छत्तीसगढ़ में चावल निर्यातकों को मंडी शुल्क से छूट एक वर्ष के लिए बढ़ी

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने चावल निर्यात को बढ़ावा देने के लिए मंडी शुल्क छूट को एक और वर्ष के लिए बढ़ाने की घोषणा की है। इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट में उन्होंने कहा कि इस फैसले से निर्यातकों और किसानों को लाभ मिलेगा। राज्य से 90 देशों में चावल निर्यात होता है और सरकार निर्यात व प्रसंस्करण को पूरा समर्थन दे रही है।

छत्तीसगढ़ में चावल निर्यातकों को मंडी शुल्क से छूट एक वर्ष के लिए बढ़ी

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने शनिवार को चावल निर्यातकों को बड़ी राहत देते हुए मंडी शुल्क में दी गई छूट को एक और वर्ष के लिए बढ़ाने की घोषणा की। यह कदम राज्य से चावल निर्यात को प्रोत्साहित करने और किसानों व निर्यातकों दोनों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।

मुख्यमंत्री साय ने यह घोषणा रायपुर के एक निजी रिसॉर्ट में आयोजित इंडिया इंटरनेशनल राइस समिट के दूसरे संस्करण को संबोधित करते हुए की। एक सरकारी बयान के अनुसार, उन्होंने कहा कि मंडी शुल्क छूट का विस्तार निर्यातकों के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होगा और इससे वैश्विक चावल बाजार में छत्तीसगढ़ की स्थिति और मजबूत होगी।

उन्होंने कहा कि यह समिट इसलिए भी खास है क्योंकि इसमें 12 देशों से खरीदारों और छह देशों के दूतावासों के प्रतिनिधिमंडलों ने भाग लिया है। यह भागीदारी छत्तीसगढ़ के चावल क्षेत्र में बढ़ती अंतरराष्ट्रीय रुचि को दर्शाती है। वैश्विक हितधारकों की मौजूदगी से अंतरराष्ट्रीय चावल व्यापार में राज्य को व्यापक पहचान मिलेगी।

मुख्यमंत्री साय ने कहा कि छत्तीसगढ़ को ‘भारत का धान का कटोरा’ कहा गया है और राज्य आज भी इस पहचान पर खरा उतरता है। चावल राज्य की खाद्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा है और यहां बड़ी संख्या में धान की किस्मों की खेती की जाती है। उन्होंने विशेष रूप से सरगुजा क्षेत्र की सुगंधित जीराफूल और दुबराज धान किस्मों का उल्लेख किया, जो अपनी विशिष्ट खुशबू और उच्च गुणवत्ता के लिए जानी जाती हैं।

राइस समिट को संबोधित करते मुख्यमंत्री विष्णु देव साय।

मुख्यमंत्री ने बताया कि मंडी शुल्क में छूट की मांग निर्यातक कई वर्षों से कर रहे थे। इसे पिछले वर्ष लागू किया गया था और इसकी अवधि दिसंबर 2025 में समाप्त हो गई थी। अब इसके एक वर्ष के विस्तार से राज्य से चावल निर्यात को और गति मिलेगी।

साय ने कहा कि राज्य की नई औद्योगिक नीति में लघु उद्योगों को बढ़ावा देने पर विशेष जोर दिया गया है, जिससे चावल प्रसंस्करण और निर्यात क्षमता को मजबूती मिलेगी। वर्तमान में छत्तीसगढ़ से लगभग एक लाख टन चावल का निर्यात करीब 90 देशों में किया जा रहा है। उन्होंने दोहराया कि राज्य सरकार निर्यातकों को हर संभव सहयोग देती रहेगी।

किसानों के हितों पर प्रकाश डालते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में धान किसानों को 3,100 रुपये प्रति क्विंटल का भुगतान किया जा रहा है और प्रति एकड़ अधिकतम 21 क्विंटल तक धान की खरीदी की जा रही है। पिछले वर्ष लगभग 149 लाख मीट्रिक टन धान की खरीद हुई थी और चालू वर्ष में इसके और बढ़ने की उम्मीद है।

इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के क्षेत्रीय कार्यालय का उद्घाटन भी किया। समिट के दौरान उन्होंने चावल आधारित एक प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया, जिसमें विभिन्न चावल किस्मों, क्षेत्र-विशेष प्रजातियों, धान की खेती में नवाचारों और उत्पादकता बढ़ाने के लिए आधुनिक तकनीकों को प्रदर्शित किया गया।

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