अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप टैरिफ को गैरकानूनी करार दिया, भारत सहित विभिन्न देशों के लिए राहत
अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विभिन्न देशों पर लगाए गए टैरिफ को 6-3 के बहुमत से खारिज किया। इस फैसले से विश्व व्यापार में मची उथल-पुथल से राहत मिलेगी।
अमेरिका के सर्वोच्च न्यायालय ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा विभिन्न देशों के खिलाफ लगाए गए ऊंचे आयात शुल्क यानी टैरिफ को अवैध करार दिया है। न्यायालय ने निचली अदालत के उस निर्णय को बरकरार रखा, जिसमें कहा गया था कि राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर आपातकाल के लिए बने कानून का गलत इस्तेमाल किया। इसके लिए ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी संसद (कांग्रेस) की अनुमति भी नहीं ली थी।
अमेरिका के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट के तहत राष्ट्रपति आपात स्थिति में विदेश व्यापार को नियंत्रित कर सकते हैं, लेकिन उन्हें व्यापक स्तर पर टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय में इस मामले की सुनवाई कर रहे न्यायाधीशों ने 6-3 के बहुमत से राष्ट्रपति के व्यापक टैरिफ लगाने को असंवैधानिक माना।
यह फैसला अमेरिका में राष्ट्रपति और संसद के बीच शक्तियों के संतुलन को लेकर एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर माना जा रहा है। इस फैसले से ट्रंप के हाथ से टैरिफ का हंटर छिन जाएगा, जिसका असर भारत सहित विभिन्न देशों के साथ व्यापार की शर्तों पर पड़ेगा।
वैश्विक प्रभाव
यह निर्णय वैश्विक व्यापार में बनी अनिश्चितता के बीच बड़ी राहत लेकर आया है। कई अमेरिकी उद्योग संगठनों का कहना था कि इन शुल्कों से लागत बढ़ी और उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ पड़ा।
भारत सहित कई निर्यातक देशों के लिए यह निर्णय सकारात्मक माना जा रहा है, क्योंकि व्यापक आयात शुल्क हटने से अमेरिकी बाजार तक पहुंच आसान हो सकती है। इससे भारत पर लागू अतिरिक्त टैरिफ समाप्त हो जाएंगे।
रेसीप्रोकल टैरिफ समाप्त होने से अब भारत को 18 फीसदी टैक्स की बजाय पहले से लागू टैक्स देने होंगे। इस फैसले से अमेरिका के साथ भारत के व्यापार समझौते के समीकरण भी पूरी तरह बदल जाएंगे। इस फैसले के मद्देनजर ट्रंप भारत के साथ जल्द से जल्द व्यापार समझौते पर मुहर लगाना चाहते थे।
क्या था विवाद
अप्रैल 2025 में राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका के बढ़ते व्यापार घाटे को राष्ट्रीय आपात स्थिति बताते हुए लगभग सभी प्रमुख व्यापारिक साझेदार देशों से आने वाले सामान पर पारस्परिक आधार पर आयात शुल्क लगा दिए थे। विभिन्न देशों से आयात होने वाले सामान पर 10% से 50% तक कर लगाने का आदेश दिया गया था।
इससे पहले फरवरी 2025 में ट्रंप ने चीन, मेक्सिको और कनाडा से आने वाले सामान पर कर लगाया था। चीन, कनाडा और मेक्सिको पर लगाए गए शुल्क के पीछे फेंटानिल और अन्य अवैध नशीले पदार्थों की तस्करी को भी आधार बनाया गया था।
यह विवाद तीन अलग-अलग याचिकाओं के माध्यम से सर्वोच्च न्यायालय तक पहुंचा। एक पारिवारिक खिलौना कंपनी ने, दूसरी एक जनहित विधिक संस्था ने छोटे कारोबारियों की ओर से, और तीसरी 12 अमेरिकी राज्यों ने मिलकर राष्ट्रपति के निर्णय को चुनौती दी थी।
निचली अदालतों ने पहले ही कहा था कि राष्ट्रपति ने आपातकालीन कानून का दायरा बढ़ाकर उसका दुरुपयोग किया। इसके बाद प्रशासन ने सर्वोच्च न्यायालय में अपील की।
कौन से शुल्क रहेंगे प्रभावी
यह फैसला उन शुल्कों पर लागू नहीं होगा, जो 1962 के ट्रेड एक्सपेंशन एक्ट की धारा 232 के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर लगाए गए थे। इस प्रावधान के अंतर्गत इस्पात, एल्युमीनियम और वाहन उद्योग से जुड़े कुछ आयात शुल्क अब भी जारी रह सकते हैं।

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