महाराष्ट्र में गन्ना किसानों का जल्दी पेराई का विरोध, चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 50 रुपये करने की मांग

महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ना किसान समय से पहले पेराई का विरोध कर रहे हैं। राजू शेट्टी के नेतृत्व में किसान एफआरपी 450 रुपये प्रति क्विंटल, 50 रुपये बोनस, चीनी का एमएसपी 50 रुपये प्रति किलो और सी-हैवी एथेनॉल की कीमत 70 रुपये प्रति लीटर करने की मांग कर रहे हैं।

महाराष्ट्र में गन्ना किसानों का जल्दी पेराई का विरोध, चीनी का न्यूनतम बिक्री मूल्य 50 रुपये करने की मांग
शुक्रवार को महाराष्ट्र के सतारा जिले के जरंडेश्वर में प्रदर्शन कर रहे किसानों को संबोधित करते राजू शेट्टी।

सरकार द्वारा चीनी की कीमतों पर अंकुश लगाने के लिए चीनी मिलों में जल्दी पेराई शुरू की कोशिश का महाराष्ट्र के गन्ना किसान विरोध कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि इस समय गन्ना पूरी तरह तैयार नहीं हुआ है। अभी कटाई करने पर किसानों को गन्ने के वजन का नुकसान होगा, वहीं चीनी मिलों को भी रिकवरी कम मिलेगी।

महाराष्ट्र के किसान संगठन स्वाभिमानी शेतकरी संघटना के अध्यक्ष राजू शेट्टी राज्य में गन्ना के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। गन्ने के फेयर एंड रिम्यूनेरेटिव प्राइस (एफआरपी) को 450 रुपये प्रति क्विंटल और सीजन के अंत में 50 रूपये के बोनस समेत 500 रुपये प्रति क्विंटल करने की मांग उनका संगठन कर रहा है। इसके साथ ही चीनी के न्यूनतम बिक्री मूल्य (एमएसपी) को 50 रुपये किलो करने और सी-हैवी मोलेसेस से बनने वाले एथेनॉल की कीमत 70 रुपये लीटर करने की मांग उन्होंने प्रधानमंत्री से की है।

राजू शेट्टी ने रूरल वॉयस के साथ बातचीत में कहा कि दो दिन पहले पुणे- बेंगलुरू हाइवे को जाम करने के बाद 20 अक्तूबर को कर्नाटक के हुबली में गन्ना किसानों का बड़ा प्रदर्शन होने वाला है, जो इन मांगों के लिए सरकार पर दबाव बनाएगा। उन्होंने कहा कि हमारी रणनीति उक्त मांगों के पूरा होने तक चीनी मिलों में पेराई को रोकना है।

शुक्रवार को उनके संगठन ने महाराष्ट्र के पूर्व उप मुख्यमंत्री अजित पवार के परिवार की सतारा जिले की जरंडेश्वर स्थित चीनी मिल पर प्रदर्शन किया। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र में कुछ मिलें चली हैं और उन्हें क्षमता से बहुत कम गन्ना मिल रहा है। हमने किसानों को समझाया है कि अभी गन्ने की कटाई से उन्हें 50 हजार रुपये प्रति एकड़ का नुकसान होगा।

महाराष्ट्र के चीनी उद्योग के सूत्रों ने रूरल वॉयस को बताया कि राज्य में अल नीनो के असर के चलते गन्ने की फसल सूखने लगी है। ऐसे में मिलों ने 15 अक्टूबर की निर्धारित तिथि के बजाय 8 अक्टूबर से ही मिलें चलाने का फैसला लिया था, ताकि गन्ना पूरी तरह सूखने से किसानों को नुकसान न हो और उनका इस्तेमाल पशु चारे में न करना पड़े। राज्य में पशु चारे की भी किल्लत है।

उक्त सूत्र के मुताबिक राज्य में 14 मिलों में पेराई शुरू हो गई थी और 40 चीनी मिलों ने पेराई की तैयारी कर ली थी। लेकिन दिल्ली में मंत्रियों के साथ बैठक में मुद्दों पर सहमति नहीं बनने पर किसान नेताओं ने इस बैठक के तुरंत बाद किसानों को तुरंत आंदोलन शुरू करने के लिए कह दिया। ऐसे में जहां बाकी चीनी मिलों ने पेराई का फैसला टाल दिया, वहीं जो मिलें चल रही हैं, किसान संगठन उनको भी बंद करा रहे हैं।

राजू शेट्टी के आंदोलन का असर दोनों राज्यों के बड़ा गन्ना उत्पादन क्षेत्र में है। इसमें कर्नाटक के बेलगाम, धारवाड़, बागलकोट और बीजापुर जिले तथा महाराष्ट्र के पुणे, सतारा, कोल्हापुर, सांगली, सोलापुर, बारामती और लातूर शामिल हैं। उनका कहना है कि चीनी की किल्लत है और अगर उत्पादन में देरी होगी तो यह कमी बढ़ेगी। ऐसे में हमारी कोशिश दबाव बढ़ाने की है ताकि सरकार गन्ना किसानों की मांग पर अमल करे।

पिछले दिनों शेट्टी और कर्नाटक राज्य रैयत संघ के कुछ किसान केंद्रीय खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रह्लाद पटेल और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ बैठक कर चुके हैं।

केंद्र सरकार द्वारा नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रोफेसर रमेश चंद की अध्यक्षता में गठित समिति के बारे में उन्होंने कहा कि अभी समिति बनी है और उसकी रिपोर्ट आने में समय लगेगा। इसलिए हमारी मांगों पर पेराई सीजन के पहले ही फैसला लेने के लिए हम आंदोलन कर रहे हैं।

चीनी के एमएसपी और सी-हैवी एथेनॉल की कीमत में बढ़ोतरी के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लिखे पत्र में उन्होंने कहा है कि सहकारी चीनी मिलों के राष्ट्रीय फेडरेशन, निजी चीनी मिलों के संगठन इस्मा और महाराष्ट्र की निजी चीनी मिलों के संगठन मिस्मा की गणना के मुताबिक चीनी की उत्पादन लागत 48 रुपये प्रति किलो आ रही है। ऐसे में चीनी का एमएसपी अगर 50 रुपये किलो होगा तभी मिलों को फायदा होगा। महाराष्ट्र में सहकारी चीनी मिलों की बड़ी तादाद है। ऐसे में चीनी और एथेनॉल के अधिक दाम किसानों के लिए जरूरी हैं।

 

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