि जब ये एजेंसियां प्याज नहीं खरीद रही हैं, तो वे दूसरी एजेंसियों को इस काम के लिए नियुक्त करें।

वाधवाने ने बताया कि इन दिनों बारिश के कारण मंडी में कम प्याज आ रहा है। इन दिनों किसान रोजाना करीब 10,000 क्विंटल प्याज मंडी में ला रहे हैं। सोमवार को लासलगांव मंडी में प्याज की औसत कीमत 2,250 रुपये प्रति क्विंटल थी।

मूल्य स्थिरीकरण बफर (PSB) के तहत सरकार इसलिए प्याज की खरीद करती है ताकि जब बाजार में इसके दाम बढ़ें तो वह खुले बाजार में सप्लाई कर सके। इस बार सरकारी खरीद की स्थिति को देखते हुए यह सवाल उठ रहा है कि त्योहारों के मौके पर अगर दाम बढ़े तो सरकार बाजार में हस्तक्षेप कैसे करेगी।

महाराष्ट्र की मंडियों में इस समय रबी प्याज की सप्लाई हो रही है। इस सीजन में प्याज की सरकारी खरीद 15 मई को शुरू हुई थी। खरीद की अंतिम तारीख 30 जून से बढ़ाकर 31 जुलाई की गई है। राज्य में जब प्याज की सरकारी खरीद शुरू हुई, तब सरकार ने भाव 1,270 रुपये प्रति क्विंटल रखा था। इसके बाद पांच बार में इसे बढ़ाकर 2,125 रुपये क्विंटल किया गया। आखिरी बार खरीद मूल्य संशोधन 4 जुलाई को किया गया है।

सरकार ने 3 जून को खरीद के लिए क्वालिटी मानकों में ढील दी थी। हालांकि तब भी किसानों ने कहा था कि इसकी सफलता पारदर्शी तरीके से अमल करने पर होगी। ग्रेडिंग में किसानों का बहुत सारा प्याज छंट जाता है जिसे उन्हें कम दाम पर बेचना पड़ता है। किसान संगठनों ने एपीएमसी के जरिए ही प्याज खरीदने की मांग की थी ताकि पारदर्शिता बनी रहे। राज्य के 36 जिलों में से करीब 30 जिलों में 10 से 15 लाख किसान परिवार प्याज की खेती करते हैं।

केंद्र ने प्याज का खरीद मूल्य बढ़ाकर 2,125 रुपये प्रति क्विंटल किया