क्रॉपलाइफ इंडिया ने नए उत्पादों के लिए मांगी 5 साल की डेटा सुरक्षा, किसानों के लिए विकल्प बढ़ाने पर जोर

क्रॉपलाइफ इंडिया ने किसानों के लिए सीमित फसल सुरक्षा विकल्पों पर चिंता जताते हुए सरकार से तत्काल कदम उठाने की मांग की है। संगठन ने नए उत्पादों के लिए पांच वर्ष की नियामक डेटा सुरक्षा (RDP) लागू करने का सुझाव दिया है।

क्रॉपलाइफ इंडिया ने नए उत्पादों के लिए मांगी 5 साल की डेटा सुरक्षा, किसानों के लिए विकल्प बढ़ाने पर जोर

देश में किसानों के सामने उपलब्ध फसल सुरक्षा उत्पादों और सक्रिय अवयवों (Active Ingredients-AIs) के सीमित विकल्प को लेकर क्रॉपलाइफ इंडिया ने सरकार से तत्काल कदम उठाने का आग्रह किया है। 17 प्रमुख फसल सुरक्षा कंपनियों का प्रतिनिधित्व करने वाले उद्योग संगठन का कहना है कि भारतीय किसानों के पास फिलहाल करीब 380 सक्रिय अवयव उपलब्ध हैं, जबकि दुनियाभर में किसानों को लगभग 1,200 सक्रिय अवयवों का विकल्प मिलता है।

क्रॉपलाइफ इंडिया के मुताबिक, मौजूदा फसल सुरक्षा रसायनों पर किसी तरह का प्रतिबंध तब तक नहीं लगाया जाना चाहिए, जब तक उनके बेहतर विकल्प किसानों के लिए उपलब्ध न हों। संगठन का कहना है कि ऐसी स्थिति किसानों के लिए दोहरी परेशानी पैदा कर सकती है। एक ओर उपलब्ध विकल्प कम होंगे और दूसरी ओर कीट एवं रोगों से होने वाले नुकसान से निपटना मुश्किल हो सकता है।

संगठन ने इस समस्या से निपटने के लिए दो-स्तरीय व्यवस्था का प्रस्ताव रखा है। पहला, मौजूदा सक्रिय अवयवों पर किसी भी तरह का प्रतिबंध स्थापित वैज्ञानिक साहित्य तथा सुरक्षा, स्वास्थ्य और प्रभावकारिता से जुड़े आंकड़ों के आधार पर होना चाहिए। साथ ही, ऐसे प्रतिबंधों के किसानों पर पड़ने वाले प्रभाव का भी आकलन किया जाना चाहिए।

दूसरा, नए फसल सुरक्षा उत्पादों के पंजीकरण के लिए कंपनियों द्वारा तैयार किए जाने वाले नियामक आंकड़ों पर पांच वर्ष की नियामक डेटा सुरक्षा (Regulatory Data Protection-RDP) व्यवस्था लागू की जाए। क्रॉपलाइफ इंडिया का कहना है कि इससे कंपनियों को नई तकनीकों में निवेश का भरोसा मिलेगा और किसानों के लिए अधिक सुरक्षित, प्रभावी और आधुनिक फसल सुरक्षा समाधानों का दायरा बढ़ेगा।

नए उत्पादों के पंजीकरण के लिए कंपनियों को सुरक्षा, स्वास्थ्य और प्रभावकारिता से जुड़े कई अध्ययन कराने पड़ते हैं। क्रॉपलाइफ इंडिया के अनुसार, मौजूदा व्यवस्था में इन आंकड़ों के संरक्षण का स्पष्ट प्रावधान नहीं होने से कंपनियों को अपने निवेश के अनुचित इस्तेमाल की आशंका रहती है। इससे नई तकनीकों को भारत में लाने की गति प्रभावित होती है।

धानुका एग्रीटेक के प्रबंध निदेशक राहुल धनुका ने कहा कि अल नीनो और जलवायु परिवर्तन जैसे कारकों के कारण किसानों के सामने कीटों का दबाव अधिक गतिशील और चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। ऐसे में एक मजबूत नियामकीय ढांचे की तत्काल आवश्यकता है, ताकि बेहतर विज्ञान, नवाचार और तकनीक पर आधारित उत्पाद किसानों तक पहुंच सकें। उन्होंने कहा कि RDP से मौजूदा पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

वैश्विक नियामकीय व्यवस्था के अनुरूप ढांचे की मांग

क्रॉपलाइफ इंडिया का कहना है कि नियामकीय डेटा सुरक्षा का प्रावधान नहीं होने से नई फसल सुरक्षा तकनीकों में निवेश हतोत्साहित हो सकता है, क्योंकि कंपनियों को अपने आंकड़ों के अनुचित इस्तेमाल या उनकी नकल किए जाने की आशंका रहती है।

क्रॉपलाइफ इंडिया के उपाध्यक्ष और बायर क्रॉपसाइंस लिमिटेड के सीओओ मोहन बाबू बोप्पना ने कहा कि समयबद्ध RDP व्यवस्था ने दुनियाभर में नवाचार और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने में मदद की है। यूरोपीय संघ हरित अणुओं (Green Molecules) के पंजीकरण को प्रोत्साहित करने के लिए 13 वर्ष तक का संरक्षण प्रदान करता है। उनके अनुसार, यदि भारत अपने नियामकीय ढांचे को वैश्विक मानकों के अनुरूप बनाता है तो इससे किसानों के लिए उपलब्ध फसल सुरक्षा विकल्प बढ़ेंगे और भारतीय उद्योग को वैश्विक मूल्य श्रृंखला में आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।

कीटों से फसल नुकसान और निर्यात मानकों की चुनौती

उद्योग संगठन के अनुसार, भारत में किसान हर साल कीटों और रोगों के कारण करीब 10-35 प्रतिशत फसल गंवा देते हैं। इससे सालाना लगभग 2 लाख करोड़ रुपये का नुकसान होता है।

BASF एग्रीकल्चरल सॉल्यूशंस इंडिया के बिजनेस डायरेक्टर गिरिधर रानुवा ने कहा कि भारतीय किसानों के लिए उपलब्ध फसल सुरक्षा समाधानों को नए सिरे से विकसित और विस्तारित करने के लिए मजबूत तथा विज्ञान आधारित नियामकीय व्यवस्था की जरूरत है। उन्होंने कहा कि समयबद्ध RDP से बेहतर तकनीकों को बढ़ावा देकर फसल नुकसान कम करने, उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय मजबूत करने में मदद मिल सकती है।

संगठन ने यह भी कहा कि यूरोपीय संघ जैसे निर्यात बाजारों में अधिकतम अवशेष सीमा (Maximum Residue Limits) को लेकर नियम लगातार सख्त हो रहे हैं। ऐसे में बेहतर फसल सुरक्षा तकनीकों तक किसानों की पहुंच भारतीय कृषि निर्यात के लिए भी महत्वपूर्ण है, ताकि किसान और निर्यातक इन सख्त मानकों को पूरा कर सकें।

क्रॉपलाइफ इंडिया ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म पर फसल सुरक्षा उत्पादों की बिक्री को रेगुलेट करने का आग्रह भी किया है। इसके तहत ऑनलाइन बिक्री के लिए लाइसेंस की अनिवार्यता और डिजिटल ट्रेसबिलिटी लागू करने का सुझाव दिया गया है, ताकि ऐसे प्लेटफॉर्म के माध्यम से अनधिकृत फसल सुरक्षा उत्पादों की बिक्री को रोका जा सके।

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