महंगी चीनी में गन्ना किसानों ने भी मांगा हिस्सा, महाराष्ट्र के किसानों ने कहा 7,000 रुपये प्रति टन मिले गन्ने की कीमत

महाराष्ट्र के गन्ना किसान 2025-26 सीजन के लिए 7,000 रुपये प्रति टन की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि चीनी की कीमतों में 40 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि के बावजूद उन्हें इसका उचित लाभ नहीं मिला। किसानों ने चीनी मिलों से बढ़े मुनाफे में हिस्सा देने और मूल्य निर्धारण में पारदर्शिता की मांग की है।

महाराष्ट्र में गन्ना किसानों ने 2025-26 पेराई सीजन के लिए गन्ने का भुगतान बढ़ाने की मांग की है। किसानों का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में चीनी की कीमतों में 40 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोतरी हुई है, लेकिन इसका लाभ गन्ना उत्पादकों को नहीं मिला है। किसान संगठनों का तर्क है कि चीनी मिलों को ऊंची कीमतों से अतिरिक्त आय हो रही है, इसलिए उसका उचित हिस्सा किसानों को भी मिलना चाहिए।

देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में विभिन्न जिलों के किसानों ने इस मुद्दे पर विरोध प्रदर्शन किया। इनमें स्वाभिमानी शेतकरी संगठन भी शामिल था। किसानों ने गन्ने का भाव बढ़ाकर 7,000 रुपये प्रति टन करने की मांग की है। पिछले दिनों पुणे के साकर संकुल स्थित चीनी आयुक्त कार्यालय के बाहर प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सवाल उठाया कि चीनी की कीमतों में इतनी बड़ी वृद्धि के बावजूद गन्ना किसानों को इसका लाभ क्यों नहीं मिल रहा है।

किसानों ने चीनी उद्योग में अधिक पारदर्शिता की भी मांग की। उनका कहना है कि चीनी की बिक्री और खरीद कीमतों तथा अन्य मूल्य संबंधी विवरणों को सार्वजनिक किया जाना चाहिए, ताकि किसान अपने गन्ने से पैदा होने वाले वास्तविक मूल्य को समझ सकें और यह तय कर सकें कि उन्हें उचित हिस्सा मिल रहा है या नहीं।

चीनी मिलों को मासिक के बजाय पाक्षिक कोटा होगा आवंटित

प्रदर्शनकारियों ने कहा कि खेती की लागत, मजदूरी और अन्य कृषि खर्च लगातार बढ़ रहे हैं, जिससे किसान परिवारों पर आर्थिक बोझ बढ़ गया है। किसानों का कहना है कि चीनी से मिलने वाले बेहतर दाम का लाभ गन्ना उत्पादकों तक भी पहुंचना चाहिए, क्योंकि खेती में होने वाले जोखिम का बड़ा हिस्सा किसान ही उठाते हैं।

किसानों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। किसान गन्ने की कटाई और मिलों को गन्ने की आपूर्ति रोकने जैसे कदम उठा सकते हैं, जिससे राज्य की चीनी मिलों का संचालन प्रभावित हो सकता है।

उन्होंने यह भी मांग की कि गन्ने की कीमत से जुड़े फैसले किसानों की समितियों से विचार-विमर्श के बाद लिए जाएं। उनका कहना है कि चीनी मूल्य श्रृंखला में किसानों की भूमिका बढ़ाई जानी चाहिए और मूल्य निर्धारण प्रक्रिया पारदर्शी होनी चाहिए।

किसानों ने बदलती चीनी कीमतों और चीनी आयात को लेकर महाराष्ट्र सरकार से ऐसी नीतियां बनाने की मांग की है, जो गन्ना उत्पादकों के हितों की रक्षा कर सकें। किसानों ने चेतावनी दी है कि 7,000 रुपये प्रति टन की मांग पर विचार नहीं किया गया तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।