बिहार में लीची संकट, केंद्रीय कृषि मंत्री के निर्देश पर विशेषज्ञ टास्क फोर्स गठित

बिहार में लीची स्टिंग बग से किसानों को भारी नुकसान। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर एक विशेषज्ञ टास्क फोर्स गठित। यह टीम प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का आकलन करेगी और किसानों को राहत पहुंचाने के लिए उपाय सुझाएगी।

बिहार में लीची स्टिंग बग से हो रहे भारी नुकसान को केंद्रीय कृषि तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने गंभीरता से लिया है। किसानों द्वारा लीची स्टिंग बग से फसल को हो रहे नुकसान का मुद्दा उठाए जाने के बाद शिवराज सिंह चौहान के निर्देश पर तुरंत एक विशेषज्ञ टास्क फोर्स गठित की गई, जो प्रभावित इलाकों का दौरा कर एक सप्ताह में अपनी रिपोर्ट देगी।

यह टीम प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर स्थिति का आकलन करेगी तथा किसानों को राहत पहुंचाने के लिए तात्कालिक और दीर्घकालिक उपाय सुझाएगी।

7 मई को लखनऊ स्थिति आईसीएआर के केंद्रीय उपोष्ण बागवानी संस्थान में आयोजित कृषक संवाद कार्यक्रम के दौरान किसानों ने लीची स्टिंग बग के कारण फसल को हो रहे नुकसान का मुद्दा केंद्रीय कृषि मंत्री के समक्ष उठाया था। किसानों ने बताया कि इस कीट के कारण लीची उत्पादन पर गंभीर असर पड़ रहा है और उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस पर शिवराज सिंह चौहान ने तत्काल संज्ञान लेते हुए विशेषज्ञों की टीम गठित करने का निर्देश दिया।

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र द्वारा 7 मई को जारी आदेश के अनुसार, यह टास्क फोर्स लीची स्टिंग बग की वर्तमान स्थिति का वैज्ञानिक आकलन करेगी। टीम प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर फसल क्षति का आकलन करेगी और किसानों को राहत पहुंचाने के लिए तात्कालिक तथा दीर्घकालिक उपाय सुझाएगी। इसके अलावा, किसानों के लिए जरूरी तकनीकी परामर्श, विस्तार गतिविधियों और राज्य एवं केंद्र स्तर पर आवश्यक हस्तक्षेप के सुझाव भी दिए जाएंगे।

विशेषज्ञ कार्यबल में विभिन्न संस्थानों के वैज्ञानिकों और अधिकारियों को शामिल किया गया है। राष्ट्रीय लीची अनुसंधान केंद्र, मुजफ्फरपुर के निदेशक को इसका अध्यक्ष बनाया गया है। इसके अलावा बिहार सरकार के उद्यान एवं पौधा संरक्षण विभागों के प्रतिनिधि, डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालय के कीट वैज्ञानिक प्रतिनिधि, बिहार कृषि विश्वविद्यालय के प्रधान वैज्ञानिक (कीट विज्ञान), एकीकृत बागवानी विकास मिशन के प्रतिनिधि तथा विभिन्न कृषि अनुसंधान संस्थानों के विशेषज्ञ इसमें शामिल किए गए हैं।