मई में भारत का ऑयलमील निर्यात 19% बढ़ा, सोयाबीन मील के दाम सालभर में करीब 60% चढ़े
भारत का ऑयलमील निर्यात मई 2026 में सालाना आधार पर 19 प्रतिशत बढ़कर 3.74 लाख टन हो गया। रेपसीड मील के निर्यात, खासकर चीन को हुई आपूर्ति, ने इसमें प्रमुख भूमिका निभाई। चीन के अलावा वियतनाम की भी खरीद बढ़ी, जबकि दक्षिण कोरिया और थाईलैंड की मांग घटी। अप्रैल-मई में कुल निर्यात 5.34 प्रतिशत घटकर 7.39 लाख टन रहा।
अप्रैल में ऑयलमील निर्यात में गिरावट के बाद मई 2026 में इसमें अच्छी रिकवरी देखने को मिली है। सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (SEA) की तरफ से जारी शुरुआती आंकड़ों के अनुसार, मई में ऑयलमील निर्यात 3,73,907 टन रहा, जबकि मई 2025 में यह 3,15,326 टन था। हालांकि, इससे अप्रैल में हुई तेज गिरावट की पूरी भरपाई नहीं हो सकी। अप्रैल-मई 2026 के दौरान भारत का कुल ऑयलमील निर्यात 7,39,467 टन रहा, जो पिछले साल की समान अवधि के 7,81,189 टन की तुलना में 5.34% कम है।
अप्रैल में निर्यात सालाना आधार पर 21.53% घटकर 3,65,560 टन रह गया था। SEA के मुताबिक, लाल सागर में शिपिंग से जुड़ी दिक्कतों और ऊंची माल ढुलाई लागत का भी निर्यात पर असर पड़ा। मई में सुधार मुख्य रूप से रेपसीड मील के निर्यात से आया, खासकर चीन जैसे एशियाई बाजारों में हुई आपूर्ति से।
वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों में रेपसीड मील भारत के ऑयलमील निर्यात का सबसे बड़ा घटक रहा। इसका निर्यात बढ़कर 4,95,154 टन हो गया, जो एक साल पहले 3,47,585 टन था। इसके विपरीत, सोयाबीन मील का निर्यात तेजी से घटकर 1,44,473 टन रह गया, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 3,87,544 टन था।
SEA ने कहा कि भारतीय सोयाबीन और रेपसीड मील निर्यातकों को अर्जेंटीना, ब्राजील और यूरोप के आपूर्तिकर्ताओं से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। इसके अलावा चीन और दक्षिण कोरिया जैसे प्रमुख बाजारों में मांग के बदलते रुझान भी चुनौती पैदा कर रहे हैं। घरेलू सोयाबीन मील की बढ़ती कीमतें भी वैश्विक बाजार में भारत की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को प्रभावित कर रही हैं।
चीन और वियतनाम की खरीद बढ़ी
अप्रैल-मई के दौरान चीन भारतीय ऑयलमील का सबसे बड़ा आयातक रहा। चीन की खरीद 135.24% बढ़कर 2,76,147 टन हो गई, जो एक साल पहले 1,17,388 टन थी। चीन के कुल आयात में रेपसीड मील की हिस्सेदारी 2,73,533 टन रही।
वियतनाम ने भी भारत से खरीद दोगुनी से अधिक बढ़ाकर 80,231 टन कर दी, जबकि एक साल पहले यह 40,040 टन थी। बांग्लादेश की खरीद लगभग स्थिर, 1,02,100 टन रही। दूसरी ओर, दक्षिण कोरिया और थाईलैंड को निर्यात में क्रमशः 29.89% और 44.20% की गिरावट दर्ज की गई।
सोयाबीन और मूंगफली का रकबा
एसोसिएशन के अनुसार, 14 अगस्त तक सोयाबीन की बुवाई 121 लाख हेक्टेयर में हुई थी, जो पिछले साल के 123 लाख हेक्टेयर से मामूली कम है। वहीं, मूंगफली का रकबा बढ़कर 48.03 लाख हेक्टेयर हो गया, जबकि एक साल पहले यह 47.01 लाख हेक्टेयर था। एसोसिएशन ने कहा कि अंतिम उत्पादन आने वाले महीनों में मौसम की स्थिति पर निर्भर करेगा।
एक साल में करीब 60% महंगा हुआ सोया मील
एसईए के आंकड़ों में पिछले एक साल के दौरान ऑयलमील की कीमतों में उल्लेखनीय वृद्धि भी सामने आई है। भारतीय बंदरगाह पर सोयाबीन मील की औसत कीमत जुलाई 2026 में बढ़कर 617 डॉलर प्रति टन हो गई, जबकि जुलाई 2025 में यह 385 डॉलर प्रति टन थी। यानी एक साल में कीमत करीब 60% बढ़ गई। सोयाबीन मील की कीमत जनवरी में 435 डॉलर प्रति टन से बढ़कर मई में 594 डॉलर और जून में 621 डॉलर प्रति टन तक पहुंच गई थी। जुलाई में इसमें मामूली नरमी आई और कीमत 617 डॉलर प्रति टन रही।
रेपसीड मील की कीमत भी जुलाई 2026 में बढ़कर 253 डॉलर प्रति टन हो गई, जबकि एक साल पहले यह 196 डॉलर थी। दिसंबर 2025 से जुलाई 2026 के बीच इसकी कीमत लगभग 217-253 डॉलर प्रति टन के दायरे में रही। कैस्टरसीड मील की कीमत जुलाई में बढ़कर 108 डॉलर प्रति टन हो गई, जबकि एक साल पहले यह 88 डॉलर थी। वहीं, डी-ऑयल्ड राइस ब्रान एक्सट्रैक्ट की कीमत जुलाई में 177 डॉलर प्रति टन रही, जबकि अक्टूबर 2025 में यह 158 डॉलर थी।

Join the RuralVoice whatsapp group


















