वैश्विक कृषि-खाद्य प्रणालियों की सुरक्षा के लिए वन पुनरुद्धार अत्यंत आवश्यक: एफएओ रिपोर्ट

एफएओ (FAO) की 'स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स फॉरेस्ट्स 2026' रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि वैश्विक भूमि क्षरण से निपटने के लिए वनों और लैंडस्केप का पुनरुद्धार (restoration) अत्यंत आवश्यक है। 1.56 अरब हेक्टेयर से अधिक भूमि क्षरित होने के बीच, यह पुनरुद्धार निवेश किए गए प्रत्येक 1 डॉलर पर 30 डॉलर तक का रिटर्न देगा। रिपोर्ट में वैश्विक संरक्षण रूपरेखा के तहत भारत की देसी बीज प्रणालियों और कृषि-वानिकी रणनीतियों को भी रेखांकित किया गया है।

वैश्विक कृषि-खाद्य प्रणालियों की सुरक्षा के लिए वन पुनरुद्धार अत्यंत आवश्यक: एफएओ रिपोर्ट

खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) ने सोमवार को 'द स्टेट ऑफ द वर्ल्ड्स फॉरेस्ट्स (SOFO) 2026' रिपोर्ट जारी की। इसके अनुसार, वैश्विक खाद्य प्रणालियों को सुरक्षित करने, जैव विविधता के नुकसान से निपटने और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करने के लिए वन और लैंडस्केप पुनरुद्धार (FLR) एक अनिवार्य आर्थिक और पर्यावरणीय निवेश है।   

रोम में वानिकी समिति के 28वें सत्र (COFO 28) के दौरान जारी इस रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि दुनिया भर में 1.56 अरब हेक्टेयर से अधिक भूमि क्षरित हो चुकी है, जिसमें 46 करोड़ हेक्टेयर वन पारिस्थितिकी तंत्र शामिल हैं। 1990 से 2025 के बीच कृषि विस्तार, जनसंख्या वृद्धि और प्राकृतिक संसाधनों की बढ़ती मांग के कारण 48.9 करोड़ हेक्टेयर वन नष्ट हो गए। इस दिशा में कार्रवाई न करने से वैश्विक अर्थव्यवस्था को प्रतिवर्ष 878 अरब डॉलर से लेकर 6.3 ट्रिलियन डॉलर तक का भारी नुकसान हो रहा है।

एफएओ के महानिदेशक क्यू डोंगयु (QU Dongyu) ने जोर देकर कहा कि वन पुनरुद्धार ग्रामीण विकास और खाद्य सुरक्षा के लिए एक रणनीतिक आवश्यकता है, क्योंकि वैश्विक आबादी का लगभग एक-तिहाई हिस्सा अपनी आजीविका के लिए वनों पर निर्भर है। अनुकूल परिस्थितियों में, यह पुनरुद्धार निवेश किए गए प्रत्येक एक डॉलर पर 30 डॉलर तक का रिटर्न प्रदान करता है। वहीं, सूखा और भूमि क्षरण को रोकने के लिए 15 वर्षों में 2.6 ट्रिलियन डॉलर का निवेश आठ गुना लाभ दे सकता है।   

बीज प्रणालियों और कृषि-वानिकी पर भारत का रणनीतिक ध्यान

रिपोर्ट में भारत और दक्षिण एशिया के महत्वपूर्ण पुनरुद्धार ढांचे को रेखांकित किया गया है। इसमें भारत द्वारा देसी वृक्ष बीज प्रणालियों को मजबूत करने के प्रयासों के बारे में बताया गया है, ताकि केवल एक ही प्रजाति के वृक्षारोपण (monoculture) पर निर्भर रहने के बजाय उच्च गुणवत्ता और जलवायु-अनुकूल पारिस्थितिक पुनरुद्धार सुनिश्चित किया जा सके। कुनमिंग-मॉन्ट्रियल वैश्विक जैव विविधता ढांचा (KMGBF) के लक्ष्य 2 और 10 के साथ भारत की सक्रिय सहभागिता, क्षरित पारिस्थितिक तंत्र को बहाल करने और टिकाऊ भूमि प्रबंधन को बढ़ावा देने की उसकी प्रतिबद्धता को मजबूत करती है।

इसके अलावा दक्षिण एशियाई कृषि लैंडस्केप, विशेष रूप से भारत में, कृषि-वानिकी (agroforestry) और एकीकृत भूमि-उपयोग प्रणालियों को उत्कृष्ट मॉडल के रूप में प्रस्तुत किया गया है। ये पद्धतियां स्थानीय खाद्य उत्पादन को बनाए रखते हुए मिट्टी के जैविक तत्वों में सुधार करती हैं, सूक्ष्मजीव स्वास्थ्य को बढ़ाती हैं और क्षरित चरागाहों व कृषि योग्य भूमि को पुनर्जीवित करती हैं।   

वैश्विक संकल्पों (91 देशों में 19 करोड़ हेक्टेयर से अधिक) और धरातल पर होने वाले क्रियान्वयन के बीच के अंतर को पाटने के लिए रिपोर्ट में चार मार्ग बताए गए हैं- लोगों के अधिकारों को प्राथमिकता देना, लैंडस्केप स्तर पर योजना बनाना, दीर्घकालिक वित्त जुटाना और नीतिगत सामंजस्य सुनिश्चित करना। इसमें कहा गया है कि 2030 तक टिकाऊ परिणाम प्राप्त करना केवल वृक्षारोपण के लक्ष्यों से आगे बढ़कर विज्ञान-आधारित और समुदाय-केंद्रित पुनरुद्धार अपनाने पर निर्भर करेगा। 

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