भारत का सकल घरेलू उत्पाद (GDP) मौजूदा वित्त वर्ष 2026-27 की अप्रैल-जून तिमाही में 7.8 प्रतिशत बढ़ा है। वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में विकास दर 6.9 प्रतिशत थी। लेकिन प्राथमिक क्षेत्र में शामिल कृषि और खनन, दोनों की विकास दर में गिरावट आई है। पिछली तिमाही में कृषि और संबद्ध क्षेत्र की विकास दर पिछले साल के 4.4 प्रतिशत की तुलना में घटकर 3.6 प्रतिशत रह गई। खनन क्षेत्र की वृद्धि दर तो 12.4 प्रतिशत के मुकाबले -2.4 प्रतिशत पर आ गई।
सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय (MoSPI) की ओर से सोमवार को जारी ताजा तिमाही अनुमानों के अनुसार, अर्थव्यवस्था की समग्र वृद्धि में तेजी मुख्य रूप से सेकंडरी और टर्शियरी (सेवा) क्षेत्रों के बेहतर प्रदर्शन से आई है। स्थिर कीमतों पर टर्शियरी क्षेत्र की वृद्धि दर 10 प्रतिशत रही, जबकि सेकंडरी क्षेत्र 8.6 प्रतिशत की दर से बढ़ा। इसके विपरीत, प्राथमिक क्षेत्र की वृद्धि दर तिमाही के दौरान केवल 2.9 प्रतिशत रही।
कृषि क्षेत्र की रफ्तार में कमी
कृषि, पशुधन, वानिकी और मत्स्य क्षेत्र की संयुक्त वृद्धि दर वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 3.6 प्रतिशत रही, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की समान तिमाही में यह 4.4 प्रतिशत थी। कृषि एवं संबद्ध गतिविधियों का ग्रॉस वैल्यू एडिशन (GVA) वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के 11.97 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 12.41 लाख करोड़ रुपये हो गया।
कृषि वृद्धि दर में यह कमी ऐसे समय आई है जब खाद्यान्न उत्पादन से जुड़े संकेतक सकारात्मक वृद्धि दर्शा रहे हैं। पहली तिमाही में कुल खाद्यान्न उत्पादन की वृद्धि दर 4.8 प्रतिशत रही, जबकि एक साल पहले यह 5 प्रतिशत थी। चावल की वृद्धि दर 6.2 प्रतिशत रही, हालांकि यह पिछले साल की 10.6 प्रतिशत वृद्धि से काफी कम है। गेहूं की वृद्धि दर भी 3.1 प्रतिशत से घटकर केवल 0.5 प्रतिशत रह गई।
खनन क्षेत्र में तेज गिरावट
खनन एवं उत्खनन क्षेत्र के प्रदर्शन में सबसे तेज गिरावट दर्ज की गई। वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में खनन एवं उत्खनन का वास्तविक GVA 2.4 प्रतिशत घटा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में इसमें 12.4 प्रतिशत की मजबूत वृद्धि हुई थी। इस क्षेत्र का वास्तविक GVA 1.59 लाख करोड़ रुपये से घटकर 1.56 लाख करोड़ रुपये रह गया।
खनन से जुड़े अन्य संकेतक भी कमजोर हैं। पहली तिमाही में खनन एवं उत्खनन के औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 1.2 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि एक साल पहले इसमें 3.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी। ईंधन खनिजों के सूचकांक में 4.5 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि प्राकृतिक गैस की खपत 2.6 प्रतिशत घटी।
सेवाएं बनीं ग्रोथ का सबसे बड़ा कारण
सबसे मजबूत प्रदर्शन टर्शियरी यानी सेवा क्षेत्र का रहा। स्थिर कीमतों पर पहली तिमाही में सेवा क्षेत्र 10 प्रतिशत बढ़ा। इसके भीतर वित्तीय, रियल एस्टेट, आवास स्वामित्व, आईटी और पेशेवर सेवाओं की वृद्धि दर 12.1 प्रतिशत रही। व्यापार, होटल, परिवहन, संचार तथा प्रसारण और भंडारण से संबंधित सेवाओं में 8.5 प्रतिशत की वृद्धि हुई। लोक प्रशासन, रक्षा और अन्य सेवाओं की वृद्धि दर 7.5 प्रतिशत रही।
सेकंडरी क्षेत्र का प्रदर्शन भी मजबूत रहा। इसकी वृद्धि दर पिछले साल की पहली तिमाही के 6.1 प्रतिशत से बढ़कर 8.6 प्रतिशत हो गई। मैन्युफैक्चरिंग 9.2 प्रतिशत, बिजली, गैस, जलापूर्ति और अन्य उपयोगिता सेवाएं 8.9 प्रतिशत तथा निर्माण क्षेत्र 7.7 प्रतिशत की दर से बढ़ा।
कुल मिलाकर, स्थिर कीमतों पर वास्तविक GVA में पहली तिमाही के दौरान 8.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि एक साल पहले यह 7 प्रतिशत थी। नॉमिनल GVA में 11.5 प्रतिशत और नॉमिनल GDP में 10.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई। स्थिर कीमतों पर GDP का आकार वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही के 75.46 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में 81.36 लाख करोड़ रुपये हो गया।
निवेश के मोर्चे पर मजबूती
व्यय के मोर्चे पर निवेश गतिविधियों में उल्लेखनीय मजबूती दिखाई दी। सकल स्थिर पूंजी निर्माण (GFCF), जो अर्थव्यवस्था में स्थिर परिसंपत्तियों में निवेश का इंडिकेटर है, पहली तिमाही में 11.9 प्रतिशत बढ़ा। एक साल पहले की समान तिमाही में इसकी वृद्धि दर 5.8 प्रतिशत थी। निजी अंतिम उपभोग व्यय (PFCE), जो घरेलू उपभोग मांग को दर्शाता है, पिछले साल के 6.8 प्रतिशत की तुलना में 7.1 प्रतिशत बढ़ा। सरकारी अंतिम उपभोग व्यय (GFCE) में 4.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो एक साल पहले की 4.5 प्रतिशत वृद्धि से थोड़ा कम है।
निर्यात ने भी अर्थव्यवस्था की वृद्धि को महत्वपूर्ण सहारा दिया। तिमाही के दौरान वास्तविक निर्यात में 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में यह वृद्धि 6 प्रतिशत थी। इसके विपरीत, आयात में 1.1 प्रतिशत की गिरावट आई, जबकि एक साल पहले इसमें 5.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई थी।
हालांकि, मौजूदा कीमतों पर निर्यात और आयात दोनों में काफी अधिक वृद्धि दर्ज की गई। निर्यात 25.8 प्रतिशत और आयात 30.9 प्रतिशत बढ़ा। निजी उपभोग में मौजूदा कीमतों पर 9.9 प्रतिशत तथा GFCF में 20.4 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े इंडिकेटर्स में सुधार
MoSPI के आंकड़े कई औद्योगिक क्षेत्रों में मजबूत गतिविधि की ओर इशारा करते हैं। पूंजीगत वस्तुओं के उत्पादन में पहली तिमाही में 15.2 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि एक साल पहले यह 8.8 प्रतिशत थी। विद्युत उपकरणों के निर्माण में 27 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि पिछले साल यह 9.7 प्रतिशत थी। कंप्यूटर, इलेक्ट्रॉनिक और ऑप्टिकल उत्पादों के निर्माण में 12.4 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले साल की 8.8 प्रतिशत वृद्धि से अधिक है।
वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री में 18.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि एक साल पहले इसमें 0.3 प्रतिशत की गिरावट आई थी। तीन पहिया वाहनों की बिक्री 29.7 प्रतिशत बढ़ी। घरेलू वाहनों के पंजीकरण में 15.9 प्रतिशत की वृद्धि हुई। इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े इंडिकेटर भी सकारात्मक रहे। सीमेंट उत्पादन की वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत से बढ़कर 8.9 प्रतिशत हो गई, जबकि तैयार स्टील की खपत में 8.3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो एक साल पहले 8 प्रतिशत थी।
नई GDP सीरीज और संशोधन
नवीनतम आंकड़े नई GDP सीरीज के तहत तैयार किए गए हैं, जिसमें 2022-23 को आधार वर्ष बनाया गया है। MoSPI के अनुसार, नई सीरीज में प्रशासनिक स्रोतों से प्राप्त अपडेटेड आंकड़ों, आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) की नई सीरीज और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) के अपडेटेड आंकड़ों को शामिल किया गया है।
मैन्युफैक्चरिंग GVA के आकलन के लिए नई सीरीज में ‘डबल डिफ्लेशन’ पद्धति अपनाई गई है। इसके तहत उत्पादन और मध्यवर्ती खपत को अलग-अलग विस्तृत प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स के जरिए समायोजित किया जाता है। MoSPI के अनुसार, इससे उत्पादन और मध्यवर्ती खपत दोनों की कीमतों में होने वाले बदलावों को बेहतर तरीके से शामिल करते हुए वास्तविक मूल्यवर्धन का अधिक मजबूत आकलन संभव होता है।
मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि स्रोत एजेंसियों से बेहतर डेटा उपलब्ध होने और इनपुट आंकड़ों में संशोधन के कारण तिमाही GDP अनुमानों में आगे बदलाव हो सकते हैं। जुलाई-सितंबर 2026 तिमाही यानी वित्त वर्ष 2026-27 की दूसरी तिमाही के GDP अनुमान 30 नवंबर 2026 को जारी किए जाएंगे।