नहरबंदी के मुद्दे पर श्रीगंगानगर के किसानों में उबाल, रबी फसलों को लेकर चिंता

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले में फिरोजपुर फीडर नहर की 37 दिन की प्रस्तावित बंदी को लेकर किसान चिंतित हैं। रबी फसलों के अहम दौर में पानी की कमी से उत्पादन घटने की आशंका है। किसान संगठन नहरबंदी को फरवरी के बाद करने की मांग को लेकर आंदोलन तेज करने की तैयारी कर रहे हैं।

नहरबंदी के मुद्दे पर श्रीगंगानगर के किसानों में उबाल, रबी फसलों को लेकर चिंता
फिरोजपुर फीडर में बंदी के मुद्दे पर श्रीगंगानगर में बैठक के दौरान चर्चा करते किसान

राजस्थान के श्रीगंगानगर जिले के किसान इन दिनों नहरों में पानी की कमी को लेकर परेशान और आक्रोशित हैं। रबी फसलों के पकाव के दौर में सिंचाई संकट गहराने की आशंका के बीच पंजाब की फिरोजपुर फीडर नहर को मरम्मत कार्य के लिए 21 जनवरी से 37 दिनों तक बंद किया जा रहा है। इसी फीडर के माध्यम से गंग नहर परियोजना को पानी मिलता है।

हालांकि सिंचाई विभाग ने बंदी के दौरान गंग नहर के हिस्से का पानी पुरानी बीकानेर कैनाल के जरिए देने की वैकल्पिक व्यवस्था की तैयारी की है, लेकिन किसान इससे संतुष्ट नहीं हैं। संयुक्त किसान मोर्चा ने अपनी मांगों को लेकर 12 जनवरी से श्रीगंगानगर के महाराजा गंगा सिंह चौक पर पड़ाव डालने का ऐलान कर दिया है।

तीन महीने से चल रहा है विरोध

करीब तीन महीने पहले किसानों को यह जानकारी मिली थी कि पंजाब सरकार जनवरी से फिरोजपुर फीडर की री-लाइनिंग के लिए नहर बंद करना चाहती है। तभी से विरोध शुरू हो गया था। पिछले महीने किसानों ने जिला प्रशासन को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर जनवरी के बजाय 15 मार्च के बाद नहरबंदी लेने और तब तक वैकल्पिक जल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की थी।

फिरोजपुर फीडर में बंदी के मुद्दे को लेकर श्रीगंगानगर में प्रदर्शन करते किसान

किसानों का कहना है कि जनवरी-फरवरी का समय रबी फसलों के लिए बेहद अहम होता है। इस दौरान सरसों, गेहूं, चना और जौ की फसलों को नियमित सिंचाई की जरूरत रहती है। किसानों का आरोप है कि बार-बार मांग उठाने के बावजूद सरकार और प्रशासन ने स्थिति स्पष्ट नहीं की, जिसके चलते उन्हें धरना-प्रदर्शन का रास्ता अपनाना पड़ा।

अधिसूचना से बढ़ी नाराजगी

किसानों को उम्मीद थी कि उनकी मांग मानी जाएगी, लेकिन हाल ही में पंजाब सरकार की ओर से जारी अधिसूचना में 21 जनवरी से 24 फरवरी तक फिरोजपुर फीडर बंद रखने की घोषणा कर दी गई। इस काम पर कुल 647.62 करोड़ रुपये खर्च होंगे, जिसमें पंजाब का हिस्सा 379.12 करोड़ रुपये और राजस्थान का 268.50 करोड़ रुपये होगा।

गंग नहर परियोजना के अधीक्षण अभियंता धीरज चावला के अनुसार, वर्तमान में फिरोजपुर फीडर में 11,192 क्यूसेक पानी प्रवाहित हो पाता है। री-लाइनिंग के बाद इसकी क्षमता बढ़कर 13,842 क्यूसेक हो जाएगी। इससे भविष्य में गंग नहर प्रणाली को तय हिस्से का पानी बेहतर तरीके से मिल सकेगा और मानसून के दौरान अतिरिक्त पानी भी लिया जा सकेगा।

चावला बताते हैं कि पंजाब सरकार पहले 5 जनवरी और फिर 15 फरवरी से बंदी लेना चाहती थी, लेकिन किसानों की जरूरतों को देखते हुए सहमति नहीं दी गई। अब सर्दी बढ़ गई है और मावठ की संभावना है, इसलिए वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर पुरानी बीकानेर कैनाल से पानी देकर काम चलाने की योजना है। उन्होंने कहा कि किसानों की मांग पर हम पंजाब सरकार से फिर संपर्क में हैं और फरवरी में बंदी लेने का अनुरोध कर रहे हैं, लेकिन अंतिम फैसला पंजाब सरकार को ही करना है।

क्या है किसान संगठनों की आपत्ति

अखिल भारतीय किसान महासभा के जिलाध्यक्ष कालूराम थोरी कहते हैं कि फिरोजपुर फीडर के पुनर्निर्माण का काम होना चाहिए, किसान इसके खिलाफ नहीं हैं। हम तो बीस साल से इसकी मांग करते आ रहे हैं, लेकिन सरकार ने समय गलत चुना है। अगर फरवरी से बंदी ली जाए, तो किसानों को कोई आपत्ति नहीं होगी।

श्रीगंगानगर में बहती गंग नहर

गंग कैनाल किसान संघर्ष समिति के प्रवक्ता एडवोकेट सुभाष सहगल का कहना है कि करीब 99 फीसदी बुवाई हो चुकी है। इस समय सरसों, चना, जौ और गेहूं को सिंचाई की सख्त जरूरत है। फिरोजपुर फीडर बंद होने से पानी की आपूर्ति कम हो जाएगी। सहगल का कहना है कि पुरानी बीकानेर कैनाल की हालत खराब है और उसमें पानी का नुकसान ज्यादा होगा। 1500 क्यूसेक पानी छोड़े जाने पर श्रीगंगानगर तक केवल 1200–1300 क्यूसेक पानी ही पहुंच पाएगा। खरीफ के दौरान भी पूरा पानी नहीं मिला और अब रबी में फिर संकट खड़ा हो गया है।

पानी उपलब्ध, फिर भी संकट

सहगल के अनुसार, पिछले साल की तुलना में इस समय बांधों में ज्यादा पानी उपलब्ध है। पोंग बांध में जहां पिछले साल पानी का स्तर 1307 फीट था, वहीं इस साल 1358 फीट है। भाखड़ा बांध में भी पानी का स्तर 40–45 फीट अधिक है। इसके बावजूद यदि फसलें सूखती हैं, तो इसे कैसे जायज ठहराया जा सकता है?

उत्पादन घटने की आशंका

किसान संगठनों का कहना है कि अगर समय पर सिंचाई नहीं हुई, तो औसत उत्पादन में भारी गिरावट आएगी। सहगल के मुताबिक, श्रीगंगानगर जिले में सामान्य तौर पर गेहूं का उत्पादन 28 क्विंटल प्रति हेक्टेयर और सरसों का 20 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होता है, जो पानी की कमी से 40 फीसदी तक घट सकता है।

वार्ता रही बेनतीजा

प्रशासन और सिंचाई विभाग ने किसानों से बातचीत के लिए श्रीगंगानगर में बैठक बुलाई और बंदी के दौरान पुरानी बीकानेर कैनाल से 1500 क्यूसेक पानी देने का प्रस्ताव रखा, लेकिन किसान नेता इससे सहमत नहीं हुए। उनकी मांग है कि फरवरी के पहले सप्ताह से नहरबंदी ली जाए, ताकि जौ, सरसों और गेहूं की सिंचाई हो सके।

श्रीगंगानगर में नहरबंदी के मुद्दे पर आयोजित बैठक में किसानों से चर्चा करते जनप्रतिनिधि तथा प्रशासन और सिंचाई विभाग के अधिकारी

किसान संघर्ष समिति के अध्यक्ष अमर सिंह बिश्नोई का कहना है कि कई इलाकों में अब तक जौ और गेहूं की पहली सिंचाई भी नहीं हो पाई है। ठंड बढ़ने से सरसों में पानी की जरूरत और बढ़ गई है। इस समय नहरबंदी से किसानों को भारी नुकसान तय है।

बिश्नोई के अनुसार, पुरानी बीकानेर कैनाल में 1500 क्यूसेक पानी का प्रवाह व्यावहारिक नहीं है। नहर की सफाई नहीं हुई है और उसमें भारी मात्रा में मलबा जमा है। करीब 250–300 क्यूसेक पानी रास्ते में ही व्यर्थ हो जाएगा। यदि बिना ट्रायल के पानी छोड़ा गया और सौ साल पुरानी नहर टूट गई, तो फसलें पूरी तरह बर्बाद हो सकती हैं।

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