यूरिया की कीमत 900 डॉलर पर पहुंची, वैश्विक बाजार में लगातार बढ़ रहीं हैं उर्वरकों की कीमतें

देश में आयातित यूरिया की कीमत 900 डॉलर प्रति टन (कॉस्ट, इंश्योरेंस और फ्रेट) पर पहुंच गई हैं। साथ ही डीएपी की आयात कीमत 800 डॉलर प्रति पर पहुंच गई हैं। ऐसे में सरकार के लिए डीएपी के बाद यूरिया नई चुनौती लेकर आ रहा है क्योंकि इस भारी कीमत वृद्धि के चलते यूरिया पर सब्सिडी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगी

यूरिया की कीमत 900 डॉलर पर पहुंची, वैश्विक बाजार में लगातार बढ़ रहीं हैं उर्वरकों की कीमतें

साल भर के भीतर वैश्विक बाजार में जिस तरह से उर्वरकों और उनके कच्चे माल की कीमतों में बढ़ोतरी हुई है वह सरकार और  घरेलू उर्वरक उद्योग दोनों के लिए मुश्किलें बढ़ा रही हैं। जिस तरह की कीमत वृद्धि डाई अमोनियम फॉसफेट (डीएपी) और म्यूरेट ऑफ पोटाश (एमओपी) में हुई है उसी तरह की कीमत वृद्धि यूरिया की कीमतों में देखने को मिल रही है। देश में आयातित यूरिया की कीमत 900 डॉलर प्रति टन (कॉस्ट, इंश्योरेंस और फ्रेट) पर पहुंच गई हैं। साथ ही डीएपी की आयात कीमत 800 डॉलर प्रति पर पहुंच गई हैं। ऐसे में सरकार के लिए डीएपी के बाद यूरिया नई चुनौती लेकर आ रहा है क्योंकि इस भारी कीमत वृद्धि के चलते यूरिया पर सब्सिडी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच जाएगी। ऐसे में अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि चालू रबी सीजन में किसानों को यूरिया की बेहतर उपलब्धता बनाये रखने के लिए सरकार सब्सिडी का पूरा बोझ खुद वहन करती है या किसानों के लिए यूरिया की कीमत वृद्धि का विकल्प भी अपनाती है। आने वाले कुछ महीनों में राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश और पंजाब समेत पांच राज्यों में विधान सभा चुनाव होने हैं। ऐसे में सरकार कीमत वृद्धि का विकल्प अपनाकर किसानों की नाराजगी मोल लेना नहीं चाहेगी।

उद्योग सूत्रों के मुताबिक आयातित यूरिया की कीमत 900 डॉलर प्रति टन को पार कर चुकी है। साल भर पहले यूरिया की आयात कीमत 295 डॉलर प्रति टन थी जबकि तीन माह पहले इसकी कीमत 510 डॉलर प्रति टन थी। देश में पिछले साल 350 लाख टन यूरिया की खपत हुई थी। देश में 250 लाख टन यूरिया की उत्पादन क्षमता है जबकि करीब 100 लाख टन यूरिया का आयात होता है। इस स्थिति में यूरिया आयात को लेकर सब्सिडी बजट में भारी बढ़ोतरी होने का अनुमान है। इस समय देश में यूरिया का 45 किलो का बैग किसानों को 266.50 रुपये किलो पर उपलब्ध है। यूरिया की कीमतों में पिछले कई बरसों से कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है और इसकी लागत का बाकी हिस्सा सरकार सब्सिडी के रूप में देती है। मौजूदा वैश्विक कीमतों पर आयातित यूरिया की कीमत करीब 67500 हजार रुपये प्रति टन पर पहुंच जाएगी जबकि किसानों को सब्सिडी के चलते यूरिया की बिक्री 6000 रुपये प्रति टन से भी कम कीमत पर होती है।

डीएपी की कीमत साल भर पहले 370 डॉलर प्रति टन और तीन माह पहले 630 डॉलर प्रति टन थी। जो अब 800 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई है। वहीं साल भर पहले एमओपी की कीमत 230 डॉलर प्रति टन थी और तीन माह पहले इसकी कीमत 280 डॉलर प्रति टन थी। जो अब 450 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई हैं। डीएपी के लिए कच्चे माल के रूप में इस्तेमाल होने वाले फॉस्फोरिक एसिड की कीमत 1330 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई है जो तीन माह पहले 1160 डॉलर प्रति टन थी और साल भर पहले 689 डॉलर प्रति टन थी। यूरिया के उत्पादन में उपयोग होने वाली अमोनिया की कीमत 800 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई हैं, साल भर पहले इसकी कीमत 250 डॉलर प्रति टन और तीन माह पहले 670 डॉलर प्रति टन थी। वहीं सल्फर की कीमत 275 डॉलर प्रति टन पर पहुंच गई है जो तीन माह पहले 210 डॉलर प्रति टन और साल भर पहले 95 डॉलर प्रति टन पर थी।

सरकार ने इस साल मई में और उसके बाद अक्तूबर में विनियंत्रित उर्वरकों की बढ़ती कीमतों के चलते सब्सिडी में बढ़ोतरी की थी। इस सब्सिडी बढ़ोतरी के चलते डीएपी कीमत को 1200 रुपये प्रति बैग (50 किलो) के पुराने स्तर पर बरकरार रखा गया है। जबकि कॉम्प्लेक्स उर्वरक एनपीके के तीन ग्रेड पर 100 रुपये प्रति बैग की सब्सिडी देने के बावजूद  इनकी कीमतें करीब 1100 रुपये प्रति बैग से बढ़कर 1450 से 1470 रुपये प्रति बैग पर पहुंच गई हैं। अब सरकार के लिए चुनौती है कि वह तमाम उर्वरकों की कीमतों में हुई इस भारी बढ़ोतरी के बाद उर्वरकों की उपलब्धता और कीमतों में कैसे संतुलन बरकरार रख पाती है।