चीनी मिलों को अक्टूबर का उत्पादन नवंबर तक बेचने की अनुमति, अधिसूचना जारी
त्योहारी मांग के बीच चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए सरकार ने मिलों को अक्टूबर में उत्पादित चीनी नवंबर तक बेचने की अनुमति दी है। चीनी उत्पादन लगातार दूसरे वर्ष घटने की आशंका है।
त्योहारों के दौरान अधिक मांग को देखते हुए सरकार ने चीनी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए एक और निर्णय लिया है। जो मिलें इस माह गन्ने की पेराई कर रही हैं, वे इस माह उत्पादन होने वाली चीनी को नवंबर तक बेच सकेंगी।
उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक मंत्रालय की तरफ से जारी अधिसूचना में कहा गया है कि चीनी मिलों में अक्तूबर माह में जितनी चीनी का उत्पादन होगा, मिलें उसे अक्तूबर और नवंबर में बेच सकेंगी। यह इन महीनों के लिए निर्धारित मासिक कोटे के अतिरिक्त होगा।
लगातार दूसरे साल चीनी उत्पादन घटने के आसार
30 सितंबर को खत्म चीनी वर्ष 2025-26 में उत्पादन 343 लाख टन के पुराने अनुमान की तुलना में सिर्फ 306 लाख टन रहा है। अमेरिकी कृषि मंत्रालय ने अल नीनो और बारिश की कमी को देखते हुए वर्ष 2026-27 के लिए भी चीनी उत्पादन का अनुमान 336 लाख टन से घटाकर 295 लाख टन कर दिया है।
उपलब्धता की कमी के कारण घरेलू बाजार में चीनी के दाम भी बढ़े हैं। खुदरा बाजार में चीनी के दाम इस समय 60 रुपये किलो के आसपास चल रहे हैं। कीमतें नियंत्रित करने के लिए सरकार ने मिलों से 15 अक्तूबर से गन्ने की पेराई शुरू करने को कहा था, लेकिन बहुत कम मिलों ने ऐसा किया है। आम तौर पर गन्ने की पेराई नवंबर में शुरू होती है।
गन्ना किसानों की मांगों पर विचार के लिए समिति
इस बीच, केंद्र सरकार ने गन्ना किसानों की समस्याओं और चीनी उद्योग से जुड़े विभिन्न मुद्दों की समीक्षा करने के लिए नीति आयोग के पूर्व सदस्य प्रो. रमेश चंद की अध्यक्षता में एक समिति का गठन किया है। समिति गन्ना किसानों की मांगों पर विचार करेगी और उनकी समस्याओं के समाधान के लिए उपयुक्त उपाय सुझाएगी। हालांकि किसान संगठन और उद्योग, दोनों की मांग है कि इसमें उनके प्रतिनिधियों को भी शामिल किया जाए।
समिति में कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के कृषि आयुक्त, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग के संयुक्त सचिव (चीनी) और उपभोक्ता मामले विभाग के संयुक्त सचिव (विधिक माप विज्ञान) सदस्य के रूप में शामिल हैं।

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