लखनऊ में गन्ना संस्थान का गेट बंद मिला तो धरने पर बैठे राकेश टिकैत, आज किसान मजदूर महापंचायत
लखनऊ में किसान मजदूर महापंचायत से पहले गन्ना संस्थान का गेट बंद मिलने पर राकेश टिकैत और किसान नेताओं ने धरना दिया। कुछ घंटे बाद गेट खुला। शुक्रवार की किसान पंचायत में गन्ना मूल्य, बकाया भुगतान, धान खरीद और भूमि मुआवजे के मुद्दे उठाए।
भारतीय किसान यूनियन (भाकियू) के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत और अन्य किसान नेताओं ने गुरुवार शाम लखनऊ के डालीबाग स्थित गन्ना संस्थान के गेट पर धरना दिया। शुक्रवार, 23 अक्टूबर को प्रस्तावित किसान मजदूर महापंचायत की तैयारियों के लिए पहुंचे टिकैत और उनके समर्थकों को संस्थान के गेट पर ताला लगा मिला। इससे नाराज किसान नेता प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए धरने पर बैठ गए और परिसर में प्रवेश की मांग की। टिकैत ने कहा कि जब तक गन्ना संस्थान का गेट नहीं खोला जाएगा, तब तक धरना जारी रहेगा। करीब दो घंटे चले धरने के बाद संस्थान का गेट खोल दिया गया।
शुक्रवार को प्रस्तावित भाकियू की किसान मजदूर पंचायत में गन्ने का मूल्य बढ़ाने, बकाया भुगतान, धान खरीद केंद्रों के सुचारु संचालन और विकास परियोजनाओं के लिए अधिग्रहीत जमीन का उचित मुआवजा देने सहित किसानों से जुड़े विभिन्न मुद्दे उठाए जाने हैं।
कल के हंगामे के बाद आज गन्ना संस्थान परिसर में ही भाकियू की किसान मजदूर महापंचायत आयोजित की गई, जिसके प्रदेश के विभिन्न जिलों के किसान पहुंचे। इस दौरान राकेश टिकैत ने स्पष्ट कहा कि जब तक किसानों के प्रतिनिधिमंडल की वार्ता प्रमुख सचिव से नहीं हो जाती, तब तक जिलों में चल रहे धरने समाप्त नहीं होंगे।

राकेश टिकैत ने गन्ने का रेट 600 रुपये प्रति क्विंटल से अधिक करने की मांग करते हुए कहा कि लागत और चीनी मिलों की कमाई को देखते हुए किसानों को बहुत कम दाम मिल रहा है। कई चीनी मिलों से पिछले पेराई सत्र का भुगतान भी किसानों को मिलना बाकी है। उन्होंने किसानों का बकाया भुगतान तत्काल जारी करने की मांग उठाई।
टिकैत ने धान की खरीद का मुद्दा उठाते हुए कहा कि धान की खरीद नहीं होने से किसान परेशान है और करीब एक हजार रुपये कम कीमत पर धान बिक रहा है। उन्होंने धान खरीद सुनिश्चित करने और भुगतान तत्काल कराने की मांग की। उन्होंने इस पर भी आपत्ति जताई कि जमीन का अधिग्रहण अभी हो रहा है, लेकिन मुआवजा वर्ष 2013 की सर्किल दरों के आधार पर तय किया जा रहा है। टिकैत ने बिजली से जुड़े मुद्दे भी उठाए और कहा कि किसानों की बैठक के बाद अधिकारियों से चर्चा की जाएगी।
टिकैत ने आरोप लगाया कि सरकार आम लोगों के हितों के मुकाबले उद्योगपतियों और बड़े कारोबारी समूहों के हितों को प्राथमिकता दे रही है। उनके मुताबिक, जब सरकार आम लोगों की समस्याएं नहीं सुनती, तो उन्हें धरना-प्रदर्शन करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि गन्ना संस्थान के गेट पर ताला लगाकर किसानों की महापंचायत रोकने की कोशिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

Join the RuralVoice whatsapp group



















