बाजार में दाम कम, सरकारी केंद्रों पर ही चना बेच रहे किसान, एमपी में प्रति किसान बिक्री की सीमा बढ़ी

चने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,230 रुपये प्रति क्विंटल है। राजस्थान की मंडियों में यह 4,300 से लेकर 4,825 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिक रहा है। वहीं मध्य प्रदेश में 4,580 से लेकर 4,710 रुपये क्विंटल बिक रहा है। जबकि उत्तर प्रदेश की मंडियों चने के भाव में तेजी देखी जा रही है। यहां चना 4,800 से लेकर 5,500 रुपये क्विंटल के हिसाब से बिक रहा है

बाजार में दाम कम, सरकारी केंद्रों पर ही चना बेच रहे किसान, एमपी में प्रति किसान बिक्री की सीमा बढ़ी

इस समय देश के अधिकांश राज्यों में गेहूं, चना सहित अन्य रबी फसलों की न्यूनतम समर्थन मूल्य पर खरीद का काम चल रहा है। गेहूं और सरसों किसानों को बाजार में मंडियों से अधिक दाम मिलने के वजह से सरकारी क्रय केन्द्रों पर किसान कम पहुंच रहे हैं। लेकिन चने के किसान अपनी उपज सरकारी क्रय केन्द्र पर ही बेच रहे हैं क्योंकि अन्य जगहों पर चना न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे बिक रहा है। 

चने का न्यूनतम समर्थन मूल्य 5,230 रुपये प्रति क्विंटल है। राजस्थान की मंडियों में यह 4,300 से लेकर 4,825 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से बिक रहा है। वहीं मध्य प्रदेश में 4,580 से लेकर 4,710 रुपये क्विंटल बिक रहा है। जबकि उत्तर प्रदेश की मंडियों चने के भाव में तेजी देखी जा रही है। यहां चना 4,800 से लेकर 5,500 रुपये क्विंटल के हिसाब से  बिक रहा है।

ग्राम गुलई जिला बुराहनपुर मध्य प्रदेश के  किसान सुभाष पाटिल ने 35 एकड़ में चने की फसल लगाई थी। उन्हें औसतन प्रति एकड़ आठ क्विंटल चने का उत्पादन मिला है। उन्होंने बताया कि इस बार चने का रेट बाजार में अभी 4,500 रुपये क्विंटल मिल  रहा है। इसलिए हम सरकारी क्रय केन्द्र पर बेच रहे हैं, क्योंकि वहां 5,230 रुपये प्रति क्विंटल के हिसाब से खरीदारी हो रही है।

मध्य प्रदेश में किसान मंडियों के बजाय सरकारी क्रय सेंटर पर ही चने की उपज बेच रहे हैं । लेकिन वहां पर एक किसान एक दिन में अधिकतम 25 क्विंटल चना ही बेच पाता था। इसे अब बढ़ाकर 40 क्विंटल कर दिया गया है। किसान अपनी ट्रॉली में 40 क्विंटल चना लाता था लेकिन 25 क्विंटल की सीमा के कारण किसानों को 15 क्विंटल चना वापस ले जाना पड़ता था। राज्य सरकार ने इस मुद्दे पर किसानों के विरोध को देखते हुए यह निर्णय लिया है। मध्य प्रदेश में अब किसान एमएसपी पर एक दिन में 40 क्विंटल तक चना बेच सकेगा। 

सुभाष पाटिल ने कहा कि हमें एक एकड़ चने की खेती में लगभग 20 से 25 हजार का खर्च आ जाता है। चने की फसल से हमें आशा थी कि बेहतर मूल्य मिलेंगे लेकिन वह नहीं मिल रहा है। इसलिए सरकार को चाहिए कि चना का एमएएसपी बढ़ाए जिससे किसानों को फाय़दा मिले तभी किसान चने की खेती करेंगे।

पिछले साल की तुलना में चने के रकबे में 4.57 लाख हेक्टेयर की वृद्धि हुई है। पिछले साल 110.38 लाख हेक्टेयर में चने की खेती की गई थी, इस साल 114.95 लाख हेक्टेयर में इसकी खेती की गई थी। इस वर्ष चने का रिकॉर्ड उत्पादन (2021-22 में) 1.31 करोड़ टन होने का अनुमान है। वर्ष 2020-21 में उत्पादन 1.19 करोड़ टन था। दरअसल, पिछले साल दालों की कीमतों में तेज उछाल को देखते हुए किसानों ने इस साल अधिक चने की खेती की थी।

पिछले साल सरकार ने दालों की कीमतों में तेजी को रोकने के लिए चने पर कई तरह की पाबंदियां लगाई थीं। 15 मई, 2021 से 31 अक्टूबर, 2021 तक 'मुक्त श्रेणी' के तहत अरहर, उड़द और मूंग के आयात की अनुमति भी दी गई थी। इसके बाद अरहर और उड़द के आयात की मुक्त व्यवस्था को 31 मार्च 2022 तक बढ़ा दिया गया।

भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) ने पिछले साल दिसंबर में दालों की कीमतों में वृद्धि को रोकने के लिए नेशनल कमोडिटी एंड डेरिवेटिव्स एक्सचेंज (एनसीडीईएक्स) पर चने के कारोबार पर कुछ प्रतिबंध लगाए और चना को वायदा कारोबार से हटा दिया गया। देश में 60 फीसदी से अधिक दाल उत्पादन रबी के मौसम में ही होता है। दालों के कुल उत्पादन में चने का हिस्सा लगभग 40 फीसदी है। इसके बाद अरहर 15 से 20 फीसदी है।

भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और आयातक है। यह दालों के वैश्विक उत्पादन में लगभग 24 फीसदी का योगदान देता है। वैश्विक खपत में इसकी हिस्सेदारी लगभग 27 फीसदी और आयात में 14 फीसदी है। पिछले पांच-छह वर्षों में देश में दालों का उत्पादन 1.4 करोड़ टन से बढ़कर 2.4 करोड़  टन हो गया है। अगर किसानों को दाल का उचित मूल्य नहीं मिला तो किसान दलहनी फसलों की बुआई कम करेंगे। अनुमान के मुताबिक साल 2050 तक देश में दालों की सालाना जरूरत करीब 3.2 करोड़ टन पहुंच जाएगी।