पंचायतों की जमीन पर बनेंगे EV चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन, पंचायतों को होगी नियमित कमाई
पंचायतों की जमीन पर इलेक्ट्रिक वाहन (EV) चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए पंचायती राज मंत्रालय ने ऊर्जा मंत्रालय के अधीन एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (CESL) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
केंद्र सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित करने की पहल की है। इसके तहत पंचायतों की जमीन पर EV चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे। इससे ग्राम, ब्लॉक और जिला पंचायतों को अपनी जमीन से नियमित आय अर्जित करने का अवसर मिलेगा। साथ ही, ग्रामीण क्षेत्रों में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को बढ़ावा देने और कार्बन उत्सर्जन घटाने में मदद मिलेगी।
इस संबंध में पंचायती राज मंत्रालय ने ऊर्जा मंत्रालय के अधीन एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (EESL) की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी कन्वर्जेंस एनर्जी सर्विसेज लिमिटेड (CESL) के साथ समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किए हैं।
यह समझौता केंद्रीय पंचायती राज मंत्री राजीव रंजन सिंह उर्फ ललन सिंह और पंचायती राज मंत्रालय के सचिव डॉ. विनीत जोशी की उपस्थिति में हुआ। समझौते का आदान-प्रदान पंचायती राज मंत्रालय की संयुक्त सचिव मुक्ता शेखर और CESL के निदेशक अखिलेश कुमार दीक्षित ने किया।
पंचायतों की जमीन से आय बढ़ाने की पहल
इस पहल का प्रमुख उद्देश्य पंचायतों की अपनी आय के स्रोत बढ़ाना है। इसके तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ग्राम पंचायतों, ब्लॉक पंचायतों और जिला पंचायतों की उपयुक्त जमीन पर EV चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशन स्थापित किए जाएंगे।
इन स्टेशनों का नेटवर्क केवल पंचायत परिसरों तक सीमित नहीं रहेगा। राज्य और राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे भी उपयुक्त स्थानों की पहचान की जाएगी, ताकि ग्रामीण और राजमार्गों से गुजरने वाले वाहन चालकों को चार्जिंग सुविधाएं मिल सकें।
इस नेटवर्क में दोपहिया, तिपहिया, चारपहिया वाहनों के साथ मध्यम और भारी वाणिज्यिक वाहनों के लिए भी चार्जिंग सुविधाएं विकसित की जाएंगी।
साइट की पहचान से संचालन तक CESL की जिम्मेदारी
समझौते के तहत पंचायती राज मंत्रालय राज्यों के पंचायती राज विभागों के साथ समन्वय करेगा। इसके माध्यम से चार्जिंग स्टेशन स्थापित करने के लिए उपयुक्त स्थलों की पहचान और उनकी निगरानी की जाएगी।
वहीं, CESL इन स्थलों का आकलन, मांग का एकत्रीकरण, उपकरणों की आपूर्ति, इंस्टॉलेशन, परीक्षण और कमीशनिंग का काम करेगी। कंपनी चार्जिंग और बैटरी स्वैपिंग स्टेशनों के संचालन एवं रखरखाव की जिम्मेदारी भी संभालेगी।
पंचायतों के लिए राजस्व का नया स्रोत
यह पहल पंचायतों की अपनी आय बढ़ाने के लिए पंचायती राज मंत्रालय के प्रयासों से जुड़ी है। मंत्रालय ने हाल ही में मॉडल पंचायत टैक्स, रेट्स एंड फीस रूल्स (Model OSR Rules) जारी किए हैं। इन नियमों का उद्देश्य पंचायतों को स्थानीय स्तर पर पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से राजस्व जुटाने के लिए एक ढांचा उपलब्ध कराना है।
सरकार के अनुसार, इस पहल से पंचायतों की जमीन सामुदायिक संपत्ति के साथ-साथ आय अर्जित करने वाली परिसंपत्ति बन सकेगी। इससे मिलने वाली नियमित आय का इस्तेमाल स्थानीय नागरिक सुविधाओं, बुनियादी ढांचे के विकास और सामुदायिक कल्याण के कार्यों में किया जा सकेगा।
इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों में EV चार्जिंग सुविधाओं की उपलब्धता बढ़ने से इलेक्ट्रिक वाहनों के इस्तेमाल को प्रोत्साहन मिलेगा। यह पहल स्वच्छ ऊर्जा, हरित गांवों और टिकाऊ ग्रामीण विकास के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में भी योगदान दे सकती है।

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