प्रधानमंत्री ने नीति आयोग का किया पुनर्गठन, पूर्व आर्थिक सलाहकार अशोक लाहिड़ी बनेंगे वाइस-चेयरपर्सन

पश्चिम बंगाल के बालुरघाट से वर्तमान में भाजपा विधायक अशोक लाहिड़ी का आर्थिक नीति निर्माण में लंबा अनुभव रहा है। वे भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रह चुके हैं और 15वें वित्त आयोग के सदस्य भी रहे हैं। उल्लेखनीय है कि वह वर्तमान विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रहे हैं।

अशोक लाहिड़ी को बधाई देते प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारी थिंक टैंक नीति आयोग के पुनर्गठन को मंजूरी दे दी है। पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार अशोक कुमार लाहिड़ी के नाम को नीति आयोग के वाइस-चेयरपर्सन पद के लिए स्वीकृति दी गई है। इसके साथ ही पांच पूर्णकालिक सदस्यों के नामों को भी मंजूरी दी गई है। इनमें राजीव गौबा, प्रोफेसर के. वी. राजू, प्रोफेसर गोवर्धन दास, प्रोफेसर अभय करंदीकर और डॉ. एम. श्रीनिवास शामिल हैं। कैबिनेट सचिवालय की तरफ से जारी अधिसूचना के अनुसार, ये नियुक्तियां कार्यभार संभालने की तिथि से प्रभावी होंगी और अगले आदेश तक लागू रहेंगी।

प्रधानमंत्री मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा:

“नीति आयोग भारत की नीति-निर्माण व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है, जो सहकारी संघवाद को बढ़ावा देता है, सुधारों को आगे बढ़ाता है और ‘Ease of Living’ को मजबूत करता है। यह विभिन्न क्षेत्रों में नवाचार और दीर्घकालिक रणनीतिक सोच के लिए एक गतिशील मंच के रूप में कार्य करता है।

“सरकार ने नीति आयोग का पुनर्गठन किया है। श्री अशोक कुमार लाहिड़ी जी को उपाध्यक्ष बनने पर मेरी हार्दिक शुभकामनाएं। साथ ही, श्री राजीव गौबा जी, प्रो. के. वी. राजू जी, प्रो. गोबर्धन दास जी, प्रो. अभय करंदीकर जी और डॉ. एम. श्रीनिवास जी को नीति आयोग के पूर्णकालिक सदस्य बनने पर भी मेरी शुभकामनाएं।

“आप सभी को आगे प्रोडक्टिव और प्रभावशाली कार्यकाल की शुभकामनाएं।”

पूर्व मुख्य आर्थिक सलाहकार लाहिड़ी भाजपा विधायक हैं

पश्चिम बंगाल के बालुरघाट से वर्तमान में भाजपा विधायक अशोक लाहिड़ी का आर्थिक नीति निर्माण में लंबा अनुभव रहा है। वे भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार रह चुके हैं और 15वें वित्त आयोग के सदस्य भी रहे हैं। उल्लेखनीय है कि वह वर्तमान विधानसभा चुनाव नहीं लड़ रहे हैं।

उनका पेशेवर सफर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संस्थानों में महत्वपूर्ण भूमिकाओं से भरा रहा है, जिसमें एशियाई विकास बैंक, विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के साथ कार्य शामिल हैं। दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और प्रेसिडेंसी यूनिवर्सिटी (कोलकाता) के पूर्व छात्र लाहिड़ी पश्चिम बंगाल के आर्थिक विकास को लेकर मुखर रहे हैं।

IISER भोपाल के निदेशक हैं दास 

प्रो. गोबर्धन दास वर्तमान में भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (IISER), भोपाल के निदेशक हैं। इससे पहले वह जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) में स्पेशल सेंटर फॉर मॉलिक्यूलर मेडिसिन के प्रमुख और प्रोफेसर रह चुके हैं।

दास एक अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त वैज्ञानिक हैं, जो इम्यूनोलॉजी, संक्रामक रोगों और कोशिका जीवविज्ञान में विशेषज्ञता रखते हैं। उनके पास लगभग तीन दशकों का शोध का अनुभव है। उन्हें विशेष रूप से तपेदिक (टीबी) पर किए गए शोध के लिए वैश्विक पहचान मिली है। उनका शैक्षणिक और शोध करियर दुनिया के प्रमुख संस्थानों के साथ सहयोग से जुड़ा रहा है, जिनमें येल यूनिवर्सिटी, ह्यूस्टन मेथोडिस्ट अस्पताल, यूनिवर्सिटी ऑफ क्वाज़ुलु-नटाल और दक्षिण अफ्रीका का नेशनल रिसर्च फाउंडेशन शामिल हैं। 

राजीव गौबा एक सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारी हैं। वह 30 अगस्त 2019 से 30 अगस्त 2024 तक पांच वर्षों तक भारत के कैबिनेट सचिव रहे। उन्होंने केंद्रीय गृह सचिव के रूप में भी कार्य किया है।

प्रोफेसर के. वी. राजू वर्तमान में प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के सदस्य हैं। वह उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार के रूप में भी कार्य कर रहे हैं। इससे पहले वह कर्नाटक सरकार के मुख्यमंत्री के आर्थिक सलाहकार रह चुके हैं। वह बेंगलुरु स्थित चाणक्य विश्वविद्यालय में प्रोफेसर एमेरिटस हैं। साथ ही, वह हैदराबाद स्थित इक्रीसैट के एशिया डिवीजन में प्रिंसिपल साइंटिस्ट (पॉलिसी एंड इम्पैक्ट) के रूप में भी कार्य कर चुके हैं।

प्रोफेसर अभय करंदीकर वर्तमान में विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के सचिव के रूप में कार्यरत हैं। वह दूरसंचार प्रौद्योगिकी के क्षेत्र के प्रसिद्ध विशेषज्ञ हैं और इससे पहले आईआईटी कानपुर के निदेशक रह चुके हैं।

डॉ. एम. श्रीनिवास नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) के निदेशक हैं।