गेहूं खरीद की सुस्त शुरुआत, पिछले साल से करीब 32 लाख टन कम अनाज की खरीद

चालू रबी सीजन 2026-27 में गेहूं खरीद की शुरुआत काफी धीमी रही है। बेमौसम बारिश से फसल की गुणवत्ता प्रभावित हुई है और खरीद व्यवस्था में दिक्कतें भी देखी जा रही हैं। राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में खरीद मानकों में छूट के बाद आने वाले दिनों में खरीद में तेजी आने की उम्मीद है।

भारत में रबी विपणन सत्र (RMS) 2026-27 के लिए गेहूं की सरकारी खरीद की शुरुआत काफी सुस्त रही है। 1 अप्रैल से शुरू हुए खरीद सीजन में 16 अप्रैल तक देशभर में कुल 51.34 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है, जो पिछले सीजन की समान अवधि के 83.57 लाख टन की तुलना में करीब 38 प्रतिशत कम है।

इस साल गेहूं कटाई के दौरान कई राज्यों में बेमौसम बारिश से उपज भीग गई और कटाई में बाधा पहुंची। साथ ही, किसानों को खरीद प्रक्रिया में भी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। हरियाणा और पंजाब में गेहूं खरीद मानकों में छूट मिलने के बाद अगले सप्ताह तक खरीद में तेजी आने की उम्मीद है।

16 अप्रैल तक पंजाब में 5.94 लाख टन और हरियाणा में 37.74 लाख टन गेहूं की खरीद हुई। मध्य प्रदेश में खरीद की शुरुआत देरी से होने के कारण महज 3.43 लाख टन गेहूं खरीदा गया। उत्तर प्रदेश में 1.62 लाख टन और राजस्थान में 2.52 लाख टन गेहूं की खरीद हुई है।

मार्च-अप्रैल में हुई बारिश के कारण गेहूं की फसल में नमी, सिकुड़न और चमक की कमी देखी गई, जिससे बड़ी मात्रा में फसल मानक गुणवत्ता से बाहर हो गई। इस समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने राजस्थान, पंजाब और हरियाणा में खरीद मानकों में छूट दे दी है। अब पंजाब में 70 प्रतिशत तक चमक की कमी (लस्टर लॉस) और 15 प्रतिशत तक सिकुड़े-टूटे दाने स्वीकार किए जाएंगे (पहले 6 प्रतिशत की सीमा थी)। क्षतिग्रस्त दानों की सीमा 6 प्रतिशत ही रखी गई है।

केंद्र सरकार ने इस सीजन के लिए गेहूं का न्यूनतम समर्थन मूल्य 2,585 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया है। रबी सीजन 2026-27 के लिए कुल 303 लाख टन गेहूं खरीद का लक्ष्य रखा गया है। लेकिन जिस तरह खरीद की धीमी शुरुआत हुई है और बारिश से फसल को नुकसान पहुंचा है, उससे कुल खरीद लक्ष्य से पीछे रहने की आशंका है। हालांकि, आने वाले हफ्तों में आवक बढ़ने के साथ खरीद में तेजी आने की उम्मीद जताई जा रही है।