एथेनॉल खरीद नीति में संतुलन की मांग, IFGE ने अनाज और चीनी आधारित उद्योगों को समान अवसर देने की वकालत की
IFGE ने एथेनॉल खरीद नीति में दीर्घकालिक स्थिरता और अनाज आधारित व चीनी आधारित उद्योगों के बीच संतुलन की मांग की है। संगठन ने अनाज आधारित एथेनॉल के लिए प्रोत्साहन की समीक्षा, सी-हैवी शीरे से बने एथेनॉल का खरीद मूल्य बढ़ाने और चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य में संशोधन की वकालत की है।
इंडियन फेडरेशन ऑफ ग्रीन एनर्जी (IFGE) ने केंद्र सरकार से एथेनॉल खरीद के लिए दीर्घकालिक, संतुलित और पारदर्शी नीति बनाने की मांग की है। संगठन का कहना है कि देश के एथेनॉल ब्लेंडिंग कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए अनाज आधारित और चीनी आधारित, दोनों तरह के एथेनॉल उद्योगों के हितों की रक्षा करना जरूरी है। इसके साथ ही, अनाज आधारित एथेनॉल के लिए पुराने खरीद मूल्य और प्रोत्साहन जारी रखने तथा सी-हैवी शीरे से बनने वाले एथेनॉल का खरीद मूल्य बढ़ाने की जरूरत पर भी जोर दिया गया है।
IFGE के अनुसार, तेल विपणन कंपनियों (OMCs) की ओर से हाल में लगभग 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदने के लिए जारी टेंडर में गन्ने के रस और बी-हैवी शीरे से बनने वाले एथेनॉल को शामिल नहीं किया गया है। संगठन का मानना है कि खरीद नीति ऐसी होनी चाहिए, जो कच्चे माल की उपलब्धता के अनुरूप हो और किसी भी क्षेत्र में नीतिगत अनिश्चितता पैदा न करे।
IFGE ने कहा कि वर्ष 2026-27 के लिए अनाज आधारित एथेनॉल की खरीद को प्राथमिकता देने के सरकार के फैसले के पीछे गन्ने की पैदावार में कमी एक प्रमुख कारण है। हालांकि, संगठन ने मांग की है कि आने वाले सीजन में गन्ने की उपलब्धता के अनुसार खरीद की प्राथमिकताओं में बदलाव की गुंजाइश बनी रहनी चाहिए।
खरीद नीति की समीक्षा जरूरी
IFGE के महानिदेशक संजय गंजू ने कहा कि भारत के एथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम में अनाज आधारित और चीनी आधारित एथेनॉल, दोनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। नीतिगत फैसलों में दोनों क्षेत्रों को समान अवसर मिलने चाहिए। उन्होंने कहा कि अनाज की मौजूदा कीमतों और प्रति लीटर 3 रुपये के प्रोत्साहन में कटौती को देखते हुए खरीद नीति की समीक्षा जरूरी है। इससे अनाज आधारित एथेनॉल संयंत्रों की व्यावसायिक व्यवहार्यता बनाए रखने और एथेनॉल उत्पादन में निवेश को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी।
IFGE के शुगर बायोएनर्जी फोरम के चेयरमैन रवि गुप्ता ने कहा कि सी-हैवी शीरे से बनने वाला एथेनॉल महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसके उत्पादन में घरेलू खपत के लिए उपलब्ध चीनी का इस्तेमाल नहीं होता। इसके बावजूद, सी-हैवी शीरे से बनने वाले एथेनॉल का खरीद मूल्य 57.97 रुपये प्रति लीटर पर बना हुआ है। उन्होंने कहा कि गन्ने के उचित एवं लाभकारी मूल्य (FRP) और परिचालन लागत में वृद्धि के बावजूद इस खरीद मूल्य में बदलाव नहीं हुआ है। इसलिए इसकी समयबद्ध समीक्षा कर कीमत बढ़ाई जानी चाहिए, ताकि उत्पादन जारी रखने के लिए उद्योग को पर्याप्त आर्थिक प्रोत्साहन मिल सके और एथेनॉल की आपूर्ति बनी रहे।
चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य बढ़ाने की मांग
IFGE ने चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (MSP) में संशोधन की मांग भी की है। संगठन का कहना है कि चीनी उत्पादन की लागत बढ़ने के अनुरूप न्यूनतम बिक्री मूल्य में बदलाव जरूरी है। इससे चीनी मिलों की वित्तीय स्थिति मजबूत होगी और उन्हें गन्ना किसानों के भुगतान संबंधी दायित्वों को पूरा करने में मदद मिलेगी।
IFGE ने सरकार से ऐसी दीर्घकालिक, पूर्वानुमान योग्य और लागत आधारित नीति अपनाने की अपील की है, जिससे कच्चे माल की उपलब्धता के अनुसार खरीद व्यवस्था में लचीलापन बना रहे और देश के इथेनॉल उद्योग का सतत विकास सुनिश्चित हो सके। संगठन के मुताबिक, एथेनॉल नीति में घरेलू चीनी की उपलब्धता सुरक्षित रखने, अनाज आधारित एथेनॉल उत्पादन को समर्थन देने, चीनी मिलों और किसानों को उचित आर्थिक लाभ सुनिश्चित करने तथा एथेनॉल मूल्य शृंखला में निवेश बनाए रखने के बीच संतुलन होना चाहिए।

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