भारत ने गेहूं आटा निर्यात का रास्ता खोला, 5 लाख टन निर्यात की अनुमति
भारत सरकार ने गेहूं आटा और उससे जुड़े उत्पादों के 5 लाख टन निर्यात की अनुमति दी है। हालांकि, गेहूं निर्यात अब भी प्रतिबंधित श्रेणी में रहेगा, लेकिन DGFT की अनुमति से आटा, मैदा और सूजी जैसे उत्पाद विदेश भेजे जा सकेंगे।
भारत में गेहूं के रिकॉर्ड उत्पादन के अनुमान और भरपूर भंडार को देखते हुए केंद्र सरकार ने गेहूं आटा और उससे जुड़े उत्पादों के सीमित निर्यात की अनुमति दे दी है। सरकार ने 5 लाख टन गेहूं आटा और संबंधित उत्पादों के निर्यात की मंजूरी दी है।
शुक्रवार को डीजीएफटी द्वारा इस छूट की अधिसूचना जारी की गई, जिसके बाद पात्रता, आवेदन और आवंटन की प्रक्रिया को निर्धारित करते हुए एक विस्तृत सूचना जारी की गई।
केंद्र सरकार ने मई 2022 में भीषण गर्मी के कारण उत्पादन घटने और घरेलू कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद गेहूं निर्यात पर प्रतिबंध लगा दिया था। हालांकि, अब भी गेहूं और उससे जुड़े उत्पाद “प्रतिबंधित” श्रेणी में ही रहेंगे, लेकिन कड़ी निगरानी और नियंत्रित तंत्र के तहत गेहूं उत्पादों के सीमित निर्यात की अनुमति दी गई है।
हालिया निर्णय के तहत गेहूं या मेस्लिन आटा, जिसमें आटा, मैदा, सूजी/रवा, होलमील आटा और उससे बने उत्पाद शामिल हैं, का कुल 5 लाख टन तक निर्यात किया जा सकेगा। यह निर्यात विदेश व्यापार महानिदेशक (DGFT) द्वारा विशेष अनुमति के माध्यम से होगा। डीजीएफटी ने स्पष्ट किया है कि यह अनुमति मौजूदा नीति शर्तों से अलग होगी और पूरे निर्यात पर कड़ी निगरानी रखी जाएगी।
डीजीएफटी की अधिसूचना के अनुसार, निर्यात अनुमति के लिए आवेदन ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे। पहली आवेदन अवधि 21 जनवरी से 31 जनवरी 2026 तक खुलेगी। इसके बाद हर महीने के अंतिम 10 दिनों में आवेदन आमंत्रित किए जाएंगे, जब तक कि स्वीकृत निर्यात मात्रा पूरी नहीं हो जाती।
निर्यात कोटा आवंटन का फैसला विशेष निर्यात सुविधा समिति करेगी जो निर्यातकों के ट्रैक रिकॉर्ड, प्रसंस्करण क्षमता और वैध निर्यात अनुबंधों जैसे पहलुओं को ध्यान में रखेगी।
उत्पादन घटने के बाद लगा था प्रतिबंध
गौरतलब है कि सरकार ने अगस्त 2022 में गेहूं उत्पादन में गिरावट के बाद मैदा, सूजी और आटा के निर्यात पर रोक लगा दी थी। इन उत्पादों की मांग उन देशों में अधिक है जहां बड़ी भारतीय प्रवासी आबादी रहती है, जिनमें अमेरिका, ब्रिटेन, खाड़ी देश, अफ्रीका के कुछ हिस्से और दक्षिण-पूर्व एशिया शामिल हैं। अब सीमित निर्यात की अनुमति से आटा मिलों और निर्यातकों को राहत मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।


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