मौसम और भू-राजनीतिक तनाव से जुलाई में वैश्विक खाद्य कीमतों में बढ़ोतरीः एफएओ
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन का खाद्य मूल्य सूचकांक (FAO Food Price Index) जुलाई 2026 में 0.6% बढ़ा। गेहूं, वनस्पति तेल और चीनी की कीमतों में वृद्धि हुई जबकि मांस और डेयरी उत्पादों की कीमतों में गिरावट आई। मौसम, ऊर्जा की कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव खाद्य बाजारों पर दबाव बढ़ा रहा है।
जुलाई में वैश्विक खाद्य कीमतों में बढ़ोतरी हुई। गेहूं, वनस्पति तेल और चीनी की कीमतों में वृद्धि हुई जबकि मांस और डेयरी उत्पादों की कीमतों में गिरावट देखने को मिली। संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) के अनुसार, मौसम संबंधी व्यवधान, ऊर्जा कीमतों में उतार-चढ़ाव और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव खाद्य बाजारों को प्रभावित करने वाले प्रमुख कारक रहे।
FAO खाद्य मूल्य सूचकांक जुलाई 2026 में 131.1 अंक पर पहुंच गया, जो जून के मुकाबले 0.7 अंक या 0.6% अधिक है। एक साल पहले की तुलना में सूचकांक 1% ऊपर रहा, लेकिन मार्च 2022 में दर्ज अपने रिकॉर्ड स्तर से अभी 18.2% नीचे है।
जुलाई में सबसे अधिक दबाव अनाज की कीमतों में देखने को मिला। FAO अनाज मूल्य सूचकांक बढ़कर 113.8 अंक हो गया। यह जुलाई 2025 की तुलना में 6.9% अधिक है। गेहूं की कीमतों में 5.8% की तेज बढ़ोतरी हुई और वे एक साल पहले की तुलना में 9.9% ऊपर पहुंच गईं। FAO के अनुसार, काला सागर क्षेत्र से अनाज निर्यात में लगातार व्यवधान और निर्यात ढांचे को हुए नुकसान को लेकर चिंताओं ने कीमतों को बढ़ाया। प्रमुख उत्पादक देशों में हाल की लू से फसलों को हुए नुकसान ने भी बाजार पर दबाव बढ़ाया।
मक्के की कीमतों में जून के मुकाबले 3.6% की वृद्धि हुई। अमेरिका के कॉर्न बेल्ट के कुछ हिस्सों में गर्म और शुष्क मौसम को लेकर चिंता के कारण कीमतों को समर्थन मिला। बढ़ती ऊर्जा कीमतों और भू-राजनीतिक तनाव ने भी इसमें योगदान दिया। अमेरिका में मक्के की कीमतों में मजबूती का असर ज्वार की कीमतों पर भी पड़ा। इसके विपरीत, जौ की कीमतों में 1.9% की गिरावट आई। ऑस्ट्रेलिया और काला सागर क्षेत्र में बेहतर फसल संभावनाओं से गिरावट को समर्थन मिला।
चावल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें जुलाई में लगभग स्थिर रहीं। FAO ऑल राइस प्राइस इंडेक्स में मामूली बदलाव हुआ। इंडिका चावल की कीमतों में हल्की बढ़ोतरी को अन्य प्रमुख कारोबार वाली चावल किस्मों की मांग में कमी के कारण आई गिरावट ने संतुलित कर दिया।
वनस्पति तेल की कीमतें दो साल के उच्च स्तर पर
वनस्पति तेलों की कीमतों में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। FAO वनस्पति तेल मूल्य सूचकांक 2% बढ़कर 195.7 अंक पर पहुंच गया। यह जून 2022 के बाद इसका सबसे ऊंचा स्तर है। पाम और सोया तेल की कीमतों में बढ़ोतरी ने सूरजमुखी और रेपसीड तेल की कीमतों में गिरावट की भरपाई कर दी। पाम तेल की कीमतें लगातार दूसरे महीने बढ़ीं। इंडोनेशिया के बायोडीजल क्षेत्र से मजबूत मांग और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों ने इसे समर्थन दिया।
दक्षिण-पूर्व एशिया में मौसमी उत्पादन बढ़ने से कीमतों पर कुछ दबाव जरूर आया, लेकिन इसका असर सीमित रहा। सोया तेल की कीमतों को अमेरिका में मजबूत फीडस्टॉक मांग और वैश्विक स्तर पर बढ़ी आयात मांग से समर्थन मिला। वहीं, 2026-27 सीजन में आपूर्ति बढ़ने की उम्मीद के कारण सूरजमुखी और रेपसीड तेल की कीमतों में गिरावट आई। हालांकि, काला सागर क्षेत्र में नए तनाव और निर्यात प्रभावित होने की आशंका ने कीमतों में और गिरावट को सीमित किया।
चीनी की कीमतों में 5.6% उछाल
चीनी बाजार में भी जुलाई में तेजी रही। FAO चीनी मूल्य सूचकांक 5.6% बढ़कर 95 अंक पर पहुंच गया। हालांकि, यह एक साल पहले की तुलना में अभी भी 8% नीचे है। FAO के अनुसार, यूरोपीय संघ में लगातार गर्म और शुष्क मौसम से फसल उत्पादन प्रभावित होने की आशंका ने कीमतों को बढ़ाया। एशिया के प्रमुख उत्पादक देशों में अल नीनो से जुड़ी मौसम परिस्थितियों को लेकर चिंता ने भी बाजार को प्रभावित किया।
ब्राजील में पेट्रोल में अनिवार्य एथेनॉल मिश्रण बढ़ने की उम्मीद ने भी चीनी कीमतों को सहारा दिया। अधिक एथेनॉल उत्पादन के लिए गन्ने का बड़ा हिस्सा इस्तेमाल होने से चीनी की उपलब्धता घट सकती है। हालांकि, ब्राजील के प्रमुख सेंटर-साउथ क्षेत्र में गन्ने की कटाई के लिए बेहतर परिस्थितियों ने अंतरराष्ट्रीय चीनी कीमतों में और बड़ी तेजी को रोक दिया।
डेयरी कीमतों में गिरावट जारी
डेयरी उत्पादों की कीमतों में गिरावट जारी रही। FAO डेयरी मूल्य सूचकांक जुलाई में 0.7% घटा, जिससे अप्रैल से जारी गिरावट का सिलसिला आगे बढ़ा। मक्खन और मिल्क पाउडर की कीमतों में गिरावट ने चीज की कीमतों में वृद्धि के असर को पछाड़ दिया। स्किम्ड मिल्क पाउडर की कीमतें जून की तुलना में 3.3% घटीं। यूरोपीय संघ और ओशिनिया से पर्याप्त निर्यात आपूर्ति तथा पहले की कीमत बढ़ोतरी के बाद खरीदारों की सतर्कता ने कीमतों पर दबाव डाला।
फुल क्रीम मिल्क पाउडर की कीमतों में 3.1% की गिरावट आई। खासकर चीन की कमजोर आयात मांग ने कीमतों पर दबाव बनाया। हालांकि, दक्षिण-पूर्व एशिया और निकट पूर्व से मजबूत खरीदारी ने कुछ राहत दी। मक्खन की कीमतें भी 2.4% घटीं, क्योंकि दूध वसा की बेहतर उपलब्धता और बढ़ती निर्यात आपूर्ति ने बाजार में तंगी कम की।

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