हूती धमकी से भारत-चीन जा रहे सऊदी तेल टैंकर लौटे, कच्चे तेल की कीमतें छह सप्ताह के उच्चतम स्तर पर

यमन के हूती विद्रोहियों की धमकियों के बाद सऊदी बंदरगाहों से तेल ले जा रहे जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई, जिससे वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें छह सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब में बढ़ते तनाव के बीच विश्लेषकों ने चेतावनी दी है कि संघर्ष बढ़ने पर कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती हैं।

हूती धमकी से भारत-चीन जा रहे सऊदी तेल टैंकर लौटे, कच्चे तेल की कीमतें छह सप्ताह के उच्चतम स्तर पर

यमन के हूती विद्रोहियों की नई धमकियों के कारण लाल सागर के रास्ते सऊदी अरब से होने वाला तेल निर्यात प्रभावित होने लगा है। इस कारण वैश्विक कच्चे तेल की कीमतें लगभग छह सप्ताह के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं। इस घटनाक्रम ने मध्य पूर्व में संभावित आपूर्ति संकट की आशंकाओं को बढ़ा दिया है। साथ ही, होर्मुज जलडमरूमध्य में पहले से जारी तनाव के बीच यह एक नया संकट बनकर उभरा है, जिससे वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं और गहरी हो गई हैं।

बुधवार को ब्रेंट क्रूड का भाव लगभग 94.18 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) की कीमत बढ़कर 87.45 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। ब्रेंट क्रूड की यह कीमत जून के पहले सप्ताह के बाद सर्वाधिक है।

कीमतों में यह तेजी उन खबरों के बाद आई, जिनमें कहा गया कि हूती विद्रोहियों ने वैश्विक शिपिंग कंपनियों को सऊदी अरब के बंदरगाहों पर किसी भी प्रकार का माल लोड या अनलोड नहीं करने की चेतावनी दी है। रिपोर्टों के अनुसार, ईरान समर्थित हूती संगठन ने प्रमुख शिपिंग कंपनियों को ई-मेल भेजकर कहा कि सऊदी बंदरगाहों से जुड़े जहाज उनकी परिचालन क्षमता के दायरे में कहीं भी निशाना बनाए जा सकते हैं।

इन धमकियों का असर समुद्री यातायात पर भी दिखने लगा है। भारत और चीन के लिए कच्चा तेल लेकर जा रहे कम से कम दो सऊदी तेल टैंकरों ने सुरक्षा खतरे के कारण लाल सागर में ही आपातकालीन रूप से अपना रास्ता बदलते हुए वापस लौटने का फैसला किया। इस घटना ने दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक बाब-अल-मंदेब जलडमरूमध्य की सुरक्षा को लेकर नई चिंताएं पैदा कर दी हैं।

होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने के बाद लाल सागर का मार्ग सऊदी अरब के लिए पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। सऊदी अपने पूर्वी तेल क्षेत्रों से लाल सागर के यानबू बंदरगाह तक कच्चा तेल पहुंचाने के लिए प्रतिदिन 70 लाख बैरल क्षमता वाली ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर निर्भर है। हालांकि, यानबू बंदरगाह से प्रतिदिन केवल 40 से 45 लाख बैरल कच्चे तेल का ही निर्यात संभव है।

उधर, अमेरिका और ईरान के बीच व्यापक संघर्ष भी लगातार तेज होता जा रहा है। ईरान के सैन्य ठिकानों पर अमेरिका के नए हमलों और खाड़ी क्षेत्र के बुनियादी ढांचे पर ईरान के हमलों ने भू-राजनीतिक जोखिम बढ़ा दिए हैं। कुवैत के बिजली और समुद्री जल डिसैलिनेशन प्लांट पर हमलों, बहरीन में ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा मिसाइल हमलों के दावों तथा वाणिज्यिक जहाजों को मिल रही धमकियों ने वैश्विक बाजारों की चिंता और बढ़ा दी है।

ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य और बाब-अल-मंदेब कॉरिडोर दोनों क्षेत्रों में एक साथ तनाव और सैन्य गतिविधियां जारी रहती हैं, तो कच्चे तेल की कीमत 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। साथ ही, समुद्री परिवहन लागत और बीमा प्रीमियम में वृद्धि से वैश्विक ईंधन कीमतों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है। 

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