जुलाई में भारत का ऑयल मील निर्यात 65 प्रतिशत गिरा, सोयामील निर्यात में 90% गिरावट

जुलाई 2026 में भारत का ऑयल मील निर्यात 65 प्रतिशत और अप्रैल-जुलाई के दौरान 27 प्रतिशत घट गया। घरेलू कीमतों में तेजी, सोयामील की अंतरराष्ट्रीय बाजार में कम प्रतिस्पर्धी क्षमता और लाल सागर में शिफिंग संबंधी बाधाओं से निर्यात प्रभावित हुआ। हालांकि, चीन, बांग्लादेश और वियतनाम को रेपसीड मील का निर्यात बढ़ा।

जुलाई में भारत का ऑयल मील निर्यात 65 प्रतिशत गिरा, सोयामील निर्यात में 90% गिरावट
सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) ने भारत से ऑयल मील निर्यात के अनंतिम संकलित आंकड़े जारी किए हैं। इनके अनुसार, जुलाई 2026 में ऑयल मील का निर्यात काफी घटा। अप्रैल-जुलाई 2026 की चार महीने की अवधि में भी निर्यात में गिरावट दर्ज की गई है।
जुलाई 2026 में कुल ऑयल मील निर्यात 65 प्रतिशत घटकर 1,48,609 टन रह गया, जबकि पिछले वर्ष इसी महीने में यह 4,22,388 टन था। वित्त वर्ष 2026-27 के पहले चार महीनों में कुल निर्यात 11,05,833 टन रहा, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 15,16,981 टन की तुलना में 27 प्रतिशत कम है।
कुल निर्यात में इस तेज गिरावट की प्रमुख वजह भारतीय सोयामील के निर्यात में भारी कमी रही। जुलाई 2026 में सोयामील का निर्यात पिछले वर्ष की समान अवधि के मुकाबले लगभग 90 प्रतिशत गिर गया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में भारतीय सोयामील को कीमतों के मोर्चे पर कठिन प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ा। भारतीय सोयामील की कीमत लगभग 613 अमेरिकी डॉलर प्रति टन थी, जबकि वैश्विक बाजार में इसकी कीमत के मानक लगभग 428 डॉलर प्रति टन थे।
कीमतों में इस अंतर के कारण अर्जेंटीना और ब्राजील से मिलने वाले सस्ते विकल्पों की तुलना में भारतीय सोयामील प्रतिस्पर्धी नहीं रह गया। इसके अलावा, पोल्ट्री और पशु आहार क्षेत्र से घरेलू मांग मजबूत रहने के कारण निर्यात के लिए उपलब्ध अतिरिक्त मात्रा भी सीमित हो गई।
लाल सागर में जारी शिपिंग संबंधी बाधाओं ने भी निर्यात को प्रभावित किया। इसके चलते जहाजों को लंबे मार्गों से गुजरना पड़ा, जिसस समुद्री माल ढुलाई की लागत बढ़ी और यूरोप तथा पश्चिम एशिया के बाजारों तक माल पहुंचाने में अधिक समय लगा।
कुल निर्यात में गिरावट के बावजूद रेपसीड मील के निर्यात ने इस क्षेत्र को कुछ राहत दी। एशिया के प्रमुख बाजारों में इसकी मांग बनी रहने से निर्यात को समर्थन मिला।
अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान चीन भारतीय ऑयल मील का सबसे बड़ा खरीदार बना रहा। चीन ने 3,55,482 टन ऑयल मील का आयात किया, जो पिछले वर्ष की समान अवधि के 2,83,648 टन से 25.32 प्रतिशत अधिक है।
बांग्लादेश 1,72,852 टन के आयात के साथ दूसरा सबसे बड़ा बाजार रहा। वहां निर्यात में सालाना आधार पर 17.18 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वियतनाम ने भी आयात बढ़ाया। उसने 1,08,098 टन ऑयल मील खरीदा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 42.42 प्रतिशत अधिक है। इसके विपरीत, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड को होने वाले निर्यात में क्रमशः 31.30 प्रतिशत और 43.65 प्रतिशत की गिरावट आई।
आगे निर्यात का प्रदर्शन काफी हद तक घरेलू कीमतों की स्थिरता, अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी कीमतों और प्रमुख समुद्री मार्गों पर जारी लॉजिस्टिक्स संबंधी बाधाओं के समाधान पर निर्भर करेगा।

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