यूपी में बिजली उत्पादन के लिए कोयला आयात पर सवाल, नियामक आयोग ने पूछा आयातित कोयला इस्तेमाल कैसे होगा

आयोग के सचिव संजय कुमार सिंह ने निगम के चेयरमैन को पत्र लिखकर पूछा है कि क्या आयातित कोयला, जिनकी ग्रॉस कैलोरीफिक वैल्यू (जीसीवी) अधिक होगी, निगम के बिजली संयंत्रों में इस्तेमाल किया जा सकेगा। दरअसल निगम के प्लांट काफी पुराने हो चुके हैं और वे कम जीसीवी वाले कोयले के हिसाब से बनाए गए थे

यूपी में बिजली उत्पादन के लिए कोयला आयात पर सवाल, नियामक आयोग ने पूछा आयातित कोयला इस्तेमाल कैसे होगा

उत्तर प्रदेश में बिजली संयंत्रों के लिए कोयला आयात करने पर नया विवाद खड़ा हो गया है। सरकारी बिजली उत्पादन कंपनी उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम ने कोयले की उपलब्धता के संकट को देखते हुए इसका आयात करने का फैसला किया है, लेकिन राज्य विद्युत नियामक आयोग यूपीईआरसी ने इस पर सवाल उठाए हैं। आयोग के सचिव संजय कुमार सिंह ने निगम के चेयरमैन को पत्र लिखकर पूछा है कि क्या आयातित कोयला, जिनकी ग्रॉस कैलोरीफिक वैल्यू (जीसीवी) अधिक होगी, निगम के बिजली संयंत्रों में इस्तेमाल किया जा सकेगा। दरअसल निगम के प्लांट काफी पुराने हो चुके हैं और वे कम जीसीवी वाले कोयले के हिसाब से बनाए गए थे।

आयोग ने निगम से यह भी पूछा है कि कोयला आयात करने के लिए पूर्व अनुमति ली गई थी या नहीं। यह भी कि सिर्फ यूपी राज्य विद्युत उत्पादन निगम कोयला आयात कर रहा है जबकि अन्य बिजली उत्पादन कंपनियां ऐसा नहीं कर रही हैं। आयोग ने इसके लिए मीडिया रिपोर्ट के साथ-साथ उत्तर प्रदेश बिजली उपभोक्ता फोरम के प्रेसिडेंट अवधेश कुमार वर्मा के पत्र का हवाला दिया है।

आयोग ने विद्युत उत्पादन निगम की तरफ से उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) को सप्लाई की गई बिजली के बारे में भी पूछा है। उसने जानना चाहा है कि बीते एक महीने में उत्पादन लक्ष्य की तुलना में कितनी बिजली सप्लाई की गई है। आयोग ने यूपीईआरसी जनरेशन टैरिफ रेगुलेशन 2019 के क्लॉज 23(4)1 का हवाला दिया है, जिसमें कहा गया है सरकार द्वारा नोटिफाई की गई कीमतों से इतर अन्य कीमत पर इंधन खरीदने पर तभी विचार किया जा सकता है जब वह पारदर्शी प्रक्रिया के जरिए प्रतिस्पर्धी नीलामी पर आधारित हो।

आयोग के सचिव ने लिखा है, “इसलिए इस संदर्भ में मुझे निम्न स्पष्टीकरण लेने का निर्देश दिया गया है, (डी) क्या प्रशासित मूल्य वाले कोयले की कमी है, अगर हां तो यह कमी कोयला खदान के स्तर पर है या रेल वैगन की उपलब्धता न होने के कारण। यदि कोयले की कमी रेल वैगन की अनुपलब्धता के कारण है तो आयातित कोयले को प्लांट तक लाने में ट्रांसपोर्टेशन की समस्या कैसे दूर होगी, वह भी तब जब घरेलू कोयले को प्लांट तक लाने में समस्या आ रही है।”

उत्तर प्रदेश में बिजली की दैनिक मांग 21,000 मेगावाट को पार कर चुकी है जबकि सप्लाई 19,000 से 20,000 मेगावाट तक ही हो रही है। ऑल इंडिया पावर इंजीनियर्स फेडरेशन के चेयरमैन शैलेंद्र दुबे के अनुसार देश के ताप बिजली घरों में कोयले के स्टॉक की कमी को देखते हुए आने वाले दिनों में बिजली संकट गहरा हो सकता है। 

दुबे ने रविवार को कहा था कि अक्टूबर 2021 के बाद 12 राज्यों में कोयले की कमी बनी हुई है। उन्होंने दावा किया था कि ताप बिजली घरों को कोयले की सप्लाई के लिए रेलवे के 453 वैगन की जरूरत है जबकि अप्रैल के पहले हफ्ते में सिर्फ 379 वैगन उपलब्ध कराए गए थे। अब यह संख्या बढ़कर 415 हुई है।

हालांकि उत्तर प्रदेश में कोयले का संकट अभी तक गंभीर नहीं हुआ है, फिर भी दुबे के अनुसार विद्युत उत्पादन निगम के संयंत्रों में मानक की तुलना में 26 फ़ीसदी कोयले का भंडार ही उपलब्ध है। निगम के चार ताप बिजली घर हैं जिनमें 19.7 लाख टन कोयले का स्टॉक होना चाहिए जबकि यह सिर्फ 5,11,700 टन है।