उत्तर प्रदेश में भारी बारिश से खरीफ फसलों पर मार, एक दिन में सामान्य से 25 गुना अधिक बारिश, कई जिलों में बाढ़ के हालात

उत्तर प्रदेश में मानसून की विदाई से पहले हुई भारी बारिश ने खरीफ फसलों पर बड़ी मार की है। कई जिलों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति बनी है। अब किसानों के सामने खरीफ फसल बचाने के साथ रबी की समय पर बुवाई की चुनौती भी है।

उत्तर प्रदेश में भारी बारिश से खरीफ फसलों पर मार, एक दिन में सामान्य से 25 गुना अधिक बारिश, कई जिलों में बाढ़ के हालात

उत्तर प्रदेश में पिछले तीन-चार दिनों के दौरान हुई भारी बारिश से कई जिलों में बाढ़ के हालात पैदा हो गए हैं। मानसून सीजन के आखिर में अचानक हुई बारिश ने खरीफ की तैयार फसलों को बड़ा झटका दिया है। आंधी-तूफान के साथ लगातार बारिश से धान और गन्ने की खड़ी फसल खेतों में गिर गई हैं, जबकि जलभराव से दलहन, तिलहन, मक्का, बाजरा और बागवानी फसलों को नुकसान पहुंचा है। साथ ही, खेतों से पानी नहीं निकलने की स्थिति में रबी की बुवाई में भी देरी हो सकती है।

मौसम विभाग के अनुसार, 27 सितंबर को उत्तर प्रदेश में औसतन 45.6 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य बारिश 1.8 मिलीमीटर की तुलना में करीब 25 गुना अधिक है। राज्य में 25 से 27 सितंबर के बीच औसतन 66.5 मिलीमीटर बारिश हुई, जबकि इस अवधि में सामान्य बारिश 7.6 मिलीमीटर होती है। यह सामान्य से 775 प्रतिशत यानी करीब आठ गुना अधिक है। राज्य के 75 में से 56 जिलों में सामान्य से ‘बहुत अधिक’ बारिश दर्ज की गई। बारिश और बाढ़ से सर्वाधिक प्रभावित जिलों में फर्रुखाबाद, कन्नौज, शाहजहांपुर, हमीरपुर और महोबा शामिल हैं।

प्रदेशभर में बीते दिनों हुई जोरदार बारिश ने मानसून सीजन के दौरान बारिश की कमी को आठ फीसदी की बढ़त में बदल दिया है। एक जून से 28 सितंबर तक यूपी में कुल 802 मिलीमीटर बारिश हुई, जो सामान्य से 8 फीसदी अधिक है। पूर्वी यूपी में सामान्य से 3 फीसदी अधिक और पश्चिमी यूपी में सामान्य से 17 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है।

बारिश का असमान वितरण 

पूरे प्रदेश में बारिश के वितरण में काफी असमानता रही है। सबसे अधिक बारिश संभल में 97 फीसदी, महोबा में 89 फीसदी और हमीरपुर में 85 फीसदी अधिक हुई, जबकि देवरिया में सामान्य से 68 फीसदी, शामली में 67 फीसदी और कुशीनगर में 61 फीसदी कम बारिश हुई। पश्चिमी यूपी के संभल और शामली जिलों के बीच बारिश में कई गुना अंतर देखने को मिला। इसी तरह, बांदा में सामान्य से 77 फीसदी अधिक, जबकि कुशीनगर में 61 फीसदी कम बारिश हुई। अक्सर सूखे की मार झेलने वाले बुंदेलखंड क्षेत्र में इस साल सबसे अधिक बारिश हुई है। यहां कई जिलों में सामान्य से 70 फीसदी से अधिक बारिश दर्ज की गई है।

81 मौतें, 62 घायल और 2,254 मकानों को नुकसान

उत्तर प्रदेश में 25 से 27 सितंबर के बीच बारिश से जुड़े हादसों में कम से कम 81 लोगों की मौत हुई और 62 लोग घायल हुए। 154 पशुओं की मौत की भी सूचना है और 2,254 मकानों को नुकसान पहुंचा है। सीतापुर में सबसे अधिक सात मौतें दर्ज की गईं, जबकि लखीमपुर खीरी, बहराइच और बलरामपुर में पांच-पांच लोगों की मौत हुई। अयोध्या, महाराजगंज और गोरखपुर में चार-चार मौतें दर्ज की गईं।

उत्तराखंड और नेपाल में जारी भारी बारिश के कारण तराई के जिलों में नदियां उफान पर हैं और आसपास के इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।

धान और गन्ने पर सबसे ज्यादा असर

बारिश ऐसे समय हुई है जब उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में धान की फसल पकने और कटाई के करीब पहुंच चुकी है। लगातार बारिश और तेज हवाओं से धान और गन्ने की फसल खेतों में बिछ गई है। मक्का, बाजरा और दलहन फसलों को भी नुकसान पहुंचा है। बागवानी फसलों पर भी मौसम की मार पड़ी है। जहां धान की फसल पक चुकी है, वहां खेतों में पानी भरने से कटाई रुक गई है। राजस्व, कृषि विभाग और बीमा कंपनी के अधिकारियों की टीमें फसल नुकसान का आकलन कर रही हैं।

गंगा और उसकी सहायक नदियों का जलस्तर बढ़ने के कारण हजारों हेक्टेयर कृषि भूमि के जलमग्न होने की खबर है। वहीं, बाढ़ और जलभराव वाले अन्य इलाकों में भी खेतों में खड़ी फसलें डूबने की रिपोर्ट आई है। कृषि विभाग के मुताबिक, प्रदेश के विभिन्न जनपदों में भारी वर्षा से प्रभावित फसलों की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण एवं क्षति का आकलन किया जा रहा है। 

किसानों के सामने अब दोहरी चुनौती

मौजूदा बारिश ने किसानों के सामने केवल खड़ी खरीफ फसल बचाने की चुनौती नहीं खड़ी की है, बल्कि आगामी रबी सीजन पर भी असर का खतरा पैदा किया है। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से मिट्टी में नमी बहुत अधिक हो सकती है और खेतों की तैयारी में समय लग सकता है। ऐसे में गेहूं, सरसों, चना और अन्य रबी फसलों की समय पर बुवाई प्रभावित हो सकती है।

तुरंंत दें फसल नुकसान की जानकारी 

कृषि विभाग ने किसानों से अपील की है कि यदि उनकी फसल असामयिक बारिश, तेज हवाओं या जलभराव से प्रभावित हुई है, तो समय रहते फसल क्षति की सूचना दर्ज कराएं और आवश्यक प्रक्रिया पूरी करें। किसानों को सलाह दी गई है कि क्षतिग्रस्त फसल और खेत की स्थिति के फोटो तथा अन्य आवश्यक रिकॉर्ड सुरक्षित रखें। साथ ही, संबंधित कृषि विभाग के अधिकारियों से सर्वेक्षण और क्षति आकलन की जानकारी प्राप्त करें। किसानों को 72 घंटे के भीतर फसल क्षति की सूचना दर्ज कराने की सलाह दी गई है।

फसल बीमा टोल-फ्री नंबर: 14447

किसान कॉल सेंटर: 0522-2317003

वाट्स ऐप नंबर : 7065514447

किसान शिकायत दर्ज कराते समय अपना नाम, ग्राम पंचायत, विकासखंड एवं तहसील का विवरण अवश्य दें। फसल क्षति की सूचना समय पर दर्ज कराने से संबंधित प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में सहायता मिलेगी। 

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