अखिल भारतीय किसान सभा (AIKS) ने देशभर के किसानों से पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में वामफ्रंट और तमिलनाडु चुनाव में एसपीए का समर्थन करने की अपील की है। संगठन ने न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), कृषि संकट और संघीय अधिकारों के मुद्दों को ध्यान में रखते हुए किसानों से फैसला करने को कहा है।
किसान सभा ने भाजपा-नीत एनडीए सरकार की आलोचना करते हुए कहा कि उसने 2014 के अपने वादे - C2+50% के आधार पर MSP और सुनिश्चित खरीद - को लागू नहीं किया। किसानों को उचित मूल्य न मिलने, उर्वरक और ईंधन पर सब्सिडी में कटौती तथा उत्पादन लागत बढ़ने से कृषि संकट और गहरा हुआ है और किसानों का कर्ज बढ़ा है।
संगठन ने पश्चिम बंगाल की तृणमूल कांग्रेस सरकार पर भी निशाना साधते हुए उसे किसान-विरोधी बताया। AIKS ने कहा कि राज्य में आलू उत्पादकों को मात्र 2–3 रुपये प्रति किलो का दाम मिल रहा है, जबकि उपभोक्ताओं को 20–30 रुपये या उससे अधिक कीमत चुकानी पड़ रही है, जिससे बिचौलियों को फायदा हो रहा है।
किसान सभा ने तमिलनाडु में डीएमके (DMK) के नेतृत्व वाले सेक्युलर प्रोग्रेसिव एलायंस के घोषणा पत्र का स्वागत किया, जिसमें धान, गन्ना और दूध के लिए अधिक समर्थन मूल्य का वादा किया गया है। संगठन का कहना है कि इससे राज्य के लाखों किसानों को लाभ होगा।
इसी तरह, पश्चिम बंगाल में सीपीएम के नेतृत्व वाले लेफ्ट फ्रंट ने स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें लागू करने और प्रमुख फसलों के लिए MSP की कानूनी गारंटी देने का वादा किया है। साथ ही, किसान उत्पादक संगठनों को बढ़ावा देने, बंद चाय बागानों को खोलने और कृषि आधारित उद्योगों को समर्थन देने की भी योजना है।
किसान सभा ने केंद्र सरकार पर सत्ता के केंद्रीकरण का आरोप लगाते हुए राज्यों के लिए कर हिस्सेदारी बढ़ाने की मांग की। संगठन का कहना है कि किसानों के हितों की रक्षा और लोकतांत्रिक व संघीय मूल्यों को मजबूत करने के लिए इन गठबंधनों का समर्थन जरूरी है।