मध्य प्रदेश में मूंग खरीद जांच के घेरे में, जिन किसानों ने मूंग नहीं उगाई, उनके नाम पर हुई खरीद
मध्य प्रदेश के रायसेन में MSP पर मूंग खरीद में कथित फर्जीवाड़ा सामने आया है। सहकारी समितियों के ऑपरेटरों ने किसानों की जमीन के रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर फर्जी पंजीयन किए और स्थानीय बाजार से सस्ती मूंग खरीदकर सरकारी केंद्रों पर MSP पर बेच दी। आर्थिक अपराध शाखा ने केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
मध्य प्रदेश के रायसेन जिले में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर मूंग की सरकारी खरीद में कथित फर्जीवाड़े का मामला सामने आया है। आर्थिक अपराध शाखा (EOW) ने इस मामले में 8 सितंबर 2026 को एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
आरोप है कि ऐसे किसानों से मूंग की खरीद की गई, जिन्होंने न तो मूंग की फसल उगाई और न ही सरकार को मूंग बेचने के लिए पंजीकरण कराया था। कई सहकारी समिति में कार्यरत कंप्यूटर ऑपरेटरों ने किसानों के लैंड रिकॉर्ड का इस्तेमाल कर फर्जी पंजीयन कराए। इसके बाद खुले बाजार से कम कीमत पर मूंग खरीदकर किसानों के नाम पर सरकारी खरीद केंद्रों में एमएसपी पर बेच दिया।
यह मामला रायसेन जिला सहकारी बैंक की बाड़ी शाखा के तहत आने वाली तीन कृषक सेवा सहकारी समितियों देहरी कला, भारकच्छ कला और गूगलवाड़ा से जुड़ा है। कथित फर्जीवाड़ा मूंग खरीद सीजन 2024-25 और 2025-26 से संबंधित है। यह मामला ऐसे समय सामने आया है, जब मूंग की कीमतों में गिरावट से किसान परेशान हैं और सरकारी खरीद को लेकर किसानों को विरोध-प्रदर्शन करने पड़ रहे हैं।
मामला तब सामने आया, जब एक किसान ने ऐसे दस्तावेजों में अपना नाम देखा, जिनके लिए उसने कभी पंजीयन नहीं कराया था। इसके बाद शिकायत EOW तक पहुंची और जमीन के रिकॉर्ड, किसानों के बयान तथा सहकारिता विभाग की पूर्व जांचों के आधार पर मामले की पड़ताल आगे बढ़ी।
बाजार से सस्ती मूंग खरीदकर MSP पर बेची
यह कथित फर्जीवाड़ा सरकारी खरीद व्यवस्था की एक अहम कमजोर कड़ी को भी सामने लाता है। आरोपियों ने किसानों के खेत से मूंग खरीदने के बजाय स्थानीय बाजार, व्यापारियों और बरेली मंडी से कम कीमत पर मूंग खरीदी। इसके बाद फर्जी पंजीयन के आधार पर उसी मूंग को सरकारी खरीद केंद्रों पर किसानों की उपज के रूप में ऊंचे एमएसपी पर बेच दिया गया। तीन आरोपियों से जुड़े मामलों में कुल करीब 13.35 लाख रुपये के अनुचित लाभ और लगभग इतनी ही राशि के सरकारी नुकसान का अनुमान है।
किसानों को उनके नाम और जमीन का इस्तेमाल किए जाने की जानकारी ही नहीं थी। कई किसानों ने जांच में बताया कि उन्होंने संबंधित पंजीयन नहीं कराया था और न ही इसके लिए सहमति दी थी। कथित बिक्री से कोई रकम भी उन्हें प्राप्त नहीं हुई। कुछ मामलों में पंजीयन से जुड़े बैंक खाते भी संबंधित जमीन मालिक किसानों के नहीं पाए गए।
सहकारिता विभाग ने भी कराई जांच
EOW की जांच शुरू होने से पहले सहकारिता विभाग की ओर से भी इन आरोपों की दो बार जांच की गई थी। दोनों जांचों में पंजीयन प्रक्रिया में अनियमितताएं सामने आई थीं और कार्रवाई की सिफारिश की गई थी। अक्टूबर 2025 में रायसेन के उप आयुक्त, सहकारिता के आदेश पर कराई गई जांच के आधार पर एक कंप्यूटर ऑपरेटर को सेवा से बर्खास्त किया गया। मई 2026 में दूसरी शिकायत के बाद एक और जांच कराई गई। इस जांच में पाया गया कि सहकारी समिति के ऑपरेटर और एक कर्मचारी ने अवैध तरीके से पंजीकरण किए थे।

Join the RuralVoice whatsapp group



















