दो सप्ताह बाद मानसून ने पकड़ी रफ्तार, खेती के लिए राहत लेकिन बारिश में क्षेत्रीय असमानता
लगभग दो सप्ताह ठहराव के बाद दक्षिण-पश्चिम मानसून फिर से आगे बढ़ने लगा है। गुजरात, मध्य प्रदेश, झारखंड और पूरे महाराष्ट्र में मानसून की प्रगति से खरीफ बुवाई को गति मिलने की उम्मीद है, हालांकि देश में अब भी 42 प्रतिशत वर्षा की कमी बनी हुई है।
भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने गुजरात और मध्य प्रदेश में दस्तक दी है जबकि पूरे महाराष्ट्र और अधिकांश छत्तीसगढ़ व झारखंड को कवर कर लिया है। इससे खरीफ फसलों की बुवाई में तेजी आने की उम्मीद है।
अगले दो से तीन दिनों में मानसून के गुजरात, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ के शेष भागों, झारखंड, बिहार और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। मौसम विभाग ने पश्चिमी तट, पूर्वोत्तर भारत तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में सप्ताह भर भारी से बहुत भारी वर्षा (7 से 20 सेंटीमीटर) का अनुमान जताया है। वहीं 27 और 28 जून को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में अत्यधिक भारी बारिश होने की संभावना है।
खरीफ बुवाई को मिलेगा बड़ा सहारा
हाल की बारिश से कपास, सोयाबीन, धान, मक्का, दालों और मूंगफली जैसी प्रमुख खरीफ फसलों की बुवाई को गति मिलने की उम्मीद है। मानसून की कमजोर शुरुआत और पर्याप्त मिट्टी की नमी नहीं होने के कारण कई राज्यों में किसानों ने बुवाई टाल दी थी। अब वर्षा बढ़ने से खेतों की तैयारी, धान की नर्सरी की रोपाई और सीधी बुवाई में तेजी आने की संभावना है।
देश में अब भी 42 प्रतिशत वर्षा की कमी
हालांकि मानसून की सक्रियता बढ़ी है, लेकिन 1 जून से 24 जून 2026 के दौरान पूरे देश में दीर्घकालिक औसत (LPA) की तुलना में 42 प्रतिशत कम वर्षा दर्ज की गई है।
- मध्य भारत में वर्षा 59 प्रतिशत कम रही।
- पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में 41 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई।
यह स्थिति बताती है कि मानसूनी बारिश का वितरण अभी भी असमान बना हुआ है।

इन क्षेत्रों में जारी रह सकती है लू
IMD के अनुसार, पूर्वी उत्तर प्रदेश में अगले चार से पांच दिनों तक लू चलने की संभावना है। वहीं उत्तर-पूर्वी मध्य प्रदेश और बिहार में अगले दो से तीन दिनों तक हीटवेव की स्थिति बनी रह सकती है। इससे इन क्षेत्रों में कृषि गतिविधियों पर असर पड़ने की आशंका बनी हुई है।
315 संवेदनशील जिलों के लिए आकस्मिक योजना
मानसून की कमी को देखते हुए केंद्र सरकार ने 315 संवेदनशील जिलों के लिए जिला-स्तरीय आकस्मिक (कंटीजेंसी) योजनाएं तैयार की हैं। इनमें 111 जिले ऐसे हैं जहां सिंचाई सुविधा कम होने के कारण जोखिम अधिक माना गया है। राज्यों को अल्पावधि अवधि वाली फसलों, दालों, मोटे अनाज (मिलेट्स) और तिलहनों को बढ़ावा देने के साथ जल संरक्षण उपायों को मजबूत करने की सलाह दी गई है।
कृषि मंत्रालय ने दिए अग्रिम तैयारी के निर्देश
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने हाल ही में अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि संभावित कम वर्षा वाले जिलों में सभी आकस्मिक तैयारियां पूरी रखी जाएं। इसमें सूखा-सहिष्णु बीजों की उपलब्धता, समय पर कृषि आदानों की आपूर्ति और जिला-विशिष्ट फसल सलाह जारी करने पर विशेष जोर दिया गया है, ताकि विलंबित या अनियमित वर्षा का प्रभाव कम किया जा सके।
एल नीनो निगरानी के लिए विशेष व्यवस्था
केंद्र सरकार ने वर्षा, बुवाई की प्रगति और फसलों पर मौसम के प्रभाव की वास्तविक समय (रियल टाइम) निगरानी के लिए El Niño Monitoring Cell और Crop Weather Watch Group को भी सक्रिय कर दिया है। इनकी मदद से संवेदनशील जिलों में मौसम और फसलों की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।
अगले तीन सप्ताह होंगे बेहद अहम
मानसून के दोबारा सक्रिय होने से खरीफ सीजन को नई गति मिलने की उम्मीद है। अगले दो से तीन सप्ताह भारत के कृषि क्षेत्र के लिए निर्णायक साबित होंगे। इसी अवधि में धान, सोयाबीन, कपास, मक्का, दालों और अन्य प्रमुख खरीफ फसलों की अधिकांश बुवाई पूरी होगी, जिससे वर्ष 2026-27 के कृषि उत्पादन की स्थिति तय होगी।


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