ज्वार से स्मार्ट खेती तक, जानिए कैसे कृषि में AI का विस्तार करने जा रहा है गूगल
गूगल भारत में कृषि, शिक्षा और छोटे कारोबारों के लिए AI आधारित पहलों का विस्तार कर रहा है। इसमें जलवायु-अनुकूल फसलों के अनुसंधान, किसानों को डिजिटल कृषि सलाह और शिक्षकों के प्रशिक्षण पर जोर रहेगा।
गूगल ने भारत में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के व्यावहारिक उपयोग को बढ़ावा देने के लिए कृषि अनुसंधान, किसानों को सेवाएं, शिक्षा और छोटे कारोबारों से जुड़ी कई नई पहलों की घोषणा की है। इन पहलों में जलवायु-अनुकूल फसलों के विकास के लिए AI आधारित अनुसंधान, कृषि संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने वाले मॉडल का विस्तार, शिक्षकों का प्रशिक्षण और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSME) को सहयोग देने के लिए 1.5 करोड़ डॉलर की फंडिंग शामिल हैं।
गूगल इंडिया की उपाध्यक्ष और कंट्री मैनेजर प्रीति लोबाना तथा गूगल की ग्लोबल चीफ AI रेडीनेस ऑफिसर लीला इब्राहिम ने इन पहलों की जानकारी दी। कंपनी का उद्देश्य अनुसंधान संस्थानों, सरकारी एजेंसियों और जमीनी स्तर पर काम करने वाले संगठनों के साथ साझेदारी के माध्यम से AI का लाभ भारत के विकास के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्रों तक पहुंचाना है।
जलवायु-अनुकूल फसलों के अनुसंधान में AI
इस पहल के तहत गूगल डीपमाइंड और गूगल डॉट ओआरजी का AI कोलैबोरेटिव फॉर फूड सिक्योरिटी, हैदराबाद स्थित इंटरनेशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर द सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स (ICRISAT), हडसनअल्फा इंस्टीट्यूट फॉर बायोटेक्नोलॉजी और अमेरिका के सिएटल स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के डिपार्टमेंट ऑफ जीनोम साइंसेज के साथ मिलकर काम करेगा।
इस साझेदारी के तहत ज्वार की आनुवंशिक विशेषताओं का एक खुली पहुंच वाला वैश्विक डेटाबेस तैयार किया जाएगा। इसके लिए उन्नत आनुवंशिक विश्लेषण और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल होगा। यह पहल ICRISAT के जीन बैंक में मौजूद 90 से अधिक देशों के 44,000 से ज्यादा विशिष्ट बीज संग्रहों के प्रतिनिधि नमूने पर आधारित होगी। इनमें भारत की किस्में भी शामिल हैं।
AI आधारित यह आनुवंशिक सूची शोधकर्ताओं और फसल ब्रीडर को बेहतर आनुवंशिक संयोजनों की पहचान करने तथा अधिक उत्पादक और जलवायु-अनुकूल किस्में विकसित करने में मदद करेगी। इससे पारंपरिक प्रजनन प्रक्रियाओं में लगने वाला समय कम करने में भी मदद मिल सकती है, जिनमें वर्षों तक परीक्षण करने पड़ते हैं।
गूगल डीपमाइंड ICRISAT में तीन साल की पोस्टडॉक्टोरल फेलोशिप को भी सहयोग देगा। यह भारत में और ब्रिटेन के बाहर गूगल डीपमाइंड की पहली ऐसी फेलोशिप होगी। इसके तहत चना, मूंगफली और अरहर जैसी अन्य महत्वपूर्ण फसलों के जीनोम की विशेषताओं का विश्लेषण करने वाले उपकरण विकसित करने पर भी काम होगा।
ICRISAT के उप महानिदेशक (अनुसंधान एवं नवाचार) डॉ. स्टैनफोर्ड ब्लेड ने कहा, “हम गूगल के साथ साझेदारी करने और शुष्क भूमि की कृषि को बदलने के मिशन में AI की क्षमता का उपयोग करने को लेकर उत्साहित हैं।”
उन्होंने कहा कि यह सहयोग ज्वार जैसी स्थानीय जलवायु-अनुकूल फसलों की वैश्विक क्षमता का उपयोग करने और खाद्य सुरक्षा मजबूत करने वाले आधुनिक उपकरण विकसित करने में मदद कर सकता है। इससे वर्तमान और आने वाली पीढ़ियों की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रयासों को भी बल मिलेगा। यह पहल भारत में मोटे अनाज को कृषि लचीलेपन के महत्वपूर्ण आधार के रूप में बढ़ावा देने की दिशा से भी जुड़ी है।
किसानों के लिए AI आधारित कृषि सेवाओं का विस्तार
गूगल अपने एग्रीकल्चरल अंडरस्टैंडिंग मॉडल तक पहुंच का विस्तार कर रहा है। इन्हें सार्वजनिक पूर्वावलोकन (पब्लिक प्रीव्यू) के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है, ताकि डेवलपर, स्टार्टअप और शोधकर्ता स्थानीय जरूरतों के अनुरूप कृषि समाधान विकसित कर सकें। कंपनी के अनुसार, उसकी एंथ्रो कृषि टीम के भारत में विकसित कृषि मॉडल अब 11 देशों में भी उपयोगी जानकारियां उपलब्ध करा रहे हैं।
गुजरात में प्रौद्योगिकी कंपनी एमनेक्स ने गूगल के कृषि मॉडल API को राज्य सरकार के कृषि प्रगति क्रॉप इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म के साथ जोड़ा है। पिछले एक वर्ष में इस प्लेटफॉर्म के जरिए राज्य के छह लाख से अधिक किसानों को एसएमएस के माध्यम से 90 करोड़ से ज्यादा कृषि सलाह भेजी गईं। इनमें फसल और मिट्टी का स्वास्थ्य, कीट एवं रोग प्रबंधन और मौसम के रुझानों से संबंधित जानकारियां शामिल हैं। इन सेवाओं का उपयोग 1.4 करोड़ हेक्टेयर से अधिक कृषि भूमि के लिए किया गया है।
एमनेक्स इन्फोटेक के CEO नीरव शाह ने कहा कि समय पर खेत-स्तर के आंकड़े उपलब्ध नहीं होने के कारण लंबे समय से कृषि संबंधी निर्णय लेने में कठिनाई रही है। इससे किसानों तक सही समय पर उपयुक्त सहायता पहुंचाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ था।
शाह ने कहा, “गूगल के ALU और AMED मॉडल ने इस चुनौती को हल करने में मदद की है। ये प्रमाणित, वास्तविक समय की और खेत स्तर की जानकारी उपलब्ध कराते हैं, जो अब भारत के किसान-केंद्रित डिजिटल बुनियादी ढांचे को मजबूती दे रही है।”
उन्होंने कहा कि कृषि प्रगति जैसे प्लेटफॉर्म किसानों को ऋण उपलब्ध कराने और फसल उत्पादकता में सुधार करने में मदद कर रहे हैं। इससे उन्नत AI तकनीक को खेतों तक पहुंचाने और किसानों की आजीविका बेहतर बनाने में सहायता मिल रही है।
गूगल, एकस्टेप फाउंडेशन की पहल वाले वैश्विक गठबंधन ओपनएग्रीनेट के साथ भी काम कर रहा है। इसका उद्देश्य कृषि प्रशासकों के लिए विश्लेषण संबंधी उपकरण विकसित करना और किसानों के लिए अलग-अलग स्थानों पर उपलब्ध कृषि जानकारियों को एक ही प्लेटफॉर्म पर उनकी पसंद की भाषा में उपलब्ध कराने की संभावनाएं तलाशना है।
शिक्षकों को AI प्रशिक्षण
शिक्षा के क्षेत्र में गूगल अपनी AI एजुकेटर सीरीज का विस्तार कर रहा है। मई में भारत में शुरू किए गए इस कार्यक्रम के तहत शिक्षकों को Gemini और Gemini Notebook जैसे उपकरणों के इस्तेमाल का प्रशिक्षण दिया जाता है। इनकी मदद से शिक्षक लेसन प्लान बना सकते हैं, छात्रों के लिए जरूरत के अनुसार अध्ययन सामग्री तैयार कर सकते हैं और रोजमर्रा की तैयारी में लगने वाला समय बचा सकते हैं।
गूगल के अनुसार, मई से अब तक देशभर में 80,000 से अधिक शिक्षकों को प्रशिक्षित किया जा चुका है। अब बिहार, मध्य प्रदेश, सिक्किम और कौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय के साथ नई साझेदारियों के जरिए इस कार्यक्रम का विस्तार किया जाएगा।
MSME के लिए 1.5 करोड़ डॉलर की फंडिंग
गूगल डॉट ओआरजी भारत के MSME क्षेत्र के विकास में तेजी लाने के लिए द नज (The Nudge) को 1.5 करोड़ डॉलर की फंडिंग देगा। इस राशि का इस्तेमाल ऐसे AI उपकरण विकसित करने में किया जाएगा, जो छोटे कारोबारों को औपचारिक ऋण, बाजार तक पहुंच और नियामकीय अनुपालन में सहायता प्रदान करेंगे।
घोषणा के अनुसार, भारत में नौ करोड़ से अधिक MSME हैं, जो 34.5 करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार देते हैं। इस पहल में नए समाधान विकसित करने वाले संगठनों से प्रस्ताव आमंत्रित किए जाएंगे। साथ ही, टियर-3 और टियर-4 शहरों में स्थानीय प्रतिभाओं को रोजगार के लिए जरूरी कौशल सिखाने और उन्हें छोटे कारोबारों से जोड़ने के लिए बहुभाषी, वॉयस आधारित प्लेटफॉर्म विकसित किया जाएगा। द डेल्टा (the^delta) की CEO सुभाश्री दत्ता ने कहा, “यह भारत के MSME क्षेत्र के लिए सबसे बड़ी परोपकारी वित्तीय प्रतिबद्धताओं में से एक है।”

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